श्री चामुंडा चालीसा
पाठ
गणपति-गिरिजा-सुत सुमिर, करूँ मातु गुणगान। चामुंडा की वंदना, देहु अभय वरदान॥
जय चामुंडा माता भवानी। भक्तन की रक्षक कल्याणी॥
खड्ग-त्रिशूल कर में धारी। मुण्डमाल गल छवि अति न्यारी॥
चण्ड-मुण्ड संहार किया तुम। नाम चामुंडा पाया जग में॥
सप्तशती में वर्णित महिमा। दुष्ट-दलन तुम जग-गरिमा॥
सिंह-वाहिनी शस्त्र-धारी। रूप निरख भक्तन मन-हारी॥
जो जन तुमको नित ही ध्यावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥
शत्रु-संकट सब टारन हारी। भक्तन की तुम सदा रखवारी॥
भूत-प्रेत बाधा सब टारो। तंत्र-मंत्र दोष संहारो॥
जो नर श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। रोग-शोक भय निकट न आवै॥
नवरात्रि व्रत जो जन धारे। सुख-समृद्धि माँ ता पर वारे॥
दीन-दुखी की सुनत पुकारा। पल में करती बेड़ा पारा॥
जो जन तुमको शीश नवावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥
लाल पुष्प-सिंदूर चढ़ावैं। श्रद्धा से माँ को रिझावैं॥
रोग-दोष सब दूर भगाती। सुख-समृद्धि घर में लाती॥
जो नर निशदिन ध्यान लगावै। चामुंडा-कृपा सहज वह पावै॥
मंगल-कारी विघ्न-विनाशिनि। भय-हारिणि तुम सुख-प्रदायिनि॥
दश-महाविद्या में तुम न्यारी। आदिशक्ति तुम जग-रखवारी॥
जो श्रद्धा से माँ को ध्यावै। ता के सब बिगड़े बन जावै॥
जो यह चामुंडा चालीसा गावै। भय-संकट सब दूर नसावै॥
नित प्रति पाठ करे जो कोई। ता पर कृपा चामुंडा की होई॥
मन-इच्छित फल सब जन पावैं। सुख-समृद्धि घर में लावैं॥
चामुंडा-कृपा जिन पर होई। ता को कष्ट सतावे न कोई॥
जय माता दी जयकारा गूँजे। भक्त-गण माँ के दर पूजे॥
जो सत भाव करे यह सेवा। रीझत तुरत चामुंडा देवा॥
संकट-मोचनि नाम तुम्हारा। भक्त-हृदय में नित्य निवारा॥
महिमा तुम्हरी अति अपारा। वेद-पुराण करत विस्तारा॥
साहस-बल तुम भक्तन देती। निर्भयता का वर तुम देती॥
घर-घर ज्योति तुम्हारी जागै। नर-नारी सब तुमको पागै॥
दुःख-संकट जो जन पीड़े। तुम्हें सुमिर कर सब दुख छीड़े॥
चामुंडा-स्तुति जो जन गावै। रोग-शोक सब दूर भगावै॥
शक्तिपीठ में महिमा भारी। भव-तारिणि तुम जग-हितकारी॥
मनोकामना सब पूर्ण कराती। श्रद्धा-शक्ति का बल बताती॥
दुष्ट-दलन कर रक्षा करती। भक्तन के सब संकट हरती॥
जो जन चामुंडा गुण गावै। पाप-ताप सब दूर भगावै॥
चामुंडा-वंदन जो जन गावै। इहलोक-परलोक सुख पावै॥
सुख-समृद्धि घर में आवै। भक्ति-शक्ति-संतोष बढ़ावै॥
भय-संकट सब दूर हटावै। चामुंडा जो जन नित ध्यावै॥
मनोकामना वह सहज वह पावै। चामुंडा-नाम जो जन गावै॥
शक्ति-सुख-शान्ति घर में लावै। भक्ति-साहस सब बढ़ावै॥
जय जय जय चामुंडा भवानी। भव-तारिणि तुम जग-कल्याणी॥
चामुंडा चालीसा सरल, पढ़े प्रेम मन लाय। भय-संकट सब दूर हो, माँ की कृपा बरसाय॥
अर्थ (हिन्दी)
- गिरिजा-पुत्र गणपति का स्मरण कर मैं माता का गुणगान करता हूँ; हे चामुंडा माता, वंदना स्वीकार कर अभय वरदान दीजिए।
- हे चामुंडा माता भवानी, आपकी जय हो; आप भक्तों की रक्षक व कल्याणी हैं।
- हाथों में खड्ग व त्रिशूल धारण किए; गले में मुण्डमाला वाली आपकी छवि अति अनुपम है।
- आपने चण्ड व मुण्ड का संहार किया और जगत में "चामुंडा" नाम पाया।
- दुर्गा सप्तशती में आपकी महिमा वर्णित है; दुष्टों का दमन कर आप जगत की गरिमा बढ़ाती हैं।
- सिंह पर सवार व शस्त्र धारण किए; आपका रूप निरखकर भक्तों का मन हर जाता है।
- जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
- आप शत्रु व संकट सब दूर करने वाली हैं; आप सदा भक्तों की रक्षक हैं।
- आप भूत-प्रेत बाधा दूर करती हैं और तंत्र-मंत्र दोष का नाश करती हैं।
- जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।
- जो नवरात्रि का व्रत धारण करता है, हे माँ, आप उस पर सुख-समृद्धि न्योछावर करती हैं।
- आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देती हैं।
- जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
- भक्त लाल पुष्प व सिंदूर चढ़ाते हैं और श्रद्धा से माँ को रिझाते हैं।
- आप समस्त रोग-दोष दूर भगाती हैं और घर में सुख-समृद्धि लाती हैं।
- जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह सहज ही चामुंडा-कृपा प्राप्त करता है।
- आप मंगलकारी व विघ्नों की विनाशिनी हैं; भय हरकर सुख प्रदान करती हैं।
- दश-महाविद्याओं में आप अद्वितीय हैं; आप आदिशक्ति व जगत की रक्षक हैं।
- जो श्रद्धा से माँ का ध्यान करता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
- जो यह चामुंडा चालीसा गाता है, उसके भय व संकट सब दूर नष्ट हो जाते हैं।
- जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर माँ चामुंडा की कृपा होती है।
- सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
- जिन पर माँ चामुंडा की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।
- "जय माता दी" का जयकारा गूँजता है; भक्तगण माँ के द्वार पर पूजते हैं।
- जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर माँ चामुंडा तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाती हैं।
- आपका नाम संकट-मोचनी है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करती हैं।
- आपकी महिमा अति अपार है, जिसका विस्तार वेद-पुराण करते हैं।
- आप भक्तों को साहस व बल देती हैं और निर्भयता का वरदान देती हैं।
- घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
- जो जन दुःख-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।
- जो जन चामुंडा-स्तुति गाता है, वह समस्त रोग-शोक दूर भगा देता है।
- शक्तिपीठों में आपकी महिमा अति महान है; आप भव-तारिणी व जगत-हितकारी हैं।
- आप समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण कराती हैं और श्रद्धा व शक्ति का बल बताती हैं।
- आप दुष्टों का दमन कर रक्षा करती हैं और भक्तों के सब संकट हरती हैं।
- जो जन चामुंडा के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
- जो जन चामुंडा-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
- घर में सुख-समृद्धि आती है और भक्ति, शक्ति व संतोष बढ़ता है।
- जो जन चामुंडा का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।
- जो जन चामुंडा-नाम गाता है, वह सहज ही अपनी मनोकामना पा लेता है।
- घर में शक्ति, सुख व शांति आती है और भक्ति व साहस बढ़ता है।
- हे चामुंडा भवानी, आपकी जय हो; आप भव-तारिणी व जगत की कल्याणी हैं।
- जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल चामुंडा चालीसा पढ़ता है, उसके भय-संकट दूर होते हैं और माँ की कृपा बरसती है।
लाभ
- भय, शत्रु व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
- संकट, रोग व बाधाओं का नाश होता है।
- साहस, शक्ति व आत्मबल में वृद्धि होती है।
- भूत-प्रेत व तंत्र-दोष से सुरक्षा मिलती है।
कब करें पाठ
नवरात्रि व अष्टमी को · मंगलवार व शुक्रवार को · संध्या पूजा में
स्रोत
रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक चामुंडा चालीसा · गीता प्रेस, गोरखपुर — चालीसा संग्रह
