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॥ श्री ॥

श्री चामुंडा चालीसा

चालीसा · माँ दुर्गा

पाठ

गणपति-गिरिजा-सुत सुमिर, करूँ मातु गुणगान। चामुंडा की वंदना, देहु अभय वरदान॥

1

जय चामुंडा माता भवानी। भक्तन की रक्षक कल्याणी॥

2

खड्ग-त्रिशूल कर में धारी। मुण्डमाल गल छवि अति न्यारी॥

3

चण्ड-मुण्ड संहार किया तुम। नाम चामुंडा पाया जग में॥

4

सप्तशती में वर्णित महिमा। दुष्ट-दलन तुम जग-गरिमा॥

5

सिंह-वाहिनी शस्त्र-धारी। रूप निरख भक्तन मन-हारी॥

6

जो जन तुमको नित ही ध्यावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥

7

शत्रु-संकट सब टारन हारी। भक्तन की तुम सदा रखवारी॥

8

भूत-प्रेत बाधा सब टारो। तंत्र-मंत्र दोष संहारो॥

9

जो नर श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। रोग-शोक भय निकट न आवै॥

10

नवरात्रि व्रत जो जन धारे। सुख-समृद्धि माँ ता पर वारे॥

11

दीन-दुखी की सुनत पुकारा। पल में करती बेड़ा पारा॥

12

जो जन तुमको शीश नवावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥

13

लाल पुष्प-सिंदूर चढ़ावैं। श्रद्धा से माँ को रिझावैं॥

14

रोग-दोष सब दूर भगाती। सुख-समृद्धि घर में लाती॥

15

जो नर निशदिन ध्यान लगावै। चामुंडा-कृपा सहज वह पावै॥

16

मंगल-कारी विघ्न-विनाशिनि। भय-हारिणि तुम सुख-प्रदायिनि॥

17

दश-महाविद्या में तुम न्यारी। आदिशक्ति तुम जग-रखवारी॥

18

जो श्रद्धा से माँ को ध्यावै। ता के सब बिगड़े बन जावै॥

19

जो यह चामुंडा चालीसा गावै। भय-संकट सब दूर नसावै॥

20

नित प्रति पाठ करे जो कोई। ता पर कृपा चामुंडा की होई॥

21

मन-इच्छित फल सब जन पावैं। सुख-समृद्धि घर में लावैं॥

22

चामुंडा-कृपा जिन पर होई। ता को कष्ट सतावे न कोई॥

23

जय माता दी जयकारा गूँजे। भक्त-गण माँ के दर पूजे॥

24

जो सत भाव करे यह सेवा। रीझत तुरत चामुंडा देवा॥

25

संकट-मोचनि नाम तुम्हारा। भक्त-हृदय में नित्य निवारा॥

26

महिमा तुम्हरी अति अपारा। वेद-पुराण करत विस्तारा॥

27

साहस-बल तुम भक्तन देती। निर्भयता का वर तुम देती॥

28

घर-घर ज्योति तुम्हारी जागै। नर-नारी सब तुमको पागै॥

29

दुःख-संकट जो जन पीड़े। तुम्हें सुमिर कर सब दुख छीड़े॥

30

चामुंडा-स्तुति जो जन गावै। रोग-शोक सब दूर भगावै॥

31

शक्तिपीठ में महिमा भारी। भव-तारिणि तुम जग-हितकारी॥

32

मनोकामना सब पूर्ण कराती। श्रद्धा-शक्ति का बल बताती॥

33

दुष्ट-दलन कर रक्षा करती। भक्तन के सब संकट हरती॥

34

जो जन चामुंडा गुण गावै। पाप-ताप सब दूर भगावै॥

35

चामुंडा-वंदन जो जन गावै। इहलोक-परलोक सुख पावै॥

36

सुख-समृद्धि घर में आवै। भक्ति-शक्ति-संतोष बढ़ावै॥

37

भय-संकट सब दूर हटावै। चामुंडा जो जन नित ध्यावै॥

38

मनोकामना वह सहज वह पावै। चामुंडा-नाम जो जन गावै॥

39

शक्ति-सुख-शान्ति घर में लावै। भक्ति-साहस सब बढ़ावै॥

40

जय जय जय चामुंडा भवानी। भव-तारिणि तुम जग-कल्याणी॥

चामुंडा चालीसा सरल, पढ़े प्रेम मन लाय। भय-संकट सब दूर हो, माँ की कृपा बरसाय॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. गिरिजा-पुत्र गणपति का स्मरण कर मैं माता का गुणगान करता हूँ; हे चामुंडा माता, वंदना स्वीकार कर अभय वरदान दीजिए।
  2. हे चामुंडा माता भवानी, आपकी जय हो; आप भक्तों की रक्षक व कल्याणी हैं।
  3. हाथों में खड्ग व त्रिशूल धारण किए; गले में मुण्डमाला वाली आपकी छवि अति अनुपम है।
  4. आपने चण्ड व मुण्ड का संहार किया और जगत में "चामुंडा" नाम पाया।
  5. दुर्गा सप्तशती में आपकी महिमा वर्णित है; दुष्टों का दमन कर आप जगत की गरिमा बढ़ाती हैं।
  6. सिंह पर सवार व शस्त्र धारण किए; आपका रूप निरखकर भक्तों का मन हर जाता है।
  7. जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
  8. आप शत्रु व संकट सब दूर करने वाली हैं; आप सदा भक्तों की रक्षक हैं।
  9. आप भूत-प्रेत बाधा दूर करती हैं और तंत्र-मंत्र दोष का नाश करती हैं।
  10. जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।
  11. जो नवरात्रि का व्रत धारण करता है, हे माँ, आप उस पर सुख-समृद्धि न्योछावर करती हैं।
  12. आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देती हैं।
  13. जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
  14. भक्त लाल पुष्प व सिंदूर चढ़ाते हैं और श्रद्धा से माँ को रिझाते हैं।
  15. आप समस्त रोग-दोष दूर भगाती हैं और घर में सुख-समृद्धि लाती हैं।
  16. जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह सहज ही चामुंडा-कृपा प्राप्त करता है।
  17. आप मंगलकारी व विघ्नों की विनाशिनी हैं; भय हरकर सुख प्रदान करती हैं।
  18. दश-महाविद्याओं में आप अद्वितीय हैं; आप आदिशक्ति व जगत की रक्षक हैं।
  19. जो श्रद्धा से माँ का ध्यान करता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
  20. जो यह चामुंडा चालीसा गाता है, उसके भय व संकट सब दूर नष्ट हो जाते हैं।
  21. जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर माँ चामुंडा की कृपा होती है।
  22. सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
  23. जिन पर माँ चामुंडा की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।
  24. "जय माता दी" का जयकारा गूँजता है; भक्तगण माँ के द्वार पर पूजते हैं।
  25. जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर माँ चामुंडा तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाती हैं।
  26. आपका नाम संकट-मोचनी है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करती हैं।
  27. आपकी महिमा अति अपार है, जिसका विस्तार वेद-पुराण करते हैं।
  28. आप भक्तों को साहस व बल देती हैं और निर्भयता का वरदान देती हैं।
  29. घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
  30. जो जन दुःख-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।
  31. जो जन चामुंडा-स्तुति गाता है, वह समस्त रोग-शोक दूर भगा देता है।
  32. शक्तिपीठों में आपकी महिमा अति महान है; आप भव-तारिणी व जगत-हितकारी हैं।
  33. आप समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण कराती हैं और श्रद्धा व शक्ति का बल बताती हैं।
  34. आप दुष्टों का दमन कर रक्षा करती हैं और भक्तों के सब संकट हरती हैं।
  35. जो जन चामुंडा के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
  36. जो जन चामुंडा-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
  37. घर में सुख-समृद्धि आती है और भक्ति, शक्ति व संतोष बढ़ता है।
  38. जो जन चामुंडा का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।
  39. जो जन चामुंडा-नाम गाता है, वह सहज ही अपनी मनोकामना पा लेता है।
  40. घर में शक्ति, सुख व शांति आती है और भक्ति व साहस बढ़ता है।
  41. हे चामुंडा भवानी, आपकी जय हो; आप भव-तारिणी व जगत की कल्याणी हैं।
  42. जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल चामुंडा चालीसा पढ़ता है, उसके भय-संकट दूर होते हैं और माँ की कृपा बरसती है।

लाभ

  • भय, शत्रु व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
  • संकट, रोग व बाधाओं का नाश होता है।
  • साहस, शक्ति व आत्मबल में वृद्धि होती है।
  • भूत-प्रेत व तंत्र-दोष से सुरक्षा मिलती है।

कब करें पाठ

नवरात्रि व अष्टमी को · मंगलवार व शुक्रवार को · संध्या पूजा में

स्रोत

रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक चामुंडा चालीसा · गीता प्रेस, गोरखपुर — चालीसा संग्रह

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