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लिपि:
॥ श्री ॥
दुर्गा सहस्रनाम
सहस्रनाम · माँ दुर्गा
पाठ
॥ ध्यानम् ॥ या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
प्रथम शतक (नाम 1–100)
- महाविद्या — महान विद्या-स्वरूपा
- जगन्माता — जगत् की माता
- महालक्ष्मी — महालक्ष्मी स्वरूपा
- शिवप्रिया — शिव की प्रिया
- विष्णुमाया — विष्णु की माया-शक्ति
- शुभा — कल्याणमयी
- शान्ता — शांत स्वरूपा
- सिद्धा — सिद्ध-स्वरूपा
- सिद्धसरस्वती — सिद्ध सरस्वती रूपा
- क्षमा — क्षमाशीला
- कान्तिः — कांति (तेज) स्वरूपा
- प्रभा — प्रभा (आभा) रूपा
- ज्योत्स्ना — चाँदनी-स्वरूपा
- पार्वती — पर्वतराज की पुत्री
- सर्वमङ्गला — सबका मंगल करने वाली
- हिङ्गुला — हिंगलाज देवी रूपा
- चण्डिका — प्रचंड रूपा
- दान्ता — संयमशीला
- पद्मा — कमल-स्वरूपा
- लक्ष्मी — लक्ष्मी रूपा
- हरिप्रिया — हरि (विष्णु) की प्रिया
- त्रिपुरा — त्रिपुरसुंदरी रूपा
- नन्दिनी — आनंद देने वाली
- नन्दा — आनंदमयी
- सुनन्दा — परम आनंदमयी
- सुरवन्दिता — देवताओं द्वारा वंदित
- यज्ञविद्या — यज्ञ-विद्या स्वरूपा
- महामाया — महामाया
- वेदमाता — वेदों की माता
- सुधा — अमृत-स्वरूपा
- धृतिः — धैर्य-स्वरूपा
- प्रीतिः — प्रीति (प्रेम) स्वरूपा
- प्रथा — प्रसिद्धि-स्वरूपा
- प्रसिद्धा — सर्वविख्यात
- मृडानी — शिव-पत्नी (मृड की शक्ति)
- विंध्यवासिनी — विंध्याचल पर निवास करने वाली
- सिद्धविद्या — सिद्ध-विद्या रूपा
- महाशक्तिः — महाशक्ति
- पृथ्वी — पृथ्वी-स्वरूपा
- नारदसेविता — नारद द्वारा सेवित
- पुरुहुतप्रिया — इंद्र की प्रिया (शक्ति)
- कान्ता — मनोहर रूपा
- कामिनी — कमनीय रूपा
- पद्मलोचना — कमल-नयनी
- प्रह्लादिनी — आनंद देने वाली
- महामाता — महान माता
- दुर्गा — दुर्गम संकट हरने वाली
- दुर्गतिनाशिनी — दुर्गति का नाश करने वाली
- ज्वालामुखी — ज्वालामुखी देवी रूपा
- सुगोत्रा — श्रेष्ठ गोत्र वाली
- ज्योतिः — ज्योति-स्वरूपा
- कुमुदवासिनी — कुमुद (कमल) में वास करने वाली
- दुर्गमा — कठिनता से प्राप्य
- दुर्लभा — दुर्लभ
- विद्या — विद्या-स्वरूपा
- स्वर्गतिः — उत्तम गति देने वाली
- पुरवासिनी — पुर (देह) में वास करने वाली
- अपर्णा — तप में पर्ण भी त्यागने वाली
- शाम्बरीमाया — शाम्बरी माया स्वरूपा
- मदिरा — आनंद-मद देने वाली
- कुलवागीश्वरी — कुल-वाणी की ईश्वरी
- नित्या — नित्य (शाश्वत)
- नित्यक्लिन्ना — सदा करुणा-आर्द्र
- कृशोदरी — कृश उदर वाली
- कामेश्वरी — काम की ईश्वरी
- नीला — नील-वर्णा
- भीरुण्डा — भयंकर रूपा
- वह्निवासिनी — अग्नि में वास करने वाली
- लम्बोदरी — विशाल उदर वाली
- महाकाली — महाकाली रूपा
- विद्याविद्येश्वरी — विद्या-अविद्या की ईश्वरी
- नरेश्वरी — मनुष्यों की ईश्वरी
- सत्या — सत्य-स्वरूपा
- सर्वसौभाग्यवर्धिनी — समस्त सौभाग्य बढ़ाने वाली
- सङ्कर्षणी — संहार-शक्ति रूपा
- नारसिंही — नृसिंह-शक्ति रूपा
- वैष्णवी — विष्णु-शक्ति रूपा
- महोदरी — विशाल उदर वाली
- कात्यायनी — कात्यायन-गोत्र में अवतरित
- चम्पा — चंपा-पुष्प सदृश
- सर्वसम्पत्तिकारिणी — समस्त संपत्ति देने वाली
- नारायणी — नारायण-शक्ति रूपा
- महानिद्रा — महानिद्रा रूपा
- योगनिद्रा — योगनिद्रा स्वरूपा
- प्रभावती — प्रभा (तेज) वाली
- प्रज्ञापारमिता — प्रज्ञा की पराकाष्ठा
- प्रज्ञा — प्रज्ञा (बुद्धि) रूपा
- तारा — तारने वाली (तारा देवी)
- मधुमती — मधुर बुद्धि वाली
- मधु — मधु (माधुर्य) रूपा
- क्षीरार्णवसुधाहारा — क्षीर-सागर के अमृत का हार धारिणी
- कालिका — कालिका रूपा
- सिंहवाहना — सिंह पर सवार
- ओंकारा — ॐकार-स्वरूपा
- वसुधाकारा — पृथ्वी रूपा
- चेतना — चेतना-शक्ति रूपा
- कोपनाकृतिः — कुपित आकृति वाली
- अर्धबिन्दुधरा — अर्ध-बिंदु (नाद) धारिणी
- धारा — धारा-स्वरूपा
- विश्वमाता — विश्व की माता
द्वितीय शतक (नाम 101–200)
- कलावती — कलाओं से युक्त
- पद्मावती — कमल-स्वरूपा
- सुवस्त्रा — सुंदर वस्त्र वाली
- प्रबुद्धा — पूर्ण जाग्रत ज्ञानमयी
- सरस्वती — सरस्वती रूपा
- कुण्डासना — कुंड-पीठ पर आसीन
- जगद्धात्री — जगत् को धारण करने वाली
- बुद्धमाता — बुद्ध की माता (शक्ति)
- जिनेश्वरी — जिनेंद्र की ईश्वरी
- जिनमता — जिन-मत स्वरूपा
- जिनेन्द्रा — जिनेंद्र-शक्ति रूपा
- शारदा — शारदा (सरस्वती) रूपा
- हंसवाहना — हंस पर सवार
- राज्यलक्ष्मी — राज्य की लक्ष्मी
- वषट्कारा — वषट्कार-स्वरूपा
- सुधाकारा — अमृतमयी
- सुधात्मिका — अमृत-स्वरूपा
- राजनीतिः — राजनीति-स्वरूपा
- त्रयी — तीन वेद रूपा
- वार्ता — वार्ता (कृषि-वाणिज्य) रूपा
- दण्डनीतिः — दंडनीति-स्वरूपा
- क्रियावती — क्रिया-शक्ति वाली
- सद्भूतिः — सत् ऐश्वर्य रूपा
- तारिणी — तारने वाली
- श्रद्धा — श्रद्धा-स्वरूपा
- सद्गतिः — सद्गति देने वाली
- सत्परायणा — सत्य में तत्पर
- सिन्धुः — सिंधु (सागर) रूपा
- मन्दाकिनी — आकाशगंगा रूपा
- गङ्गा — गंगा-स्वरूपा
- यमुना — यमुना-स्वरूपा
- सरस्वती — सरस्वती (नदी) रूपा
- गोदावरी — गोदावरी रूपा
- विपाशा — विपाशा (व्यास) नदी रूपा
- कावेरी — कावेरी रूपा
- शतद्रुका — शतद्रु (सतलज) रूपा
- सरयूः — सरयू रूपा
- चन्द्रभागा — चंद्रभागा (चिनाब) रूपा
- कौशिकी — कौशिकी (कोसी) रूपा
- गण्डकी — गंडकी रूपा
- गण्डकी — गंडकी नदी रूपा
- शुचिः — पवित्र-स्वरूपा
- नर्मदा — नर्मदा रूपा
- कर्मनाशा — कर्मनाशा नदी रूपा
- चर्मण्वती — चंबल नदी रूपा
- देविका — देविका नदी रूपा
- वेत्रवती — बेतवा नदी रूपा
- वितस्ता — झेलम नदी रूपा
- वरदा — वर देने वाली
- नरवाहना — नर को वाहन बनाने वाली
- सती — सती-स्वरूपा
- पतिव्रता — पतिव्रता
- साध्वी — साध्वी (सती)
- सुचक्षुः — सुंदर नेत्र वाली
- कुण्डवासिनी — कुंड में वास करने वाली
- एकचक्षुः — एक नेत्र वाली
- सहस्राक्षी — सहस्र नेत्र वाली
- सुश्रोणिः — सुंदर कटि वाली
- भगमालिनी — भग-मालाधारिणी
- सेना — सेना-शक्ति रूपा
- श्रेणिः — श्रेणी-स्वरूपा
- पताका — पताका (ध्वज) रूपा
- सुव्यूहा — उत्तम व्यूह वाली
- युद्धकान्क्षिणी — युद्ध की इच्छुक
- पताकिनी — ध्वजधारिणी
- दयारम्भा — दया का आरंभ रूपा
- विपञ्चीपञ्चमप्रिया — वीणा के पंचम स्वर की प्रेमी
- परापरकलाकान्ता — पर-अपर कलाओं से कांत
- त्रिशक्तिः — तीन शक्ति रूपा
- मोक्षदायिनी — मोक्ष देने वाली
- ऐन्द्री — इंद्र-शक्ति रूपा
- माहेश्वरी — महेश्वर-शक्ति रूपा
- ब्राह्मी — ब्रह्मा-शक्ति रूपा
- कौमारी — कुमार (कार्तिकेय) शक्ति रूपा
- कुलवासिनी — कुल में वास करने वाली
- इच्छा — इच्छा-शक्ति रूपा
- भगवती — ऐश्वर्यमयी भगवती
- शक्तिः — शक्ति-स्वरूपा
- कामधेनुः — कामधेनु रूपा
- कृपावति — कृपामयी
- वज्रायुधा — वज्र को आयुध रखने वाली
- वज्रहस्ता — हाथ में वज्र धारिणी
- चण्डी — चंडी रूपा
- चण्डपराक्रमा — प्रचंड पराक्रम वाली
- गौरी — गौर-वर्णा
- सुवर्णवर्णा — स्वर्ण-वर्णा
- स्थितिसंहारकारिणी — स्थिति व संहार करने वाली
- एका — एक (अद्वितीय)
- अनेका — अनेक रूपा
- महेज्या — महान पूज्या
- शतबाहुः — सौ भुजाओं वाली
- महाभुजा — विशाल भुजा वाली
- भुजङ्गभूषणा — सर्प के आभूषण वाली
- भूषा — आभूषण-स्वरूपा
- षट्चक्रक्रमवासिनी — षट्चक्रों में क्रमशः वास करने वाली
- षट्चक्रभेदिनी — षट्चक्रों का भेदन करने वाली
- श्यामा — श्याम-वर्णा
- कायस्था — देह में स्थित
- कायवर्जिता — देह से रहित
- सुस्मिता — मधुर मुस्कान वाली
तृतीय शतक (नाम 201–300)
- सुमुखी — सुंदर मुख वाली
- क्षामा — क्षमाशीला कृशा
- मूलप्रकृतिः — मूल प्रकृति रूपा
- ईश्वरी — ईश्वरी
- अजा — अजन्मा
- बहुवर्णा — अनेक वर्णों वाली
- पुरुषार्थप्रवर्तिनी — पुरुषार्थ में प्रवृत्त कराने वाली
- रक्ता — रक्त-वर्णा
- नीला — नील-वर्णा
- सिता — श्वेत-वर्णा
- श्यामा — श्याम-वर्णा
- कृष्णा — कृष्ण-वर्णा
- पीता — पीत-वर्णा
- कर्बुरा — चित्र-वर्णा
- क्षुधा — क्षुधा-स्वरूपा
- तृष्णा — तृष्णा-स्वरूपा
- जरावृद्धा — जरा से वृद्धा रूपा
- तरुणी — तरुण रूपा
- करुणालया — करुणा का धाम
- कला — कला-स्वरूपा
- काष्टा — काष्ठा (काल-अंश) रूपा
- मुहूर्ता — मुहूर्त-स्वरूपा
- निमेषा — निमेष (काल) रूपा
- कालरूपिणी — काल-रूपा
- सुकर्णरसना — उत्तम कर्ण-रसना इंद्रिय वाली
- नासा — घ्राण-इंद्रिय रूपा
- चक्षुः — नेत्र-इंद्रिय रूपा
- स्पर्शवती — स्पर्श-इंद्रिय रूपा
- रसा — रस-इंद्रिय रूपा
- गन्धप्रिया — गंध की प्रेमी
- सुगन्धा — सुगंध-स्वरूपा
- सुस्पर्शा — सुखद स्पर्श वाली
- मनोगतिः — मन की गति रूपा
- मृगनाभिः — कस्तूरी-स्वरूपा
- मृगाक्षी — मृग-नयनी
- कर्पूरामोदधारिणी — कर्पूर-सुगंध धारिणी
- पद्मयोनिः — कमल से उत्पन्न
- सुकेशी — सुंदर केश वाली
- सुलिङ्गा — शुभ लिंग (चिह्न) वाली
- भगरूपिणि — भग-रूपा
- योनिमुद्रा — योनि-मुद्रा रूपा
- महामुद्रा — महामुद्रा रूपा
- खेचरी — खेचरी-मुद्रा रूपा
- खगगामिनी — आकाश में गमन करने वाली
- मधुश्री — माधुर्य की शोभा
- माधवीवल्ली — माधवी-लता रूपा
- मधुमत्ता — मधु से मत्त
- मदोद्धता — मद से उद्धत
- मातङ्गी — मातंगी रूपा
- शुकहस्ता — हाथ में शुक (तोता) वाली
- पुष्पबाणा — पुष्प-बाण वाली
- इक्षुचापिनी — गन्ने का धनुष धारिणी
- रक्ताम्बरधरा — लाल वस्त्र धारिणी
- क्षीवा — आनंद-मत्त
- रक्तपुष्पावतंसिनी — लाल पुष्प का अवतंस धारिणी
- शुभ्राम्बरधरा — श्वेत वस्त्र धारिणी
- धीरा — धीर-स्वरूपा
- महाश्वेता — महाश्वेता रूपा
- वसुप्रिया — धन की प्रेमी
- सुवेणिः — सुंदर वेणी वाली
- पद्महस्ता — हाथ में कमल वाली
- मुक्ताहारविभूषणा — मुक्ता-हार से विभूषित
- कर्पूरामोदनिःश्वासा — कर्पूर-सुगंधित श्वास वाली
- पद्मिनी — कमलिनी रूपा
- पद्ममन्दिरा — कमल-मंदिर वाली
- खड्गिनी — खड्गधारिणी
- चक्रहस्ता — हाथ में चक्र वाली
- भुसुण्डी — भुशुंडी (अस्त्र) धारिणी
- परिघायुधा — परिघ-आयुध वाली
- चापिनी — धनुर्धारिणी
- पाशहस्ता — हाथ में पाश वाली
- त्रिशुलवरधारिणी — श्रेष्ठ त्रिशूल धारिणी
- सुबाणा — उत्तम बाण वाली
- शक्तिहस्ता — हाथ में शक्ति (अस्त्र) वाली
- मयूरवरवाहना — श्रेष्ठ मयूर वाहना
- वरायुधधरा — श्रेष्ठ आयुध धारिणी
- वीरा — वीर-स्वरूपा
- वीरपानमदोत्कटा — वीर-पान के मद से उत्कट
- वसुधा — पृथ्वी रूपा
- वसुधारा — धन-धारा देने वाली
- जया — विजय-स्वरूपा
- शाकम्भरी — शाकंभरी देवी रूपा
- शिवा — कल्याणकारिणी
- विजया — विजय देने वाली
- जयन्ती — जयंती रूपा
- सुस्तनी — सुंदर स्तन वाली
- शत्रुनाशिनी — शत्रुओं का नाश करने वाली
- अन्तर्वत्नी — गर्भवती रूपा
- वेदशक्तिः — वेद-शक्ति रूपा
- वरदा — वर देने वाली
- वरधारिणी — वर धारण कराने वाली
- शीतला — शीतलता देने वाली
- सुशीला — सुशील
- बालग्रहविनाशिनी — बाल-ग्रह बाधा नाश करने वाली
- कुमारी — कुमारी रूपा
- सुपर्वा — शुभ पर्व रूपा
- कामाख्या — कामाख्या देवी रूपा
- कामवन्दिता — काम (इच्छा) से वंदित
- जालन्धरधरा — जालंधर-पीठ धारिणी
- अनन्ता — अनंत-स्वरूपा
चतुर्थ शतक (नाम 301–400)
- कामरूपनिवासिनी — कामरूप में वास करने वाली
- कामबीजवती — काम-बीज (मंत्र) वाली
- सत्या — सत्य-स्वरूपा
- सत्यधर्मपरायणा — सत्य-धर्म में तत्पर
- स्थूलमार्गस्थिता — स्थूल मार्ग में स्थित
- सूक्ष्मा — सूक्ष्म-स्वरूपा
- सूक्ष्मबुद्धिप्रबोधिनी — सूक्ष्म बुद्धि जगाने वाली
- षट्कोणा — षट्कोण (यंत्र) रूपा
- त्रिकोणा — त्रिकोण रूपा
- त्रिनेत्रा — तीन नेत्रों वाली
- त्रिपुरसुन्दरी — त्रिपुरसुंदरी रूपा
- वृषप्रिया — वृष (धर्म) की प्रेमी
- वृषारूढा — वृष पर आरूढ़
- महिषासुरघातिनी — महिषासुर का वध करने वाली
- शुम्भदर्पहरा — शुंभ का दर्प हरने वाली
- दीप्ता — देदीप्यमान
- दीप्तपावकसन्निभा — प्रज्वलित अग्नि सदृश
- कपालभूषणा — कपाल-आभूषण वाली
- काली — काली रूपा
- कपालमाल्यधारिणी — कपाल-माला धारिणी
- कपालकुण्डला — कपाल-कुंडल वाली
- दीर्घा — दीर्घ-स्वरूपा
- शिवा दूती — शिवदूती रूपा
- घनध्वनिः — मेघ-गर्जन सदृश ध्वनि वाली
- सिद्धिदा — सिद्धि देने वाली
- बुद्धिदा — बुद्धि देने वाली
- नित्या — नित्य
- सत्यमार्गप्रबोधिनी — सत्य-मार्ग जगाने वाली
- कम्बुग्रीवा — शंख सदृश ग्रीवा वाली
- वसुमती — रत्नवती (पृथ्वी)
- छत्रच्छायाकृतालया — छत्र-छाया में निवास करने वाली
- जगद्गर्भा — जगत् को गर्भ में धारण करने वाली
- कुण्डलिनी — कुंडलिनी-शक्ति रूपा
- भुजगाकारशायनी — सर्प-आकार में शयन करने वाली
- प्रोल्लसत्सप्तपद्मा — सात कमलों में उल्लसित
- नाभिनालमृणालिनी — नाभि-नाल रूपी मृणाल वाली
- मूलाधारा — मूलाधार-स्थिता
- निराकारा — निराकार
- वह्रिकुण्डकृतालया — अग्नि-कुंड में निवास करने वाली
- वायुकुण्डसुखासीना — वायु-कुंड में सुखासीन
- निराधारा — आधार-रहित
- निराश्रया — आश्रय-रहित
- श्वासोच्छ्वासगतिः — श्वास-प्रश्वास की गति रूपा
- जीवा — जीव-शक्ति रूपा
- ग्रहिणी — ग्रहण करने वाली
- वह्निसंश्रया — अग्नि का आश्रय
- वह्नितन्तुसमुत्थाना — अग्नि-तंतु से उत्थित
- षड्रसास्वादलोलुपा — छह रसों के स्वाद में रत
- तपस्विनी — तपस्विनी
- तपः सिद्धिः — तप की सिद्धि रूपा
- तापसी — तपस्या करने वाली
- तपः प्रिया — तप की प्रेमी
- तपोनिष्ठा — तप में निष्ठ
- तपोयुक्ता — तप से युक्त
- तपसःसिद्धिदायिनी — तप की सिद्धि देने वाली
- सप्तधातुमयी मूर्तिः — सप्त-धातुमयी मूर्ति
- सप्तधात्वन्तराश्रया — सप्त-धातुओं में अंतर्निहित
- देहपुष्टिः — देह की पुष्टि रूपा
- मनस्तुष्टिः — मन की तुष्टि रूपा
- अन्नपुष्टिः — अन्न से पुष्टि देने वाली
- बलोद्धता — बल से उद्धत
- ओषधिः — औषधि-स्वरूपा
- वैद्यमाता — वैद्यों की माता
- द्रव्यशाक्तिः — द्रव्य-शक्ति रूपा
- प्रभाविनी — प्रभावशालिनी
- वैद्या — वैद्य-विद्या रूपा
- वैद्यचिकित्सा — चिकित्सा-शक्ति रूपा
- सुपथ्या — हितकर पथ्य रूपा
- रोगनाशिनी — रोगों का नाश करने वाली
- मृगया — आखेट-शक्ति रूपा
- मृगमांसादा — मृग-मांस भक्षण रूपा
- मृगत्वक् — मृग-चर्म धारिणी
- मृगलोचना — मृग-नयनी
- वागुरा — जाल-स्वरूपा
- बन्धरूपा — बंधन-रूपा
- वधरूपा — वध-रूपा
- वधोद्धता — वध को उद्यत
- बन्दी — बंदी (स्तुति-पाठिका) रूपा
- वन्दिस्तुताकारा — वंदीजनों से स्तुत
- काराबन्धविमोचनी — कारागार-बंधन से मुक्त करने वाली
- शृङ्खला — शृंखला (बेड़ी) रूपा
- खलहा — दुष्टों का नाश करने वाली
- विद्युत — विद्युत-स्वरूपा
- दृढबन्धविमोचनी — दृढ़ बंधन से मुक्त करने वाली
- अम्बिका — जगज्जननी अम्बिका
- अम्बालिका — अम्बालिका रूपा
- अम्बा — माता अम्बा
- स्वक्षा — सुंदर नेत्र वाली
- साधुजनार्चिता — साधुजनों द्वारा पूजित
- कौलिकी — कुल-मार्ग की देवी
- कुलविद्या — कुल-विद्या रूपा
- सुकुला — श्रेष्ठ कुल वाली
- कुलपूजिता — कुल द्वारा पूजित
- कालचक्रभ्रमा — कालचक्र में भ्रमण करने वाली
- भ्रान्ता — भ्रमणशील
- विभ्रमा — विभ्रम-स्वरूपा
- भ्रमनाशिनी — भ्रम का नाश करने वाली
- वात्याली — बवंडर-स्वरूपा
- मेघमाला — मेघ-माला रूपा
- सुवृष्टिः — शुभ वृष्टि देने वाली
पंचम शतक (नाम 401–500)
- सस्यवर्धिनी — फसल बढ़ाने वाली
- अकारा — अ-अक्षर रूपा
- इकारा — इ-अक्षर रूपा
- उकारा — उ-अक्षर रूपा
- ऐकाररूपिणी — ऐ-अक्षर रूपा
- ह्रींकारी — ह्रीं-बीज रूपा
- बीजरूपा — बीज-मंत्र रूपा
- क्लींकारा — क्लीं-बीज रूपा
- अम्बरवासिनी — आकाश में वास करने वाली
- सर्वाक्षरमयी शक्तिः — समस्त अक्षरमयी शक्ति
- अक्षरा — अक्षर (अविनाशी) रूपा
- वर्णमालिनी — वर्ण-माला रूपा
- सिन्दूरारुणवक्त्रा — सिंदूर सदृश अरुण मुख वाली
- सिन्दूरतिलकप्रिया — सिंदूर-तिलक की प्रेमी
- वश्या — वश में करने वाली
- वश्यबीजा — वशीकरण-बीज रूपा
- लोकवश्यविभाविनी — लोक को वश में करने वाली
- नृपवश्या — राजाओं को वश करने वाली
- नृपैः सेव्या — राजाओं द्वारा सेव्य
- नृपवश्यकरी — राजाओं को वश में करने वाली
- प्रिया — प्रिय-स्वरूपा
- महिषी — पटरानी (महिषी) रूपा
- नृपमान्या — राजाओं द्वारा माननीय
- नृमान्या — मनुष्यों द्वारा माननीय
- नृपनन्दिनी — राजाओं को आनंद देने वाली
- नृपधर्ममयी — राज-धर्ममयी
- धन्या — धन्य-स्वरूपा
- धनधान्यविवर्धिनी — धन-धान्य बढ़ाने वाली
- चतुर्वर्णमयी मूर्तिः — चार वर्णों की मूर्ति
- चतुर्वर्णैश्च पूजिता — चारों वर्णों द्वारा पूजित
- सर्वधर्ममयी सिद्धिः — सर्व-धर्ममयी सिद्धि
- चतुराश्रमवासिनी — चार आश्रमों में वास करने वाली
- ब्राह्मणी — ब्राह्मण-शक्ति रूपा
- क्षत्रिया — क्षत्रिय-शक्ति रूपा
- वैश्या — वैश्य-शक्ति रूपा
- शूद्रा — शूद्र-शक्ति रूपा
- अवरवर्णजा — अवर वर्ण में उत्पन्न
- वेदमार्गरता — वेद-मार्ग में रत
- यज्ञा — यज्ञ-स्वरूपा
- वेदविश्वविभाविनी — वेद-विश्व को प्रकट करने वाली
- अस्त्रशस्त्रमयी विद्या — अस्त्र-शस्त्र विद्या रूपा
- वरशस्त्रास्त्रधारिणी — श्रेष्ठ शस्त्र-अस्त्र धारिणी
- सुमेधा — उत्तम बुद्धि वाली
- सत्यमेधा — सत्य-बुद्धि रूपा
- भद्रकाली — भद्रकाली रूपा
- अपराजिता — अपराजेय
- गायत्री — गायत्री रूपा
- सत्कृतिः — सत्कर्म रूपा
- सन्ध्या — संध्या-स्वरूपा
- सावित्री — सावित्री रूपा
- त्रिपदाश्रया — त्रिपदा (गायत्री) का आश्रय
- त्रिसन्ध्या — तीनों संध्या रूपा
- त्रिपदी — त्रिपदा रूपा
- धात्री — धारण-पोषण करने वाली
- सुपर्वा — शुभ पर्व रूपा
- सामगायनी — सामवेद गाने वाली
- पाञ्चाली — पांचाली रूपा
- बालिका — बालिका रूपा
- बाला — बाला रूपा
- बालक्रीडा — बाल-क्रीड़ा रूपा
- सनातनी — सनातन-स्वरूपा
- गर्भाधारधरा — गर्भ का आधार धारण करने वाली
- शून्या — शून्य-स्वरूपा
- गर्भाशयनिवासिनी — गर्भाशय में वास करने वाली
- सुरारिघातिनी कृत्या — देव-शत्रुओं का नाश करने वाली कृत्या
- पूतना — पूतना-संहार रूपा
- तिलोत्तमा — तिलोत्तमा (अप्सरा) रूपा
- लज्जा — लज्जा-स्वरूपा
- रसवती — रसमयी
- नन्दा — आनंदमयी
- भवानी — भव (शिव) की शक्ति
- पापनाशिनी — पापों का नाश करने वाली
- पट्टाम्बरधरा — रेशमी वस्त्र धारिणी
- गीतिः — गीत-स्वरूपा
- सुगीतिः — मधुर गीत रूपा
- ज्ञानलोचना — ज्ञान-नेत्र वाली
- सप्तस्वरमयी तन्त्री — सप्त-स्वरमयी वीणा रूपा
- षड्जमध्यमधैवता — षड्ज-मध्यम-धैवत स्वर रूपा
- मूर्च्छनाग्रामसंस्थाना — मूर्च्छना-ग्राम में स्थित
- स्वस्था — स्वस्थ (आत्मस्थ)
- स्वस्थानवासिनी — अपने स्थान में वास करने वाली
- अट्टाटहासिनी — अट्टहास करने वाली
- प्रेता — प्रेत (शव) पर स्थित
- प्रेतासननिवासिनी — प्रेतासन पर विराजमान
- गीतनृत्यप्रिया — गीत-नृत्य की प्रेमी
- अकामा — कामना-रहित
- तुष्टिदा — तुष्टि देने वाली
- पुष्टिदा — पुष्टि देने वाली
- अक्षया — अक्षय-स्वरूपा
- निष्ठा — निष्ठा-स्वरूपा
- सत्यप्रिया — सत्य की प्रेमी
- प्राज्ञा — प्रज्ञावती
- लोकेशी — लोकों की ईश्वरी
- सुरोत्तमा — देवताओं में श्रेष्ठ
- सविषा — विष-सहित रूपा
- ज्वालिनी — ज्वाला रूपा
- ज्वाला — ज्वाला-स्वरूपा
- विषमोहार्तिनाशिनी — विष-मोह-पीड़ा नाश करने वाली
- विषारिः — विष की शत्रु
- नागदमनी — नागों का दमन करने वाली
षष्ठ शतक (नाम 501–600)
- कुरुकुल्ला — कुरुकुल्ला देवी रूपा
- अमृतोद्भवा — अमृत से उत्पन्न
- भूतभीतिहरा रक्षा — भूत-भय हरने वाली रक्षा
- भूतावेशविनाशिनी — भूतावेश का नाश करने वाली
- रक्षोघ्नी — राक्षसों का नाश करने वाली
- राक्षसी — राक्षस-शक्ति रूपा
- रात्रिः — रात्रि-स्वरूपा
- दीर्घनिद्रा — दीर्घ निद्रा रूपा
- दिवागतिः — दिवस की गति रूपा
- चन्द्रिका — चाँदनी रूपा
- चन्द्रकान्तिः — चंद्र-कांति वाली
- सूर्यकान्तिः — सूर्य-कांति वाली
- निशाचरी — रात्रि में विचरने वाली
- डाकिनी — डाकिनी-शक्ति रूपा
- शाकिनी — शाकिनी-शक्ति रूपा
- शिष्या — शिष्या रूपा
- हाकिनी — हाकिनी-शक्ति रूपा
- चक्रवाकिनी — चक्रवाक रूपा
- सितासितप्रिया — श्वेत-कृष्ण की प्रेमी
- स्वङ्गा — सुंदर अंगों वाली
- सकला — समस्त कलाओं वाली
- वनदेवता — वन-देवता रूपा
- गुरुरूपधरा — गुरु-रूप धारिणी
- गुर्वी — गुरुतर रूपा
- मृत्युः — मृत्यु-स्वरूपा
- मारी — मारी (महामारी) रूपा
- विशारदा — निपुण
- महामारी — महामारी रूपा
- विनिद्रा — निद्रा-रहित
- तन्द्रा — तंद्रा-स्वरूपा
- मृत्युविनाशिनी — मृत्यु का नाश करने वाली
- चन्द्रमण्डलसङ्काशा — चंद्र-मंडल सदृश
- चन्द्रमण्डलवासिनी — चंद्र-मंडल में वास करने वाली
- अणिमादिगुणोपेता — अणिमादि सिद्धियों से युक्त
- सुस्पृहा — शुभ अभिलाषा रूपा
- कामरूपिणी — इच्छानुसार रूप धारिणी
- अष्टसिद्धिप्रदा — आठ सिद्धियाँ देने वाली
- प्रौढा — प्रौढ़ रूपा
- दुष्टदानवघातिनी — दुष्ट दानवों का नाश करने वाली
- अनादिनिधना पुष्टिः — आदि-अंत रहित पुष्टि रूपा
- चतुर्बाहुः — चार भुजाओं वाली
- चतुर्मुखी — चार मुख वाली
- चतुःसमुद्रशयना — चार समुद्रों पर शयन करने वाली
- चतुर्वर्गफलप्रदा — चतुर्वर्ग फल देने वाली
- काशपुष्पप्रतीकाशा — काश-पुष्प सदृश
- शरत्कुमुदलोचना — शरद् कमल सदृश नयनों वाली
- भूता — भूत (हुई) रूपा
- भव्या — भव्य-स्वरूपा
- भविष्या — भविष्य रूपा
- शैलजा — पर्वत-पुत्री
- शैलवासिनी — पर्वत में वास करने वाली
- वाममार्गरता — वाम-मार्ग में रत
- वामा — वामा रूपा
- शिववामाङ्गवासिनी — शिव के वाम अंग में वास करने वाली
- वामाचारप्रिया — वामाचार की प्रेमी
- तुष्टा — संतुष्ट
- लोपामुद्रा — लोपामुद्रा रूपा
- प्रबोधिनी — जाग्रत करने वाली
- भूतात्मा — भूतों की आत्मा
- परमात्मा — परमात्मा-स्वरूपा
- भूतभाविविभाविनी — भूत-भविष्य प्रकट करने वाली
- मङ्गला — मंगलमयी
- सुशीला — सुशील
- परमार्थप्रबोधिनी — परमार्थ का बोध कराने वाली
- दक्षिणा — दक्षिणा-स्वरूपा
- दक्षिणामूर्तिः — दक्षिणामूर्ति रूपा
- सुदक्षिणा — उत्तम दक्षिणा रूपा
- हरिप्रिया — हरि की प्रिया
- योगिनी — योगिनी रूपा
- योगयुक्ता — योग से युक्त
- योगाङ्गा — योग के अंग रूपा
- ध्यानशालिनी — ध्यानमयी
- योगपट्टधरा — योग-पट्ट धारिणी
- मुक्ता — मुक्त-स्वरूपा
- मुक्तानांपरमागतिः — मुक्तों की परम गति
- नारसिंही — नृसिंह-शक्ति रूपा
- सुजन्मा — शुभ जन्म वाली
- त्रिवर्गफलदायिनी — त्रिवर्ग फल देने वाली
- धर्मदा — धर्म देने वाली
- धनदा — धन देने वाली
- कामदा — काम (इच्छा) पूर्ण करने वाली
- मोक्षदा — मोक्ष देने वाली
- द्युतिः — कांति-स्वरूपा
- साक्षिणी — साक्षी-स्वरूपा
- क्षणदा — रात्रि क्षण रूपा
- दक्षा — दक्ष (निपुण)
- दक्षजा — दक्ष की पुत्री (सती)
- कोटिरूपिणी — करोड़ों रूप धारिणी
- क्रतुः — यज्ञ-स्वरूपा
- कात्यायनी — कात्यायनी रूपा
- स्वछा — स्वच्छ-स्वरूपा
- स्वच्छन्दा — स्वच्छंद रूपा
- कविप्रिया — कवियों की प्रेमी
- सत्यागमा — सत्य-आगम रूपा
- बहिःस्था — बाहर स्थित
- काव्यशक्तिः — काव्य-शक्ति रूपा
- कवित्वदा — कवित्व देने वाली
- मेनापुत्री — मेना की पुत्री
- सतीमाता — सती की माता रूपा
- मैनाकभगिनी — मैनाक की भगिनी
सप्तम शतक (नाम 601–700)
- तडित् — बिजली-स्वरूपा
- सौदामिनी — सौदामिनी (विद्युत) रूपा
- स्वधामा — अपने धाम वाली
- सुधामा — शुभ धाम वाली
- धामशालिनी — तेज से युक्त
- सौभाग्यदायिनी — सौभाग्य देने वाली
- द्यौः — द्युलोक रूपा
- सुभगा — सौभाग्यवती
- द्युतिवर्धिनी — कांति बढ़ाने वाली
- श्रीः — श्री (लक्ष्मी) रूपा
- कृत्तिवसना — मृग-चर्म वस्त्र वाली
- कङ्काली — कंकाल (अस्थि) धारिणी
- कलिनाशिनी — कलि-दोष का नाश करने वाली
- रक्तबीजवधोद्दृप्ता — रक्तबीज वध में उद्यत
- सुतन्तुः — उत्तम तंतु (विस्तार) रूपा
- बीजसन्ततिः — बीज-संतति रूपा
- जगज्जीवा — जगत् का जीवन रूपा
- जगद्बीजा — जगत् का बीज रूपा
- जगत्त्रयहितैषिणी — तीनों लोकों का हित चाहने वाली
- चामीकररुचिः — स्वर्ण सदृश कांति वाली
- चान्द्रीसाक्षयाषोडशीकला — चंद्र की अक्षय षोडशी कला रूपा
- यत्तत्पदानुबन्धा — यत्-तत् पद से संबद्ध
- यक्षिणी — यक्षिणी-शक्ति रूपा
- धनदार्चिता — कुबेर द्वारा पूजित
- चित्रिणी — चित्रिणी रूपा
- चित्रमाया — विचित्र माया वाली
- विचित्रा — विचित्र-स्वरूपा
- भुवनेश्वरी — भुवनों की ईश्वरी
- चामुण्डा — चंड-मुंड का वध करने वाली
- मुण्डहस्ता — हाथ में मुंड वाली
- चण्डमुण्डवधोद्धुरा — चंड-मुंड वध में उद्यत
- अष्टमी — अष्टमी तिथि रूपा
- एकादशी — एकादशी तिथि रूपा
- पूर्णा — पूर्णिमा रूपा
- नवमी — नवमी तिथि रूपा
- चतुर्दशी — चतुर्दशी तिथि रूपा
- अमा — अमावस्या रूपा
- कलशहस्ता — हाथ में कलश वाली
- पूर्णकुम्भधरा — पूर्ण कुंभ धारिणी
- धरा — धारण करने वाली
- अभीरुः — निर्भय
- भैरवी — भैरवी रूपा
- भीरा — भीरु (कोमल) रूपा
- भीमा — भीम (भयंकर) रूपा
- त्रिपुरभैरवी — त्रिपुर-भैरवी रूपा
- महारुण्डा — महारुण्डा रूपा
- रौद्री — रुद्र-शक्ति रूपा
- महाभैरवपूजिता — महाभैरव द्वारा पूजित
- निर्मुण्डा — मुंड-रहित रूपा
- हस्तिनी — हस्तिनी रूपा
- चण्डा — प्रचंड रूपा
- करालदशनानना — विकराल दाँतों वाले मुख वाली
- कराला — विकराल रूपा
- विकराला — अति विकराल
- घोरघुर्घुरनादिनी — घोर घुर्घुर नाद करने वाली
- रक्तदन्ता — रक्त दाँतों वाली
- ऊर्ध्वकेशी — ऊपर उठे केश वाली
- बन्धूककुसुमारुणा — बंधूक-पुष्प सदृश अरुण
- कादम्बरी — कादंबरी (मधु) रूपा
- पटासा — पटा-वस्त्र वाली
- काश्मीरी — काश्मीर देवी रूपा
- कुंकुमप्रिया — कुंकुम की प्रेमी
- क्षान्तिः — क्षमा-स्वरूपा
- बहुसुवर्णा — बहुत स्वर्ण वाली
- रतिः — रति-स्वरूपा
- बहुसुवर्णदा — बहुत स्वर्ण देने वाली
- मातङ्गिनी — मातंगी रूपा
- वरारोहा — सुंदर रूपा
- मत्तमातङ्गगामिनी — मत्त गज सदृश गति वाली
- हिंसा — हिंसा-शक्ति रूपा
- हंसगतिः — हंस सदृश गति वाली
- हंसी — हंसी रूपा
- हंसोज्ज्वलशिरोरुहा — हंस सदृश उज्ज्वल केश वाली
- पूर्णचन्द्रमुखी — पूर्ण चंद्र सदृश मुख वाली
- श्यामा — श्याम-वर्णा
- स्मितास्या — मुस्कान युक्त मुख वाली
- श्यामकुण्डला — श्याम कुंडल वाली
- मषी — स्याही-स्वरूपा
- लेखिनी — लेखनी रूपा
- लेख्या — लेख्य-स्वरूपा
- सुलेखा — सुंदर लेख वाली
- लेखकप्रिया — लेखकों की प्रेमी
- शङ्खिनी — शंखिनी रूपा
- शङ्खहस्ता — हाथ में शंख वाली
- जलस्था — जल में स्थित
- जलदेवता — जल-देवता रूपा
- कुरुक्षेत्रावनिः — कुरुक्षेत्र भूमि रूपा
- काशी — काशी क्षेत्र रूपा
- मथुरा — मथुरा क्षेत्र रूपा
- काञ्ची — कांची क्षेत्र रूपा
- अवन्तिका — अवंतिका (उज्जैन) रूपा
- अयोध्या — अयोध्या क्षेत्र रूपा
- द्वारका — द्वारका क्षेत्र रूपा
- माया — मायापुरी (हरिद्वार) रूपा
- तीर्था — तीर्थ-स्वरूपा
- तीर्थकरप्रिया — तीर्थकर की प्रेमी
- त्रिपुष्करा — त्रिपुष्कर तीर्थ रूपा
- अप्रमेया — अप्रमेय (अमाप्य)
- कोशस्था — कोश में स्थित
- कोशवासिनी — कोश में वास करने वाली
अष्टम शतक (नाम 701–800)
- कौशिकी — कौशिकी रूपा
- कुशावर्ता — कुशावर्त तीर्थ रूपा
- कौशाम्बी — कौशांबी रूपा
- कोशवर्धिनी — कोश (भंडार) बढ़ाने वाली
- कोशदा — कोश देने वाली
- पद्मकोशाक्षी — कमल-कोश सदृश नयनों वाली
- कुसुमा — पुष्प-स्वरूपा
- कुसुमप्रिया — पुष्प की प्रेमी
- तोतुला — तुला-स्वरूपा
- तुलाकोटिः — तुला-कोटि रूपा
- कूटस्था — कूटस्थ (अचल) रूपा
- कोटराश्रया — कोटर में आश्रित
- स्वयम्भूः — स्वयंभू
- सुरूपा — सुंदर रूप वाली
- स्वरूपा — स्व-रूपा
- रूपवर्धिनी — रूप बढ़ाने वाली
- तेजस्विनी — तेजस्विनी
- सुभिक्षा — सुभिक्ष (समृद्धि) रूपा
- बलदा — बल देने वाली
- बलदायिनी — बल प्रदान करने वाली
- महाकोशी — महान कोश वाली
- महावर्ता — महावर्त रूपा
- बुद्धिः सदसदात्मिका — सत्-असत् रूपी बुद्धि
- महाग्रहहरा — महाग्रह-बाधा हरने वाली
- सौम्या — सौम्य-स्वरूपा
- विशोका — शोक-रहित
- शोकनाशिनी — शोक का नाश करने वाली
- सात्त्विकी — सत्त्व-गुण रूपा
- सत्त्वसंस्था — सत्त्व में स्थित
- राजसी — रजोगुण रूपा
- रजोवृता — रजोगुण से आवृत
- तामसी — तमोगुण रूपा
- तमोयुक्ता — तमोगुण से युक्त
- गुणत्रयविभाविनी — तीनों गुणों को प्रकट करने वाली
- अव्यक्ता — अव्यक्त-स्वरूपा
- व्यक्तरूपा — व्यक्त रूपा
- वेदविद्या — वेद-विद्या रूपा
- शाम्भवी — शंभु (शिव) की शक्ति
- शङ्कराकल्पिनी कल्पा — शंकर की कल्प-शक्ति रूपा
- मनः सङ्कल्पसन्ततिः — मन के संकल्पों की संतति रूपा
- सर्वलोकमयीशक्तिः — समस्त लोकमयी शक्ति
- सर्वश्रवणगोचरा — सबके श्रवण-गोचर
- सर्वज्ञानवतीवाञ्छा — सर्वज्ञानमयी इच्छा रूपा
- सर्वतत्त्वानुबोधिनी — समस्त तत्त्वों का बोध कराने वाली
- जागृती — जाग्रत अवस्था रूपा
- सुषुप्तिः — सुषुप्ति अवस्था रूपा
- स्वप्नावस्था — स्वप्न अवस्था रूपा
- तुरीयका — तुरीय अवस्था रूपा
- त्वरा — त्वरा (शीघ्रता) रूपा
- मन्दगतिः — मंद गति वाली
- मन्दा — मंद-स्वरूपा
- मन्दिरामोदधारिणी — मदिरा-सुगंध धारिणी
- पानभूमिः — पान-भूमि रूपा
- पानपात्रा — पान-पात्र रूपा
- पानदानकरोद्यता — पान-दान में उद्यत
- अघूर्णारुणनेत्रा — घूर्णायमान अरुण नेत्रों वाली
- किञ्चिदव्यक्तभाषिणी — कुछ अव्यक्त बोलने वाली
- आशापूरा — आशा पूर्ण करने वाली
- दीक्षा — दीक्षा-स्वरूपा
- दक्षा — दक्ष (निपुण)
- दीक्षितपूजिता — दीक्षितों द्वारा पूजित
- नागवल्ली — नागवल्ली (पान) रूपा
- नागकन्या — नाग-कन्या रूपा
- भोगिनी — भोग-शक्ति रूपा
- भोगवल्लभा — भोग की प्रिया
- सर्वशास्त्रवतीविद्या — समस्त शास्त्रमयी विद्या
- सुस्मृतिः — उत्तम स्मृति रूपा
- धर्मवादिनी — धर्म का प्रतिपादन करने वाली
- श्रुतिः — श्रुति (वेद) रूपा
- श्रुतिधरा — श्रुति को धारण करने वाली
- ज्येष्ठा — ज्येष्ठा रूपा
- श्रेष्ठा — श्रेष्ठ रूपा
- पातालवासिनी — पाताल में वास करने वाली
- मीमांसा — मीमांसा-शास्त्र रूपा
- तर्कविद्या — तर्क-विद्या रूपा
- सुभक्तिः — उत्तम भक्ति रूपा
- भक्तवत्सला — भक्तों पर वत्सल
- सुनाभिः — सुंदर नाभि वाली
- यातना — यातना (दंड) रूपा
- जातीः — जाति-स्वरूपा
- गम्भीरा — गंभीर-स्वरूपा
- भाववर्जिता — भाव-रहित
- नागपाशधरा — नाग-पाश धारिणी
- अगाधा — अथाह
- नागकुण्डला — नाग-कुंडल वाली
- सुचक्रा — उत्तम चक्र वाली
- चक्रमध्यस्था — चक्र के मध्य स्थित
- चक्रकोणनिवासिनी — चक्र-कोण में वास करने वाली
- सर्वमन्त्रमयी — समस्त मंत्रमयी
- सर्वमन्त्राक्षरावलिः — समस्त मंत्र-अक्षर माला रूपा
- मधुस्रवा — मधु बहाने वाली
- स्रवन्ती — बहती (नदी) रूपा
- भ्रामरी — भ्रामरी देवी रूपा
- भ्रमरालका — भ्रमर सदृश अलकों वाली
- मातृमण्डलमध्यस्था — मातृ-मंडल के मध्य स्थित
- मातृमण्डलवासिनी — मातृ-मंडल में वास करने वाली
- कुमारजननी — कुमार (कार्तिकेय) की जननी
- क्रूरा — उग्र रूपा
- सुमुखी — सुंदर मुख वाली
- ज्वरनाशिनी — ज्वर का नाश करने वाली
नवम शतक (नाम 801–900)
- अतीता — अतीत (परे) रूपा
- विद्यमाना — विद्यमान (वर्तमान) रूपा
- भाविनी — भविष्य रूपा
- प्रीतिमञ्जरी — प्रीति की मंजरी
- सर्वसौख्यवती — समस्त सुखों से युक्त
- आहारपरिणामिनी — आहार का परिणाम करने वाली
- पञ्चभूतानां निधानं — पंच-भूतों का आधार
- भवसागरतारिणी — भव-सागर से तारने वाली
- अक्रूरा — अक्रूर (कोमल)
- ग्रहवती — ग्रहों से युक्त
- विग्रहा — विग्रह (रूप) वाली
- ग्रहवर्जिता — ग्रह-रहित
- रोहिणी — रोहिणी रूपा
- भूमिगर्भा — पृथ्वी के गर्भ रूपा
- कालभूः — काल की उत्पत्ति-भूमि
- कालवर्तिनी — काल में वर्तमान
- कलङ्करहिता — कलंक-रहित
- चतुष्षष्ट्यभिधावती — चौंसठ कलाओं वाली
- जीर्णा — जीर्ण (पुरातन) रूपा
- जीर्णवस्त्रा — जीर्ण वस्त्र वाली
- नूतना — नवीन रूपा
- नववल्लभा — नित नवीन प्रिय
- अरजा — रजोगुण-रहित
- रतिः — रति-स्वरूपा
- प्रीतिः — प्रीति-स्वरूपा
- रतिरागविवर्धिनी — रति-राग बढ़ाने वाली
- पञ्चवातगतिर्भिन्ना — पाँच वायुओं की गति रूपा
- पञ्चश्लेष्माशयाधरा — पंच-श्लेष्म आशय धारिणी
- पञ्चपित्तवतीशक्तिः — पंच-पित्त शक्ति रूपा
- पञ्चस्थानविबोधिनी — पाँच स्थानों को जगाने वाली
- उदक्या — रजस्वला रूपा
- वृषस्यन्ती — कामना करने वाली
- बहिः प्रस्रविणी — बाहर प्रवाहित होने वाली
- रजःशुक्रधरा — रज-शुक्र धारिणी
- जरायुः — जरायु (गर्भ-आवरण) रूपा
- गर्भधारिणी — गर्भ धारण करने वाली
- त्रिकालज्ञा — तीनों कालों को जानने वाली
- त्रिलिङ्गा — तीन लिंग (रूप) वाली
- त्रिमूर्तिः — त्रिमूर्ति-स्वरूपा
- त्रिपुरवासिनी — त्रिपुर में वास करने वाली
- अरागा — राग-रहित
- शिवतत्त्वा — शिव-तत्त्व रूपा
- कामतत्त्वानुरागिणी — काम-तत्त्व में अनुरक्त
- प्राची — पूर्व दिशा रूपा
- अवाची — दक्षिण दिशा रूपा
- प्रतीची — पश्चिम दिशा रूपा
- उदीची — उत्तर दिशा रूपा
- विदिग्दिशा — विदिशा-स्वरूपा
- अहङ्कृतिः — अहंकार-तत्त्व रूपा
- अहङ्कारा — अहंकार-स्वरूपा
- बलिमाया — बलि (आहुति) की माया
- बलिप्रिया — बलि की प्रेमी
- स्रुक् — स्रुक् (यज्ञ-पात्र) रूपा
- स्रुवा — स्रुवा (यज्ञ-पात्र) रूपा
- सामिधेनी — समिधा-मंत्र रूपा
- सश्रद्धा — श्रद्धा-सहित
- श्राद्धदेवता — श्राद्ध-देवता रूपा
- माता — माता-स्वरूपा
- मातामही — नानी रूपा
- तृप्तिः — तृप्ति-स्वरूपा
- पितृमाता — पितरों की माता
- पितामही — दादी रूपा
- स्नुषा — पुत्रवधू रूपा
- दौहित्रिणी — दौहित्री (नातिन) रूपा
- पुत्री — पुत्री रूपा
- पौत्री — पौत्री रूपा
- नप्त्री — नप्त्री रूपा
- शिशुप्रिया — शिशुओं की प्रेमी
- स्तनदा — स्तन-पान कराने वाली
- स्तनधारा — स्तन-धारा देने वाली
- विश्वयोनिः — विश्व की योनि (उत्पत्ति-स्थान)
- स्तनन्धयी — स्तन-पान करने वाली
- शिशूत्सङ्गधरा — शिशु को गोद में धारण करने वाली
- दोला — झूला-स्वरूपा
- दोलाक्रीडाभिनन्दिनी — झूला-क्रीड़ा में आनंदित
- उर्वशी — उर्वशी रूपा
- कदली — कदली (केला) रूपा
- केका — मयूर-नाद रूपा
- विशिखा — बाण-स्वरूपा
- शिखिवर्तिनी — मयूर पर स्थित
- खट्वाङ्गधारिणी — खट्वांग (अस्त्र) धारिणी
- खट्वा — खट्वा (शय्या) रूपा
- बाणपुङ्खानुवर्तिनी — बाण-पुंख के अनुसार चलने वाली
- लक्ष्यप्राप्तिः — लक्ष्य-प्राप्ति रूपा
- कला — कला-स्वरूपा
- अलक्ष्या — अलक्ष्य (अदृश्य)
- लक्ष्या — लक्ष्य-स्वरूपा
- शुभलक्षणा — शुभ लक्षणों वाली
- वर्तिनी — मार्ग रूपा
- सुपथाचारा — सन्मार्ग पर चलने वाली
- परिखा — परिखा (खाई) रूपा
- खनिः — खान-स्वरूपा
- वृतिः — आवरण रूपा
- प्राकारवलया — प्राकार (परकोटा) रूपा
- वेला — वेला (तट) रूपा
- मर्यादा — मर्यादा-स्वरूपा
- पोषणी — पोषण करने वाली
- शोषणी — शोषण करने वाली
- दीर्घकेशी — लंबे केश वाली
- सुलोमशा — सुंदर रोम वाली
दशम शतक (नाम 901–1000)
- ललिता — ललिता रूपा
- मांसला — पुष्ट देह वाली
- तन्वी — कृशांगी
- वेदवेदाङ्गधारिणी — वेद-वेदांग धारिणी
- नरासृक्पानमत्ता — नर-रक्त पान से मत्त
- नरमुण्डास्थिभूषणा — नर-मुंड व अस्थि से विभूषित
- अक्षक्रीडारतिः — पाशा-क्रीड़ा में रत
- शारी — शारी (पाशा) रूपा
- शारिकाशुकभाषिणी — मैना-तोता सदृश बोलने वाली
- शाम्बरी — शांबरी विद्या रूपा
- गारुडीविद्या — गारुड़ी (विष-हर) विद्या रूपा
- वारुणी — वरुण-शक्ति रूपा
- वरुणार्चिता — वरुण द्वारा पूजित
- वाराही — वाराही रूपा
- मुण्डहस्ता — हाथ में मुंड वाली
- दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरा — दाढ़ से पृथ्वी उद्धार करने वाली
- मीनमूर्तिधरा — मत्स्य-रूप धारिणी
- मूर्ता — मूर्त (साकार) रूपा
- वदन्या — दानशीला
- प्रतिमाश्रया — प्रतिमा में आश्रित
- अमूर्ता — अमूर्त (निराकार)
- निधिरूपा — निधि-स्वरूपा
- शालग्रामशिलाशुचिः — शालग्राम-शिला सदृश पवित्र
- स्मृतिः — स्मृति-स्वरूपा
- संस्काररूपा — संस्कार-रूपा
- सुसंस्कारा — उत्तम संस्कार वाली
- संस्कृतिः — संस्कृति-स्वरूपा
- प्राकृता — प्राकृत-स्वरूपा
- देशभाषा — देश-भाषा रूपा
- गाथा — गाथा-स्वरूपा
- गीतिः — गीत-स्वरूपा
- प्रहेलिका — पहेली-स्वरूपा
- इडा — इडा-नाड़ी रूपा
- पिङ्गला — पिंगला-नाड़ी रूपा
- पिङ्गा — पिंग-वर्णा
- सुषुम्णा — सुषुम्ना-नाड़ी रूपा
- सूर्यवाहिनी — सूर्य-नाड़ी रूपा
- शशिस्रवा — चंद्र-अमृत बहाने वाली
- तालुस्था — तालु में स्थित
- काकिनी — काकिनी-शक्ति रूपा
- अमृतजीविनी — अमृत से जीवन देने वाली
- अणुरूपा — अणु सदृश सूक्ष्म रूपा
- बृहद्रूपा — विशाल रूपा
- लघुरूपा — लघु (सूक्ष्म) रूपा
- गुरुस्थिरा — गुरु व स्थिर रूपा
- स्थावरा — स्थावर (अचल) रूपा
- जङ्गमा — जंगम (चल) रूपा
- देवी — देवी-स्वरूपा
- कृतकर्मफलप्रदा — किए कर्मों का फल देने वाली
- विषयाक्रान्तदेहा — विषयों से आक्रांत देह रूपा
- निर्विशेषा — भेद-रहित
- जितेन्द्रिया — इंद्रियों को जीतने वाली
- विश्वरूपा — विश्व-रूपा
- चिदानन्दा — चित्-आनंद स्वरूपा
- परब्रह्मप्रबोधिनी — परब्रह्म का बोध कराने वाली
- निर्विकारा — विकार-रहित
- निर्वैरा — वैर-रहित
- विरतिः — विरक्ति-स्वरूपा
- सत्यवर्धिनी — सत्य बढ़ाने वाली
- पुरुषाज्ञा — पुरुष (परमात्मा) की आज्ञा रूपा
- भिन्ना — भिन्न (पृथक्) रूपा
- क्षान्तिः — क्षमा-स्वरूपा
- विविक्तसेविनी — एकांत-सेवी
- प्रज्ञाजनयित्री — प्रज्ञा को जन्म देने वाली
- बहुश्रुतिः — बहुश्रुत (विदुषी)
- निरीहा — इच्छा-रहित
- समस्तैका — समस्त में एक
- सर्वलोकैकसेविता — समस्त लोकों द्वारा सेवित
- सेवा — सेवा-स्वरूपा
- सेवाप्रिया — सेवा की प्रेमी
- सेव्या — सेवनीय
- सेवाफलविवर्धिनी — सेवा का फल बढ़ाने वाली
- कलौ — कलियुग में रक्षक रूपा
- दुष्टम्लेच्छविनाशिनी — दुष्ट म्लेच्छों का नाश करने वाली
- प्रत्यञ्चा — धनुष की प्रत्यंचा रूपा
- धनुर्यष्टिः — धनुष-यष्टि रूपा
- खड्गधारा — खड्ग की धार रूपा
- दुरानतिः — दुर्नमनीय (दुर्जेय)
- अश्वप्लुतिः — अश्व की कुलाँच रूपा
- वल्गा — लगाम-स्वरूपा
- सृणिः — अंकुश-स्वरूपा
- सन्मत्तवारणा — मत्त गज को वश करने वाली
- वीरभूः — वीरों की जन्मभूमि
- वीरमाता — वीरों की माता
- वीरसूः — वीरों को जन्म देने वाली
- वीरनन्दिनी — वीरों को आनंद देने वाली
- जयश्रीः — विजय-लक्ष्मी रूपा
- जयदीक्षा — विजय की दीक्षा रूपा
- जयदा — विजय देने वाली
- जयवर्धिनी — विजय बढ़ाने वाली
- सौभाग्यसुभगाकारा — सौभाग्य व सुभग रूपा
- सर्वसौभाग्यवर्धिनी — समस्त सौभाग्य बढ़ाने वाली
- क्षेमङ्करी — क्षेम (कल्याण) करने वाली
- सिद्धिरूपा — सिद्धि-स्वरूपा
- सत्कीर्तिः — सत्कीर्ति-स्वरूपा
- पथिदेवता — मार्ग की देवता रूपा
- सर्वतीर्थमयीमूर्तिः — समस्त तीर्थमयी मूर्ति
- सर्वदेवमयीप्रभा — समस्त देवमयी प्रभा
- सर्वसिद्धिप्रदाशक्तिः — समस्त सिद्धि देने वाली शक्ति
- सर्वमङ्गलमङ्गला — समस्त मंगलों की मंगल (सर्वमंगला)
अर्थ (हिन्दी)
- जो देवी समस्त प्राणियों में शक्ति रूप में स्थित हैं, उन्हें बारंबार नमस्कार, नमस्कार, नमस्कार।
लाभ
- शत्रु, भय व संकटों से रक्षा होती है।
- शक्ति, साहस व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
- रोग, दोष व नकारात्मकता का नाश होता है।
- मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
कब करें पाठ
नवरात्रि में · शुक्रवार व अष्टमी को · प्रातः व संध्या पूजा में
स्रोत
रचयिता: तंत्र परंपरा. तंत्रराज तंत्र — श्री दुर्गा सहस्रनामस्तोत्र
