श्री गजानन महाराज चालीसा
पाठ
गणपति-गुरु-पद वंदना, सुमिर हृदय धरि ध्यान। गजानन महाराज की, करूँ चालीसा गुणगान॥
जय जय गजानन गुरुवर स्वामी। भक्तन के तुम अन्तर्यामी॥
शेगांव-धाम विराजे प्यारे। भक्त-गण नित तुम्हें पुकारे॥
अवधूत-संत दिगम्बर रूपा। ब्रह्म-ज्ञानी तुम अनूपा॥
"गण गण गणात बोते" जपते। नाम-मंत्र वह सब जग गाते॥
अनेक चमत्कार दिखलाये। भक्त-कष्ट सब दूर भगाये॥
जो जन तुमको नित ही ध्यावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥
दीन-दुखी के तुम रखवारे। भक्त-गण नित तुम्हें पुकारे॥
शेगांव-धाम सुहावन तेरा। भक्त-गण नित दरस को घेरा॥
जो नर श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। रोग-शोक भय निकट न आवै॥
प्रकट-दिन भक्त मनावें। पुण्यतिथि पर शीश नवावें॥
दीन-दुखी की सुनत पुकारा। पल में करते बेड़ा पारा॥
जो जन तुमको शीश नवावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥
पुष्प-प्रसाद भक्त चढ़ावैं। श्रद्धा से महाराज को रिझावैं॥
रोग-दोष सब दूर भगाते। सुख-समृद्धि घर में लाते॥
जो नर निशदिन ध्यान लगावै। गजानन-कृपा वह पावै॥
मंगल-कारी विघ्न-विनाशन। भय-हारी तुम सुख-साधन॥
समाधि-लीन रहे तुम ध्याना। ब्रह्म-रूप में नित्य समाना॥
जो श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। ता के सब बिगड़े बन जावै॥
जो यह गजानन चालीसा गावै। भय-संकट सब दूर नसावै॥
नित प्रति पाठ करे जो कोई। ता पर कृपा गजानन की होई॥
मन-इच्छित फल सब जन पावैं। सुख-समृद्धि घर में लावैं॥
गजानन-कृपा जिन पर होई। ता को कष्ट सतावे न कोई॥
भक्त-हेतु प्रकटे संसारा। जन-जन का किया उद्धारा॥
जो सत भाव करे यह सेवा। रीझत तुरत गजानन देवा॥
संकट-मोचन नाम तुम्हारा। भक्त-हृदय में नित्य निवारा॥
महिमा तुम्हरी अति अपारा। जन-जन गाता जयकारा॥
भक्ति-ज्ञान का मार्ग बताया। सरल-सहज वह पाठ पढ़ाया॥
घर-घर ज्योति तुम्हारी जागै। नर-नारी सब तुमको पागै॥
दुःख-संकट जो जन पीड़े। तुम्हें सुमिर कर सब दुख छीड़े॥
गजानन-स्तुति जो जन गावै। रोग-शोक सब दूर भगावै॥
शेगांव-धाम की महिमा भारी। भव-तारण तुम जग-हितकारी॥
ज्ञान-भक्ति का मार्ग दिखाते। शरणागत को पार लगाते॥
दीन-रक्षक तुम कल्याणी। भव-तारण तुम सुख-दानी॥
जो जन गजानन गुण गावै। पाप-ताप सब दूर भगावै॥
गजानन-वंदन जो जन गावै। इहलोक-परलोक सुख पावै॥
सुख-शान्ति-समृद्धि घर में आवै। भक्ति-ज्ञान-संतोष बढ़ावै॥
भय-संकट सब दूर हटावै। गजानन जो जन नित ध्यावै॥
भक्ति-मार्ग वह सहज वह पावै। गजानन-नाम जो जन गावै॥
ज्ञान-सुख-शान्ति घर में लावै। भक्ति-श्रद्धा सब बढ़ावै॥
जय जय जय गजानन स्वामी। रक्षा करो प्रभु अन्तर्यामी॥
गजानन चालीसा सरल, पढ़े प्रेम मन लाय। भय-संकट सब दूर हो, महाराज-कृपा पाय॥
अर्थ (हिन्दी)
- गणपति व गुरु के चरणों की वंदना कर, हृदय में ध्यान धरकर मैं गजानन महाराज की चालीसा का गुणगान करता हूँ।
- हे गुरुवर गजानन स्वामी, आपकी जय-जय हो; आप भक्तों के अन्तर्यामी हैं।
- आप शेगांव-धाम में विराजते हैं; भक्तगण नित्य आपको पुकारते हैं।
- आप अवधूत-संत व दिगम्बर रूप वाले हैं; आप अनुपम ब्रह्मज्ञानी हैं।
- आप "गण गण गणात बोते" जपते थे; वह नाम-मंत्र आज समस्त जगत गाता है।
- आपने अनेक चमत्कार दिखाए और भक्तों के सब कष्ट दूर भगाए।
- जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
- आप दीन-दुखियों के रक्षक हैं; भक्तगण नित्य आपको पुकारते हैं।
- शेगांव-धाम आपका सुहावना स्थान है; भक्तगण नित्य दर्शन को आते हैं।
- जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।
- भक्त आपका प्रकट-दिन मनाते हैं और पुण्यतिथि पर शीश नवाते हैं।
- आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।
- जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
- भक्त पुष्प व प्रसाद चढ़ाते हैं और श्रद्धा से महाराज को रिझाते हैं।
- आप समस्त रोग-दोष दूर भगाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
- जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह गजानन-कृपा प्राप्त करता है।
- आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; भय हरकर सुख देने वाले हैं।
- आप समाधि व ध्यान में लीन रहते थे और नित्य ब्रह्म-रूप में समाए रहते थे।
- जो श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
- जो यह गजानन चालीसा गाता है, उसके भय व संकट सब दूर नष्ट हो जाते हैं।
- जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर गजानन महाराज की कृपा होती है।
- सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
- जिन पर गजानन महाराज की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।
- आप भक्तों के हेतु संसार में प्रकट हुए और जन-जन का उद्धार किया।
- जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर गजानन देव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।
- आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।
- आपकी महिमा अति अपार है; जन-जन आपका जयकारा गाता है।
- आपने भक्ति व ज्ञान का मार्ग बताया और सरल-सहज भक्ति का पाठ पढ़ाया।
- घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
- जो जन दुःख-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।
- जो जन गजानन-स्तुति गाता है, वह समस्त रोग-शोक दूर भगा देता है।
- शेगांव-धाम की महिमा अति महान है; आप भव-तारण व जगत-हितकारी हैं।
- आप ज्ञान व भक्ति का मार्ग दिखाते हैं और शरणागत को पार लगाते हैं।
- आप दीनों के रक्षक व कल्याणकारी हैं; भव-तारण व सुख देने वाले हैं।
- जो जन गजानन महाराज के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
- जो जन गजानन-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
- घर में सुख, शांति व समृद्धि आती है और भक्ति, ज्ञान व संतोष बढ़ता है।
- जो जन गजानन महाराज का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।
- जो जन गजानन-नाम गाता है, वह सहज ही भक्ति-मार्ग पा लेता है।
- घर में ज्ञान, सुख व शांति आती है और भक्ति व श्रद्धा बढ़ती है।
- हे गजानन स्वामी, आपकी जय हो; हे अन्तर्यामी प्रभु, शरण में आए हम सबकी रक्षा कीजिए।
- जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल गजानन चालीसा पढ़ता है, उसके भय-संकट दूर होते हैं और महाराज की कृपा प्राप्त होती है।
लाभ
- भय, रोग व संकट से रक्षा होती है।
- मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं व बाधाएँ दूर होती हैं।
- भक्ति, ज्ञान व आध्यात्मिक शांति बढ़ती है।
- घर में सुख-समृद्धि व गुरु-कृपा बनी रहती है।
कब करें पाठ
गुरुवार को · प्रकट-दिन व पुण्यतिथि पर · नित्य प्रातः-संध्या पूजा में
स्रोत
रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक गजानन महाराज चालीसा · श्री गजानन विजय ग्रंथ परंपरा
