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॥ श्री ॥

श्री गजानन महाराज चालीसा

चालीसा

पाठ

गणपति-गुरु-पद वंदना, सुमिर हृदय धरि ध्यान। गजानन महाराज की, करूँ चालीसा गुणगान॥

1

जय जय गजानन गुरुवर स्वामी। भक्तन के तुम अन्तर्यामी॥

2

शेगांव-धाम विराजे प्यारे। भक्त-गण नित तुम्हें पुकारे॥

3

अवधूत-संत दिगम्बर रूपा। ब्रह्म-ज्ञानी तुम अनूपा॥

4

"गण गण गणात बोते" जपते। नाम-मंत्र वह सब जग गाते॥

5

अनेक चमत्कार दिखलाये। भक्त-कष्ट सब दूर भगाये॥

6

जो जन तुमको नित ही ध्यावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥

7

दीन-दुखी के तुम रखवारे। भक्त-गण नित तुम्हें पुकारे॥

8

शेगांव-धाम सुहावन तेरा। भक्त-गण नित दरस को घेरा॥

9

जो नर श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। रोग-शोक भय निकट न आवै॥

10

प्रकट-दिन भक्त मनावें। पुण्यतिथि पर शीश नवावें॥

11

दीन-दुखी की सुनत पुकारा। पल में करते बेड़ा पारा॥

12

जो जन तुमको शीश नवावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥

13

पुष्प-प्रसाद भक्त चढ़ावैं। श्रद्धा से महाराज को रिझावैं॥

14

रोग-दोष सब दूर भगाते। सुख-समृद्धि घर में लाते॥

15

जो नर निशदिन ध्यान लगावै। गजानन-कृपा वह पावै॥

16

मंगल-कारी विघ्न-विनाशन। भय-हारी तुम सुख-साधन॥

17

समाधि-लीन रहे तुम ध्याना। ब्रह्म-रूप में नित्य समाना॥

18

जो श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। ता के सब बिगड़े बन जावै॥

19

जो यह गजानन चालीसा गावै। भय-संकट सब दूर नसावै॥

20

नित प्रति पाठ करे जो कोई। ता पर कृपा गजानन की होई॥

21

मन-इच्छित फल सब जन पावैं। सुख-समृद्धि घर में लावैं॥

22

गजानन-कृपा जिन पर होई। ता को कष्ट सतावे न कोई॥

23

भक्त-हेतु प्रकटे संसारा। जन-जन का किया उद्धारा॥

24

जो सत भाव करे यह सेवा। रीझत तुरत गजानन देवा॥

25

संकट-मोचन नाम तुम्हारा। भक्त-हृदय में नित्य निवारा॥

26

महिमा तुम्हरी अति अपारा। जन-जन गाता जयकारा॥

27

भक्ति-ज्ञान का मार्ग बताया। सरल-सहज वह पाठ पढ़ाया॥

28

घर-घर ज्योति तुम्हारी जागै। नर-नारी सब तुमको पागै॥

29

दुःख-संकट जो जन पीड़े। तुम्हें सुमिर कर सब दुख छीड़े॥

30

गजानन-स्तुति जो जन गावै। रोग-शोक सब दूर भगावै॥

31

शेगांव-धाम की महिमा भारी। भव-तारण तुम जग-हितकारी॥

32

ज्ञान-भक्ति का मार्ग दिखाते। शरणागत को पार लगाते॥

33

दीन-रक्षक तुम कल्याणी। भव-तारण तुम सुख-दानी॥

34

जो जन गजानन गुण गावै। पाप-ताप सब दूर भगावै॥

35

गजानन-वंदन जो जन गावै। इहलोक-परलोक सुख पावै॥

36

सुख-शान्ति-समृद्धि घर में आवै। भक्ति-ज्ञान-संतोष बढ़ावै॥

37

भय-संकट सब दूर हटावै। गजानन जो जन नित ध्यावै॥

38

भक्ति-मार्ग वह सहज वह पावै। गजानन-नाम जो जन गावै॥

39

ज्ञान-सुख-शान्ति घर में लावै। भक्ति-श्रद्धा सब बढ़ावै॥

40

जय जय जय गजानन स्वामी। रक्षा करो प्रभु अन्तर्यामी॥

गजानन चालीसा सरल, पढ़े प्रेम मन लाय। भय-संकट सब दूर हो, महाराज-कृपा पाय॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. गणपति व गुरु के चरणों की वंदना कर, हृदय में ध्यान धरकर मैं गजानन महाराज की चालीसा का गुणगान करता हूँ।
  2. हे गुरुवर गजानन स्वामी, आपकी जय-जय हो; आप भक्तों के अन्तर्यामी हैं।
  3. आप शेगांव-धाम में विराजते हैं; भक्तगण नित्य आपको पुकारते हैं।
  4. आप अवधूत-संत व दिगम्बर रूप वाले हैं; आप अनुपम ब्रह्मज्ञानी हैं।
  5. आप "गण गण गणात बोते" जपते थे; वह नाम-मंत्र आज समस्त जगत गाता है।
  6. आपने अनेक चमत्कार दिखाए और भक्तों के सब कष्ट दूर भगाए।
  7. जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
  8. आप दीन-दुखियों के रक्षक हैं; भक्तगण नित्य आपको पुकारते हैं।
  9. शेगांव-धाम आपका सुहावना स्थान है; भक्तगण नित्य दर्शन को आते हैं।
  10. जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।
  11. भक्त आपका प्रकट-दिन मनाते हैं और पुण्यतिथि पर शीश नवाते हैं।
  12. आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।
  13. जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
  14. भक्त पुष्प व प्रसाद चढ़ाते हैं और श्रद्धा से महाराज को रिझाते हैं।
  15. आप समस्त रोग-दोष दूर भगाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
  16. जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह गजानन-कृपा प्राप्त करता है।
  17. आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; भय हरकर सुख देने वाले हैं।
  18. आप समाधि व ध्यान में लीन रहते थे और नित्य ब्रह्म-रूप में समाए रहते थे।
  19. जो श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
  20. जो यह गजानन चालीसा गाता है, उसके भय व संकट सब दूर नष्ट हो जाते हैं।
  21. जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर गजानन महाराज की कृपा होती है।
  22. सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
  23. जिन पर गजानन महाराज की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।
  24. आप भक्तों के हेतु संसार में प्रकट हुए और जन-जन का उद्धार किया।
  25. जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर गजानन देव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।
  26. आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।
  27. आपकी महिमा अति अपार है; जन-जन आपका जयकारा गाता है।
  28. आपने भक्ति व ज्ञान का मार्ग बताया और सरल-सहज भक्ति का पाठ पढ़ाया।
  29. घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
  30. जो जन दुःख-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।
  31. जो जन गजानन-स्तुति गाता है, वह समस्त रोग-शोक दूर भगा देता है।
  32. शेगांव-धाम की महिमा अति महान है; आप भव-तारण व जगत-हितकारी हैं।
  33. आप ज्ञान व भक्ति का मार्ग दिखाते हैं और शरणागत को पार लगाते हैं।
  34. आप दीनों के रक्षक व कल्याणकारी हैं; भव-तारण व सुख देने वाले हैं।
  35. जो जन गजानन महाराज के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
  36. जो जन गजानन-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
  37. घर में सुख, शांति व समृद्धि आती है और भक्ति, ज्ञान व संतोष बढ़ता है।
  38. जो जन गजानन महाराज का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।
  39. जो जन गजानन-नाम गाता है, वह सहज ही भक्ति-मार्ग पा लेता है।
  40. घर में ज्ञान, सुख व शांति आती है और भक्ति व श्रद्धा बढ़ती है।
  41. हे गजानन स्वामी, आपकी जय हो; हे अन्तर्यामी प्रभु, शरण में आए हम सबकी रक्षा कीजिए।
  42. जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल गजानन चालीसा पढ़ता है, उसके भय-संकट दूर होते हैं और महाराज की कृपा प्राप्त होती है।

लाभ

  • भय, रोग व संकट से रक्षा होती है।
  • मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं व बाधाएँ दूर होती हैं।
  • भक्ति, ज्ञान व आध्यात्मिक शांति बढ़ती है।
  • घर में सुख-समृद्धि व गुरु-कृपा बनी रहती है।

कब करें पाठ

गुरुवार को · प्रकट-दिन व पुण्यतिथि पर · नित्य प्रातः-संध्या पूजा में

स्रोत

रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक गजानन महाराज चालीसा · श्री गजानन विजय ग्रंथ परंपरा

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