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लिपि:
॥ श्री ॥
ॐ ह्रीं ह्रीं हूं हौं ह्रः
मंत्र · श्री हनुमान
पाठ
1
ॐ ह्रीं ह्रीं हूं हौं ह्रः॥
अर्थ (हिन्दी)
- यह बीज मंत्र है — इसमें शब्दों का वाक्य-अर्थ नहीं होता, ध्वनि स्वयं शक्ति मानी जाती है। परंपरा में "ह्रीं" को माया-बीज और "हूं" को कवच-बीज (रक्षा का बीज) कहा जाता है; समग्र भाव रक्षा व निर्भयता का लिया जाता है।
लाभ
- तंत्र परंपरा में बीज मंत्रों को रक्षा व निर्भयता से जोड़ा जाता है।
- "हूं" कवच-बीज होने से इसे सुरक्षा-भाव का मंत्र माना जाता है।
- ध्यान दें: यह विन्यास शास्त्रीय मंत्र-सूचियों में नहीं मिलता।
- अधिक प्रचलित विकल्प "ॐ हं हनुमते नमः" इस संग्रह में उपलब्ध है।
कब करें पाठ
मंगलवार व शनिवार को · हनुमान जयंती पर · भय या संकट के समय · गुरु-दीक्षा प्राप्त साधकों द्वारा नियमित साधना में
स्रोत
हनुमान उपासना की तंत्र/बीज-मंत्र परंपरा · नोट: यह विन्यास drikpanchang की हनुमान मंत्र-सूची में नहीं मिला (वहाँ केवल मूल, गायत्री व मनोजवम् हैं) · नोट: विभिन्न स्रोतों में इस बीज-विन्यास के पाठ में भिन्नताएँ मिलती हैं
