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लिपि:
॥ श्री ॥

ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः

मंत्र

पाठ

1

ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. केतु देव को नमस्कार। "स्रां स्रीं स्रौं सः" केतु के बीजाक्षर हैं जो केतु दोष शांत कर आध्यात्मिक उन्नति व बाधाओं से रक्षा प्रदान करते हैं।

लाभ

  • केतु दोष व कालसर्प योग में राहत मिलती है।
  • गुप्त बाधाओं व रोगों से रक्षा होती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति व वैराग्य-भाव बढ़ता है।

कब करें पाठ

मंगलवार व शनिवार को · प्रातः · केतु दोष शांति हेतु

स्रोत

पारंपरिक नवग्रह बीज मंत्र परंपरा

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