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लिपि:
॥ श्री ॥
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः
मंत्र · माँ लक्ष्मी
पाठ
1
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः॥
2
ॐ ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः॥
अर्थ (हिन्दी)
- माया-बीज "ह्रीं", श्री-बीज "श्रीं" और काम-बीज "क्लीं" सहित — महालक्ष्मी को नमस्कार। बीज मंत्र होने से इसमें शब्दों का वाक्य-अर्थ नहीं, ध्वनि स्वयं शक्ति मानी जाती है।
- (दूसरा प्रचलित रूप — "श्रीं" के बिना) माया-बीज व काम-बीज सहित महालक्ष्मी को नमस्कार।
लाभ
- परंपरा में इसे धन, समृद्धि व ऐश्वर्य की कामना से जोड़ा जाता है।
- "श्रीं" श्री-बीज होने से लक्ष्मी उपासना का केंद्रीय बीजाक्षर माना जाता है।
- दीपावली, धनतेरस व शुक्रवार पूजन में जप प्रचलित है।
- ध्यान दें: यह विन्यास शास्त्रीय मंत्र-सूचियों में नहीं मिला।
कब करें पाठ
शुक्रवार को · दीपावली व धनतेरस पर · अक्षय तृतीया पर · नए व्यापार या धन-संकल्प के आरंभ पर
स्रोत
लक्ष्मी उपासना की बीज-मंत्र परंपरा · निकट-रूप "ॐ ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः" प्रचलित स्रोतों में मिला · नोट: ठीक यह चार-बीज विन्यास जाँची गई शास्त्रीय मंत्र-सूचियों में नहीं मिला
