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लिपि:
॥ श्री ॥
पौष पुत्रदा एकादशी
व्रत कथा · श्री विष्णु
पाठ
व्रत कथा
राजा सुकेतुमान की व्यथा
भद्रावती नगरी के राजा सुकेतुमान व उनकी रानी शैव्या संतानहीन होने के कारण अत्यंत दुखी रहते थे। उन्हें चिंता थी कि उनके पश्चात पितरों का तर्पण व वंश का पालन कौन करेगा।
दुखी होकर राजा वन में भटकते हुए एक सरोवर के तट पर तपस्वी ऋषियों के पास पहुँचे।
व्रत से पुत्र-प्राप्ति
ऋषियों ने बताया — "आज पौष शुक्ल की पुत्रदा एकादशी है, जो उत्तम पुत्र का वरदान देने वाली है।" राजा ने वहीं विधिपूर्वक यह व्रत किया।
व्रत के प्रभाव से कुछ काल पश्चात रानी शैव्या ने गर्भ धारण किया और एक गुणवान व योग्य पुत्र को जन्म दिया, जो आगे चलकर श्रेष्ठ शासक बना।
लाभ
- उत्तम संतान की प्राप्ति
- वंश-वृद्धि व पितृ-ऋण से उऋण
- मनोकामना-पूर्ति; अंत में मोक्ष
स्रोत
पौष पुत्रदा एकादशी माहात्म्य — राजा सुकेतुमान व रानी शैव्या प्रसंग · एकादशी माहात्म्य परंपरा
