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लिपि:
॥ श्री ॥
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
मंत्र
पाठ
1
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः॥
अर्थ (हिन्दी)
- राहु देव को नमस्कार। "भ्रां भ्रीं भ्रौं सः" राहु के बीजाक्षर हैं जो राहु दोष शांत कर भय, भ्रम व बाधाओं से रक्षा करते हैं।
लाभ
- राहु दोष व कालसर्प योग में राहत मिलती है।
- भय, भ्रम व अचानक आने वाली बाधाओं से रक्षा होती है।
- मन की उलझनें दूर होकर स्पष्टता आती है।
कब करें पाठ
शनिवार व बुधवार को · राहुकाल में · राहु दोष शांति हेतु
स्रोत
पारंपरिक नवग्रह बीज मंत्र परंपरा
