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लिपि:
॥ श्री ॥

रमा एकादशी

व्रत कथा · श्री विष्णु

पाठ

व्रत कथा

शोभन का व्रत

राजा मुचुकुंद के राज्य में सभी एकादशी का व्रत अनिवार्य रूप से रखते थे। कार्तिक में उनकी पुत्री चंद्रभागा का पति शोभन ससुराल आया। एकादशी के दिन व्रत रखने पर शोभन को भूख-प्यास सहना कठिन लगा, किंतु चंद्रभागा ने कहा कि राज्य के कठोर नियम में कोई अपवाद संभव नहीं।

शोभन ने अनिच्छा से व्रत रखा, परंतु दुर्बल शरीर के कारण सूर्योदय से पूर्व ही उसकी मृत्यु हो गई।

व्रत का फल व दिव्य नगरी

भगवान विष्णु की कृपा से शोभन को मंदराचल पर्वत पर देवपुर नामक दिव्य नगरी प्राप्त हुई, किंतु अनिच्छा से किए व्रत के कारण वह नगरी अस्थिर थी। एक ब्राह्मण से यह समाचार पाकर चंद्रभागा वहाँ पहुँची।

बाल्यकाल से श्रद्धापूर्वक एकादशी-व्रत करने वाली चंद्रभागा ने अपने व्रत-पुण्य से उस नगरी को स्थिर कर दिया और दिव्य रूप पाकर पति के साथ सदा के लिए वहाँ निवास करने लगी। कथा का संदेश है — श्रद्धापूर्वक किया व्रत अनिच्छा से किए व्रत से कहीं श्रेष्ठ फल देता है।

लाभ

  • समस्त पापों का नाश
  • श्रद्धापूर्वक व्रत का श्रेष्ठ फल
  • दिव्य गति; अंत में विष्णुलोक

स्रोत

रमा एकादशी माहात्म्य — राजा मुचुकुंद, चंद्रभागा व शोभन प्रसंग · एकादशी माहात्म्य परंपरा

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