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लिपि:
॥ श्री ॥

शनि गायत्री मंत्र

मंत्र · श्री शनि देव

पाठ

1

ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि। तन्नो मन्दः प्रचोदयात्॥

2

ॐ शनैश्चराय विद्महे सूर्यपुत्राय धीमहि। तन्नो मन्दः प्रचोदयात्॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. जिनके ध्वज पर कौआ है, उन्हें हम जानते हैं; जिनके हाथ में खड्ग है, उनका हम ध्यान करते हैं। वे मन्द (शनि) हमें प्रेरित करें।
  2. (दूसरा प्रचलित पाठ) शनैश्चर को हम जानते हैं; सूर्यपुत्र का हम ध्यान करते हैं। वे मन्द (शनि) हमें प्रेरित करें।

लाभ

  • नवग्रह गायत्री परंपरा में शनि की प्रतिष्ठित गायत्री मानी जाती है।
  • परंपरा में इसे शनि-दोष व साढ़े साती की शांति से जोड़ा जाता है।
  • शनि हवन व ग्रह-शांति की पद्धति में पाठ विहित बताया जाता है।
  • गायत्री-ढाँचे में होने से जप व ध्यान — दोनों के लिए उपयुक्त कहा जाता है।

कब करें पाठ

शनिवार को, विशेषतः संध्या समय · शनि अमावस्या व शनि जयंती पर · साढ़े साती या ढैया के काल में · नवग्रह शांति व शनि हवन में

स्रोत

नवग्रह गायत्री परंपरा — शनि गायत्री (दोनों प्रचलित पाठ) · शनि हवन व ग्रह-शांति की पूजा-पद्धति

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