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लिपि:
॥ श्री ॥

आमलकी एकादशी

व्रत कथा · श्री विष्णु

पाठ

व्रत कथा

आँवले का माहात्म्य

शास्त्रों के अनुसार आँवले का वृक्ष भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। आमलकी एकादशी के दिन आँवले के वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु का पूजन, दीप-धूप व रात्रि-जागरण अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

कहा गया है कि इस व्रत का फल सहस्र गोदान के तुल्य है और यह भक्त के समस्त कार्यों को सफल बनाता है।

व्याध की कथा

एक पापी व्याध (बहेलिया), जो हिंसक कर्म के कारण नरक-गामी था, संयोगवश आमलकी एकादशी की रात्रि एक विष्णु-मंदिर में भगवान की कथा सुनते हुए जागता रहा — इस प्रकार अनजाने में ही उसका व्रत हो गया।

इस एक व्रत के प्रभाव से अगले जन्म में वह वसुरथ नामक धर्मात्मा व पराक्रमी राजा बना। एक बार वन में शत्रुओं द्वारा घेरे जाने पर भी दिव्य शक्ति ने उसकी रक्षा की — यह इसी व्रत का चिरस्थायी फल था। अंत में वह वैकुंठ को प्राप्त हुआ।

लाभ

  • समस्त कार्यों में सफलता
  • सहस्र गोदान तुल्य पुण्य
  • दिव्य रक्षा; अंत में वैकुंठ धाम

स्रोत

आमलकी एकादशी माहात्म्य — आँवला-पूजन व व्याध प्रसंग · एकादशी माहात्म्य परंपरा

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