आमलकी एकादशी

Amalaki Ekadashi

तिथि व्रत (एकादशी)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

आमलकी एकादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है — यह होली से कुछ दिन पूर्व आती है। इस दिन आँवले (आमलकी) वृक्ष का भगवान विष्णु के स्वरूप में पूजन किया जाता है, क्योंकि मान्यता है कि आँवला भगवान विष्णु के मुख से प्रकट हुआ है।

व्रत कथा

आँवले का माहात्म्य

शास्त्रों के अनुसार आँवले का वृक्ष भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। आमलकी एकादशी के दिन आँवले के वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु का पूजन, दीप-धूप व रात्रि-जागरण अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

कहा गया है कि इस व्रत का फल सहस्र गोदान के तुल्य है और यह भक्त के समस्त कार्यों को सफल बनाता है।

व्याध की कथा

एक पापी व्याध (बहेलिया), जो हिंसक कर्म के कारण नरक-गामी था, संयोगवश आमलकी एकादशी की रात्रि एक विष्णु-मंदिर में भगवान की कथा सुनते हुए जागता रहा — इस प्रकार अनजाने में ही उसका व्रत हो गया।

इस एक व्रत के प्रभाव से अगले जन्म में वह वसुरथ नामक धर्मात्मा व पराक्रमी राजा बना। एक बार वन में शत्रुओं द्वारा घेरे जाने पर भी दिव्य शक्ति ने उसकी रक्षा की — यह इसी व्रत का चिरस्थायी फल था। अंत में वह वैकुंठ को प्राप्त हुआ।

लाभ

  • समस्त कार्यों में सफलता
  • सहस्र गोदान तुल्य पुण्य
  • दिव्य रक्षा; अंत में वैकुंठ धाम

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारतिथि व्रत (एकादशी)
संबंधित पर्वएकादशी
तिथिएकादशी
आराध्यश्री विष्णु
आज का पंचांग एकादशी विवरण

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपराएकादशी माहात्म्य (वशिष्ठ द्वारा मान्धाता को वर्णित)
स्रोतआमलकी एकादशी माहात्म्य — आँवला-पूजन व व्याध प्रसंग · एकादशी माहात्म्य परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है, प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित। विस्तृत विधि व तिथि हेतु पंचांग तथा किसी विद्वान/पुरोहित से परामर्श लें।