कामिका एकादशी

Kamika Ekadashi

तिथि व्रत (एकादशी)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

कामिका एकादशी श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है (अमांत गणना में आषाढ़ कृष्ण)। यह भगवान विष्णु को समर्पित व्रत है, जिसमें तुलसीदल व दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है।

मान्यता है कि इस एकादशी की कथा का श्रवण मात्र भी अनेक यज्ञों के तुल्य पुण्य प्रदान करता है।

व्रत कथा

तुलसी व दीप का माहात्म्य

पुराणों के अनुसार कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु का तुलसीदल, पुष्प, धूप व दीप से पूजन करने का विशेष विधान है। कहा गया है कि भगवान विष्णु को रत्न, मोती व स्वर्ण-आभूषणों की अपेक्षा तुलसीदल अधिक प्रिय है।

इस दिन विष्णु के समक्ष दीपदान करने वाले भक्त पर भगवान की विशेष कृपा होती है, और उसके पितरों का भी उद्धार होता है।

व्रत का फल

शास्त्रों में वर्णित है कि कामिका एकादशी की कथा सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ के समान फल मिलता है। इस व्रत का पुण्य ग्रहण-काल में पवित्र नदियों के स्नान व भूमिदान से भी अधिक बताया गया है।

यह व्रत ब्रह्महत्या जैसे महापापों तक का नाश करने वाला तथा अंत में स्वर्ग व विष्णुलोक प्रदान करने वाला माना गया है।

लाभ

  • कथा-श्रवण मात्र से वाजपेय यज्ञ के तुल्य पुण्य
  • समस्त पापों का नाश व पितरों का उद्धार
  • अंत में विष्णुलोक की प्राप्ति

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारतिथि व्रत (एकादशी)
संबंधित पर्वएकादशी
तिथिएकादशी
आराध्यश्री विष्णु
आज का पंचांग एकादशी विवरण

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपराब्रह्मवैवर्त पुराण / एकादशी माहात्म्य
स्रोतकामिका एकादशी माहात्म्य (ब्रह्मवैवर्त पुराण परंपरा) · एकादशी माहात्म्य — तुलसी व दीपदान प्रसंग
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है, प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित। विस्तृत विधि, तिथि व पारण-मुहूर्त हेतु पंचांग तथा किसी विद्वान/पुरोहित से परामर्श लें।