पद्मिनी एकादशी

Padmini Ekadashi

तिथि व्रत (एकादशी) — अधिक मास

⚠ अंश

परिचय व महत्व

पद्मिनी एकादशी अधिक मास (मलमास/पुरुषोत्तम मास) के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। अधिक मास लगभग हर तीन वर्ष में आता है, अतः यह एकादशी प्रत्येक वर्ष नहीं आती और इसीलिए इसे अत्यंत दुर्लभ व फलदायी माना जाता है।

व्रत कथा

राजा कार्तवीर्य व रानी की तपस्या

राजा कार्तवीर्य (हैहयवंशी) व उनकी रानी प्रमदा संतान-सुख से वंचित थे। रानी ने संतान-प्राप्ति हेतु दस हज़ार वर्ष तक कठोर तप किया, किंतु कोई फल न मिला।

निराश रानी ने देवी अनसूया के पास जाकर उपाय पूछा। देवी ने उन्हें अधिक मास की पद्मिनी एकादशी का व्रत रात्रि-जागरण सहित करने की प्रेरणा दी।

व्रत का फल

रानी प्रमदा ने श्रद्धापूर्वक यह दुर्लभ व्रत किया, जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें कार्तवीर्य नामक तेजस्वी पुत्र का वरदान दिया — जो श्रीहरि के अतिरिक्त सबके लिए अजेय था।

यही कार्तवीर्य (सहस्रार्जुन) आगे चलकर इतना पराक्रमी हुआ कि उसने बलशाली रावण तक को बंदी बना लिया। इस प्रकार पद्मिनी एकादशी अपार पुण्य व मनोकामना-पूर्ति देने वाली मानी जाती है।

लाभ

  • दुर्लभ व अपार पुण्य
  • मनोकामना-पूर्ति (विशेषकर संतान-सुख)
  • तप-यज्ञों से श्रेष्ठ फल; अंत में विष्णुलोक

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारतिथि व्रत (एकादशी) — अधिक मास
संबंधित पर्वएकादशी
तिथिएकादशी
आराध्यश्री विष्णु
आज का पंचांग एकादशी विवरण

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपराएकादशी माहात्म्य (पुलस्त्य द्वारा नारद को वर्णित)
स्रोतपद्मिनी एकादशी माहात्म्य — राजा कार्तवीर्य व रानी प्रमदा प्रसंग · एकादशी माहात्म्य परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है, प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित। विस्तृत विधि व तिथि हेतु पंचांग तथा किसी विद्वान/पुरोहित से परामर्श लें।