उत्पन्ना एकादशी

Utpanna Ekadashi

तिथि व्रत (एकादशी)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

उत्पन्ना एकादशी मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है (अमांत गणना में कार्तिक कृष्ण)। इसी दिन देवी एकादशी का प्राकट्य (उत्पत्ति) हुआ, अतः इसे एकादशी-व्रत का आरंभ-दिवस माना जाता है — कई साधक आजीवन एकादशी व्रत का संकल्प इसी दिन से लेते हैं।

व्रत कथा

मुर असुर व देवी एकादशी का प्राकट्य

मुर नामक अत्यंत बलशाली असुर ने देवताओं को पराजित कर त्रिलोक में आतंक मचा दिया। भगवान विष्णु ने उससे सहस्र वर्ष तक युद्ध किया, किंतु वह पराजित न हुआ। विश्राम हेतु विष्णु बदरिकाश्रम की हेमवती गुफा में शयन करने लगे।

तभी मुर ने सोए हुए विष्णु पर आक्रमण करना चाहा। उसी क्षण विष्णु के शरीर से एक तेजस्विनी देवी प्रकट हुईं और उन्होंने अकेले ही मुर का संहार कर दिया।

देवी को "एकादशी" नाम व वरदान

प्रसन्न होकर विष्णु ने उस देवी को "एकादशी" नाम दिया और वरदान दिया कि जो भी एकादशी के दिन व्रत करेगा, उसके समस्त पाप नष्ट होंगे और उसे वैकुंठ की प्राप्ति होगी।

शास्त्रों में कहा गया है कि एकादशी व्रत का फल समस्त व्रतों व तीर्थों से भी अधिक है — यह भय दूर कर सुख, निर्भयता व अंत में मोक्ष प्रदान करता है।

लाभ

  • समस्त पापों का नाश
  • सभी व्रतों व तीर्थों से अधिक पुण्य
  • निर्भयता व सुख; अंत में वैकुंठ (मोक्ष)

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारतिथि व्रत (एकादशी)
संबंधित पर्वएकादशी
तिथिएकादशी
आराध्यश्री विष्णु
आज का पंचांग एकादशी विवरण

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपराएकादशी माहात्म्य (कृष्ण-अर्जुन संवाद)
स्रोतउत्पन्ना एकादशी माहात्म्य — मुर असुर वध व देवी एकादशी का प्राकट्य · एकादशी माहात्म्य परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है, प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित। विस्तृत विधि व तिथि हेतु पंचांग तथा किसी विद्वान/पुरोहित से परामर्श लें।