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FAQ
पूर्णिमा व्रत कथा — सामान्य प्रश्न
यह व्रत भगवान विष्णु तथा चंद्रदेव को समर्पित है। इस दिन सत्यनारायण कथा, दान-पुण्य तथा चंद्र-दर्शन का विशेष महत्व बताया गया है।
दिनभर उपवास रखकर संध्या को चंद्रोदय पर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है, और उसके पश्चात ही पारण किया जाता है।
हाँ। प्रत्येक मास की पूर्णिमा का अपना माहात्म्य है — जैसे आषाढ़ की गुरु पूर्णिमा, आश्विन की शरद पूर्णिमा तथा कार्तिक पूर्णिमा। इनके अपने स्वतंत्र पर्व भी हैं।
दिनभर उपवास रख विष्णु/सत्यनारायण का पूजन किया जाता है और रात्रि चंद्रोदय पर अर्घ्य देकर व्रत का पारण होता है।
साहूकार की दो बेटियों की कथा — बड़ी बेटी पूरा व्रत करती थी, छोटी अधूरा; अधूरे व्रत के दोष से छोटी की संतान जीवित नहीं रहती थी। पूरा व्रत करने और बड़ी बहन के पुण्य से उसका बच्चा जीवित हुआ, और तब से पूरा व्रत करने की परंपरा चली।
शरद पूर्णिमा की रात्रि चंद्र किरणें अमृतमयी मानी जाती हैं; खीर को चाँदनी में रखकर प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है।
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