गुरु पूर्णिमा

Guru Purnima

जून–जुलाई

महत्व

गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है और यह गुरु के प्रति कृतज्ञता का पर्व है।

"गुरु" शब्द की व्याख्या ही इस पर्व का भाव बता देती है — "गु" का अर्थ है अंधकार अथवा अज्ञान, और "रु" का अर्थ है उसे दूर करने वाला प्रकाश। अर्थात गुरु वह है जो अज्ञान से प्रकाश की ओर ले जाए।

परंपरा इसे व्यास पूर्णिमा भी कहती है, क्योंकि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म माना जाता है। जिनके प्रत्यक्ष गुरु न हों, वे इस दिन सद्गुरु अथवा इष्ट का स्मरण करते हैं।

पूजन विधि व परंपरा

  • गुरु का पूजन तथा चरण-वंदना
  • व्यास पूजन
  • गुरु-मंत्र का जप व सद्गुरु स्मरण
  • गुरु-दक्षिणा तथा सेवा
  • साईं आरती व चालीसा का पाठ (शिरडी परंपरा)
  • उपवास अथवा सात्त्विक आहार
  • अन्न-दान व सेवा

तिथि / पंचांग

तिथिपूर्णिमा
पक्षशुक्ल
माहआषाढ़
समय (लगभग)जून–जुलाई
आराध्यश्री साईं बाबा, श्री विष्णु
स्रोतhi.wikipedia.org/wiki/गुरु_पूर्णिमा — आषाढ़ पूर्णिमा; "गु" = अज्ञान/अंधकार, "रु" = उसका निवारक प्रकाश; व्यास पूर्णिमा
आज का पंचांग

गुरु पूर्णिमा — सामान्य प्रश्न

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