समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
दत्त जयंती (मार्गशीर्ष पूर्णिमा); गुरुवार
उद्देश्य:गुरु-भक्ति (Devotion to the Guru)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual growth)शांति (Peace)
✓ संपूर्ण
भगवान दत्तात्रेय की सबसे प्रसिद्ध आरती संत एकनाथ की मराठी रचना है — "त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा, त्रिगुणी अवतार त्रैलोक्य राणा"। इसकी टेक है "जय देव जय देव जय श्री गुरुदत्ता, आरती ओवाळिता हरली भवचिंता", और इसके चार पद हैं। अंतिम पद में छाप है — "एका जनार्दनी": एकनाथ, जो जनार्दन स्वामी के शिष्य थे।
FAQ
श्री दत्तात्रेय आरती — सामान्य प्रश्न
संत एकनाथ ने। अंतिम पद में उनकी छाप है — "एका जनार्दनी श्रीदत्तध्यान"; एकनाथ स्वयं को जनार्दन स्वामी का "एका" कहते थे।
टेक ("जय देव जय देव जय श्री गुरुदत्ता") और चार पद। भक्तिभारत, हिंदूनिधि और स्वामीआई — तीनों में ये सब हैं।
दत्तात्रेय को ब्रह्मा, विष्णु और महेश — तीनों का एक रूप माना जाता है; ये तीनों क्रमशः रज, सत्व और तम — तीन गुणों से जुड़े हैं। इसलिए आरती उन्हें "त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती" और "त्रिगुणी अवतार" कहती है।
तीन प्रकाशित प्रतियों से — भक्तिभारत (आधार), हिंदूनिधि और स्वामीआई। टेक और चारों पद तीनों में हैं।
पर्व
