श्री संतोषी माता आरती
śrī santoṣī mātā āratī
Santoshi Mata Aarti (Jai Santoshi Mata)
परिचय
स्रोत: पारंपरिक संतोषी माता आरती
उद्भव / पृष्ठभूमि
संतोषी माता संतोष व सुख-समृद्धि प्रदान करने वाली देवी हैं, जिन्हें गणेश-पुत्री माना जाता है। यह आरती शुक्रवार के व्रत व पूजन के पश्चात गाई जाती है, जिससे घर में संतोष, सुख-शांति व मनोकामना-पूर्ति होती है।
आरती (लिरिक्स)
जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता। अपने सेवक जन की, सुख सम्पति दाता॥
हे संतोषी माता, आपकी जय हो! आप अपने सेवक भक्तों को सुख व सम्पत्ति प्रदान करने वाली हैं।
सुन्दर चीर सुनहरी, माँ धारण कीन्हो। हीरा पन्ना दमके, तन शृंगार कीन्हो॥
हे माँ, आपने सुन्दर सुनहरे वस्त्र धारण किए हैं; हीरे-पन्ने दमक रहे हैं तथा आपने तन का सुन्दर शृंगार किया है।
गुड़ अरु चना परम प्रिय, ता में सन्तोष कियो। सन्तोषी कहलाई, भक्तन वैभव दियो॥
आपको गुड़ व चना अत्यंत प्रिय है, उसी में आपने संतोष किया; इसी कारण "संतोषी" कहलाईं और भक्तों को वैभव प्रदान किया।
शुक्रवार प्रिय तुमको, व्रत से तुम रीझो। भक्तन के दुख हरती, सब बिगड़े सीझो॥
आपको शुक्रवार प्रिय है तथा व्रत से आप प्रसन्न होती हैं; आप भक्तों के दुःख हरती हैं और सब बिगड़े कार्य संवार देती हैं।
सन्तोषी माँ की आरती, जो कोई जन गावे। ऋद्धि-सिद्धि सुख-सम्पति, सहज ही पावे॥
संतोषी माँ की यह आरती जो भी भक्त गाता है, वह ऋद्धि-सिद्धि व सुख-सम्पत्ति सहज ही प्राप्त कर लेता है।
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अर्थ (हिन्दी)
- हे संतोषी माता, आपकी जय हो! आप अपने सेवक भक्तों को सुख व सम्पत्ति प्रदान करने वाली हैं।
- हे माँ, आपने सुन्दर सुनहरे वस्त्र धारण किए हैं; हीरे-पन्ने दमक रहे हैं तथा आपने तन का सुन्दर शृंगार किया है।
- आपको गुड़ व चना अत्यंत प्रिय है, उसी में आपने संतोष किया; इसी कारण "संतोषी" कहलाईं और भक्तों को वैभव प्रदान किया।
- आपको शुक्रवार प्रिय है तथा व्रत से आप प्रसन्न होती हैं; आप भक्तों के दुःख हरती हैं और सब बिगड़े कार्य संवार देती हैं।
- संतोषी माँ की यह आरती जो भी भक्त गाता है, वह ऋद्धि-सिद्धि व सुख-सम्पत्ति सहज ही प्राप्त कर लेता है।
लाभ
- मन में संतोष व शांति का भाव बढ़ता है।
- घर में सुख-समृद्धि व सौहार्द बना रहता है।
- श्रद्धापूर्वक व्रत-आरती से मनोकामना पूर्ण होती है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
शुक्रवार को व्रत रखकर संतोषी माता के समक्ष गुड़-चना का भोग अर्पित करें, दीप जलाएँ और आरती गाएँ। इस दिन खटाई (खट्टी वस्तु) का त्याग किया जाता है; आरती के पश्चात प्रसाद ग्रहण करें।
