समय
5 मिनट
श्लोक/चौपाई
12
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
शुक्रवार; सन्तोषी माता व्रत
उद्देश्य:संतोष व शांति (Contentment)समृद्धि (Prosperity)मनोकामना (Wish fulfilment)
✓ संपूर्ण
"जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता" शुक्रवार के व्रत में गाई जाने वाली आरती है। इसके ग्यारह पद और एक फलश्रुति हैं। आरती माता के नाम का कारण स्वयं बताती है — "गुड़ अरु चना परमप्रिय, तामे संतोष कियो; सन्तोषी कहलाई": गुड़-चने जैसे सादे भोग में संतोष किया, इसलिए सन्तोषी कहलाईं।
FAQ
श्री सन्तोषी माता आरती — सामान्य प्रश्न
ग्यारह पद और एक फलश्रुति ("सन्तोषी माता की आरती, जो कोई जन गावे")। द्रिक पंचांग और भक्तिभारत दोनों में ये सब पद हैं।
आरती का पाँचवाँ पद स्वयं कारण बताता है — "गुड़ अरु चना परमप्रिय, तामे संतोष कियो; सन्तोषी कहलाई, भक्तन वैभव दियो"। गुड़-चने जैसे सादे भोग में संतोष कर लेने के कारण वे सन्तोषी कहलाईं।
शुक्रवार को, व्रत-कथा सुनने के बाद। आरती का छठा पद कहता है — "शुक्रवार प्रिय मानत, आज दिवस सोही; भक्त मण्डली छाई, कथा सुनत मोही"।
दो प्रकाशित प्रतियों से — द्रिक पंचांग (आधार) और भक्तिभारत। ग्यारहों पद और फलश्रुति दोनों में हैं; अंतर केवल छोटे शब्दों के हैं।
पर्व
