समय
2–3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
गंगा दशहरा; कार्तिक पूर्णिमा; नित्य संध्या
उद्देश्य:मोक्ष (Liberation)पवित्रता (Purity)शांति (Peace)
✓ संपूर्ण
"ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता" गंगा माँ की प्रचलित आरती है। इसके पाँच पद एक ही बात दोहराते हैं — गंगा की शरण तारती है: "शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता"। आरती राजा सगर के पुत्रों के उद्धार की कथा की ओर भी इशारा करती है — "पुत्र सगर के तारे"।
FAQ
श्री गंगा माता आरती — सामान्य प्रश्न
पाँच — "ॐ जय गंगे माता" से "आरती मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता" तक। द्रिक पंचांग और भक्तिभारत दोनों में यही पाँच पद हैं।
राजा सगर के पुत्रों के उद्धार का प्रसंग — गंगा के धरती पर उतरने से उनका उद्धार हुआ। आरती इसे गंगा की तारने वाली शक्ति का प्रमाण बताती है: "पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता"।
गंगा-तट पर संध्या-आरती में, गंगा दशहरा और कार्तिक पूर्णिमा पर, और घर में गंगाजल के समक्ष नित्य पूजा में।
दो प्रकाशित प्रतियों से — द्रिक पंचांग (आधार) और भक्तिभारत। पाँचों पद दोनों में हैं; अंतर केवल छोटे शब्दों के हैं।
पर्व
