श्री नवग्रह आरती

śrī navagraha āratī

Navgrah Aarti (Aarti Shri Navgrahon Ki Kije)

समय
2 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
ग्रह-शांति पूजा; शनिवार
उद्देश्य:ग्रह-शांति (Pacifying the planets)आरोग्य (Health)शांति (Peace)
✓ संपूर्ण

"आरती श्री नवग्रहों की कीजै, बाध, कष्ट, रोग, हर लीजै" नौ ग्रहों की आरती है। इसके पाँच छंद बारी-बारी से सूर्य से केतु तक हर ग्रह से एक वरदान माँगते हैं — सूर्य से तेज, चंद्र से शीतलता, गुरु से विद्या, और केतु से उत्तम स्वास्थ्य। शनि को आरती "न्यायधीश" कहती है।

परिचय

स्रोत: "आरती श्री नवग्रहों की कीजै" — प्रचलित आरती; भाषा अपेक्षाकृत आधुनिक

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री नवग्रह आरती
IASTśrī navagraha āratī
मूल स्रोत"आरती श्री नवग्रहों की कीजै" — प्रचलित आरती; भाषा अपेक्षाकृत आधुनिक
शुभ दिनग्रह-शांति पूजा; शनिवार
पाठ समय2 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

यह आरती नवग्रहों को डराने वाली शक्तियों की तरह नहीं, हर एक को किसी गुण के दाता की तरह गाती है।

ग्रह और उनके गुण. सूर्य — जीवन भर तेज; चंद्र — शीतलता, शांति और स्नेह; मंगल — अमंगल हरने वाला; बुध — वैभव, यश और लक्ष्मी; गुरु — विद्या, बुद्धि और ज्ञान; शुक्र — तर्क और विज्ञान, देश-धर्म की सेवा का यश; शनि — "न्यायधीश शनि", जिसे जप, तप और श्रद्धा अर्पित की जाए; राहु — मन का भ्रम हरने वाला; केतु — उत्तम स्वास्थ्य।

आधुनिक स्वर. "शुक्र तर्क विज्ञान बढावै", "देश धर्म सेवा यश लीजे" और "प्रगति सदा मानव पै रीझे" जैसी पंक्तियाँ बताती हैं कि यह आरती नई है। यह प्रकाशित और प्रचलित है, पर इसे प्राचीन परंपरा कहना ठीक नहीं होगा।

आरती (लिरिक्स)

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आरती श्री नवग्रहों की कीजै। बाध, कष्ट, रोग, हर लीजै॥ सूर्य तेज़ व्यापे जीवन भर। जाकी कृपा कबहुत नहिं छीजै॥

श्री नवग्रहों की आरती कीजिए, (और प्रार्थना कीजिए कि वे) बाधा, कष्ट और रोग हर लें। सूर्य का तेज जीवन भर व्याप्त रहे, जिसकी कृपा कभी क्षीण नहीं होती।

रूप चंद्र शीतलता लायें। शांति स्नेह सरस रस भीजै॥ मंगल हरे अमंगल सारा। सौम्य सुधा रस अमृत पीजै॥

चंद्रमा का रूप शीतलता लाए, (मन) शांति और स्नेह के सरस रस में भीगे; मंगल सारा अमंगल हर ले; (बुध के) सौम्य सुधा-रस का अमृत पीजिए।

बुद्ध सदा वैभव यश लीये। सुख सम्पति लक्ष्मी पसीजै॥ विद्या बुद्धि ज्ञान गुरु से ले लो। प्रगति सदा मानव पै रीझे॥

बुध सदा वैभव और यश लिए रहता है, (उससे) सुख, संपत्ति और लक्ष्मी पसीजती है; गुरु से विद्या, बुद्धि और ज्ञान लो — (जिससे) प्रगति सदा मनुष्य पर प्रसन्न रहे।

शुक्र तर्क विज्ञान बढावै। देश धर्म सेवा यश लीजे॥ न्यायधीश शनि अति ज्यारे। जप तप श्रद्धा शनि को दीजै॥

शुक्र तर्क और विज्ञान बढ़ाए, (उससे) देश और धर्म की सेवा का यश लीजिए; शनि न्यायाधीश हैं — शनि को जप, तप और श्रद्धा अर्पित कीजिए।

राहु मन का भरम हरावे। साथ न कबहु कुकर्म न दीजै॥ स्वास्थ्य उत्तम केतु राखै। पराधीनता मनहित खीजै॥

राहु मन का भ्रम हराए, और कभी कुकर्म का साथ न दे; केतु स्वास्थ्य उत्तम रखे, और पराधीनता से मन खीजे (दूर रहे)।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. श्री नवग्रहों की आरती कीजिए, (और प्रार्थना कीजिए कि वे) बाधा, कष्ट और रोग हर लें। सूर्य का तेज जीवन भर व्याप्त रहे, जिसकी कृपा कभी क्षीण नहीं होती।
  2. चंद्रमा का रूप शीतलता लाए, (मन) शांति और स्नेह के सरस रस में भीगे; मंगल सारा अमंगल हर ले; (बुध के) सौम्य सुधा-रस का अमृत पीजिए।
  3. बुध सदा वैभव और यश लिए रहता है, (उससे) सुख, संपत्ति और लक्ष्मी पसीजती है; गुरु से विद्या, बुद्धि और ज्ञान लो — (जिससे) प्रगति सदा मनुष्य पर प्रसन्न रहे।
  4. शुक्र तर्क और विज्ञान बढ़ाए, (उससे) देश और धर्म की सेवा का यश लीजिए; शनि न्यायाधीश हैं — शनि को जप, तप और श्रद्धा अर्पित कीजिए।
  5. राहु मन का भ्रम हराए, और कभी कुकर्म का साथ न दे; केतु स्वास्थ्य उत्तम रखे, और पराधीनता से मन खीजे (दूर रहे)।

लाभ

  • नवग्रह-शांति की प्रार्थना — "बाध, कष्ट, रोग, हर लीजै"।
  • हर ग्रह से एक गुण की माँग — सूर्य से तेज, गुरु से विद्या, केतु से स्वास्थ्य।

कब करें पाठ

नवग्रह-शांति पूजा के बादशनिवार कोग्रह-दोष के समय

पाठ विधि

नवग्रह पूजन या नवग्रह-मंत्र के जप के बाद दीपक जलाकर आरती गाएँ। टेक "आरती श्री नवग्रहों की कीजै" हर छंद के बाद दोहराएँ।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराknowledgegallery.in — श्री नवग्रह आरती (आधार-पाठ) · nakshatravichar.com — श्री नवग्रह की आरती
रचयिताअज्ञात (किसी प्रति में नाम नहीं)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

श्री नवग्रह आरती — सामान्य प्रश्न