श्री गायत्री माता आरती

śrī gāyatrī mātā āratī

Gayatri Mata Aarti (Jayati Jai Gayatri Mata)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

स्रोत: पारंपरिक गायत्री माता आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

गायत्री माता को वेदमाता तथा समस्त मंत्रों की जननी माना जाता है। यह आरती गायत्री उपासना व संध्या-वंदन के पश्चात गाई जाती है, जिससे बुद्धि, विवेक, तेज व आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

आरती (लिरिक्स)

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जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता। सत् मारग पर हमको चलाओ, जो है सुखदाता॥

हे गायत्री माता, आपकी जय हो! जो सुख देने वाला सत्य-मार्ग है, हमें उसी पर चलाइए।

आदि शक्ति तुम अलख निरंजन, जग पालन कर्त्री। दुःख शोक भय क्लेश कलह दारिद्र्य दैन्य हर्त्री॥

आप आदिशक्ति, अलक्ष्य व निरंजन हैं तथा जगत का पालन करने वाली हैं; आप दुःख, शोक, भय, क्लेश, कलह, दरिद्रता व दीनता का हरण करती हैं।

ब्रह्मरूपिणी प्रणत पालिनी, जगत धातृ अम्बे। भवभयहारी जनहितकारी, सुखद जननि जगदम्बे॥

हे अम्बे! आप ब्रह्मरूपिणी, शरणागत की रक्षिका व जगत को धारण करने वाली हैं; भवभय हरने वाली, जनहितकारी व सुख देने वाली जगज्जननी हैं।

भय हारिणि भवतारिणि अम्बे, भक्तन की रक्षा करो। ज्योति जगा कर अन्तर्मन में, सद्बुद्धि वर दो॥

हे भय हरने वाली व भवसागर से तारने वाली अम्बे! भक्तों की रक्षा कीजिए; अन्तर्मन में ज्ञान-ज्योति जगाकर हमें सद्बुद्धि का वरदान दीजिए।

गायत्री माँ की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। तेज बुद्धि बल पावे, भवसागर तर जावे॥

जो भक्त श्रद्धा से गायत्री माँ की यह आरती गाता है, वह तेज, बुद्धि व बल प्राप्त करता है और भवसागर से पार हो जाता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे गायत्री माता, आपकी जय हो! जो सुख देने वाला सत्य-मार्ग है, हमें उसी पर चलाइए।
  2. आप आदिशक्ति, अलक्ष्य व निरंजन हैं तथा जगत का पालन करने वाली हैं; आप दुःख, शोक, भय, क्लेश, कलह, दरिद्रता व दीनता का हरण करती हैं।
  3. हे अम्बे! आप ब्रह्मरूपिणी, शरणागत की रक्षिका व जगत को धारण करने वाली हैं; भवभय हरने वाली, जनहितकारी व सुख देने वाली जगज्जननी हैं।
  4. हे भय हरने वाली व भवसागर से तारने वाली अम्बे! भक्तों की रक्षा कीजिए; अन्तर्मन में ज्ञान-ज्योति जगाकर हमें सद्बुद्धि का वरदान दीजिए।
  5. जो भक्त श्रद्धा से गायत्री माँ की यह आरती गाता है, वह तेज, बुद्धि व बल प्राप्त करता है और भवसागर से पार हो जाता है।

लाभ

  • बुद्धि, विवेक व एकाग्रता में वृद्धि होती है।
  • मन शांत होकर आध्यात्मिक तेज व उन्नति बढ़ती है।
  • नकारात्मक विचारों का नाश होकर सद्बुद्धि आती है।

कब करें पाठ

प्रातः व संध्या (संध्या-वंदन काल)गायत्री जयंती परगायत्री जप/उपासना के पश्चात

पाठ विधि

स्नान कर स्वच्छ आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुख कर बैठें, गायत्री मंत्र का जप करें और तत्पश्चात दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक आरती गाएँ।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

श्री गायत्री माता आरती — सामान्य प्रश्न