समय
5 मिनट
श्लोक/चौपाई
11
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
गायत्री जयंती; प्रातः-संध्या उपासना
उद्देश्य:सद्बुद्धि (Right understanding)आत्म-शुद्धि (Inner purification)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual growth)
✓ संपूर्ण
"जयति जय गायत्री माता" गायत्री माता की आरती है, जिसे अखिल विश्व गायत्री परिवार अपनी "गायत्री चालीसा" पुस्तक में प्रकाशित करता है। इसके दस पद हैं। आरती की माँग धन या विजय नहीं, बुद्धि और मन की शुद्धि है — "शुद्ध बुद्धि, निष्पाप हृदय, मन को पवित्र करिये" — और अंत में "सत मारग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता"।
FAQ
श्री गायत्री माता आरती — सामान्य प्रश्न
टेक "जयति जय गायत्री माता" और दस पद। अखिल विश्व गायत्री परिवार की प्रति में दसों पद क्रमांकित हैं, और द्रिक पंचांग में भी यही दस पद हैं।
अखिल विश्व गायत्री परिवार (awgp.org) अपनी "गायत्री चालीसा" पुस्तक में इसे "आरती गायत्री जी की" नाम से प्रकाशित करता है; द्रिक पंचांग भी यही आरती देता है। किसी प्रति में रचयिता का नाम नहीं है।
गायत्री मंत्र सविता (सूर्य) को संबोधित है — "तत्सवितुर्वरेण्यं"। इसलिए आरती गायत्री को सविता की शाश्वत शक्ति कहती है (पद 4)।
दो प्रकाशित प्रतियों से — अखिल विश्व गायत्री परिवार की "गायत्री चालीसा" पुस्तक (आधार) और द्रिक पंचांग। टेक और दसों पद दोनों में हैं।
