श्री कार्तिकेय आरती
śrī kārtikeya āratī
Kartikeya Aarti (Jai Jai Kartikeya / Murugan)
परिचय
स्रोत: पारंपरिक कार्तिकेय (मुरुगन) आरती
उद्भव / पृष्ठभूमि
भगवान कार्तिकेय शिव-पार्वती के पुत्र, देव-सेनापति तथा विजय व साहस के देव हैं; इन्हें मुरुगन, स्कन्द, षण्मुख व सुब्रह्मण्य भी कहा जाता है। यह आरती मंगलवार, षष्ठी तिथि व स्कन्द षष्ठी पर गाई जाती है।
आरती (लिरिक्स)
जय जय कार्तिकेय स्वामी, जय देव-सेनापति। शिव-पार्वती के नंदन, हरते भक्तन विपति॥
हे कार्तिकेय स्वामी, देव-सेनापति, आपकी जय हो! आप शिव-पार्वती के पुत्र हैं और भक्तों की विपत्ति हरते हैं।
षण्मुख रूप विराजे, मयूर पर सवारी। कर में शक्ति-वेल धारे, शोभा अति न्यारी॥
षण्मुख (छह मुख वाले) रूप में विराजमान, मयूर पर सवारी करते हुए; हाथ में शक्ति-वेल (भाला) धारण किए — आपकी शोभा अति अनुपम है।
तारकासुर संहारी, देवन भय टारा। वीर साहस के दाता, जग-रक्षा-कारा॥
आपने तारकासुर का संहार कर देवताओं का भय दूर किया; आप वीरता व साहस के दाता तथा जगत की रक्षा करने वाले हैं।
भक्तन के संकट हरते, विजय सदा दिलाते। रोग-शोक भय मिटते, जो तुमको ध्याते॥
आप भक्तों के संकट हरते हैं और सदा विजय दिलाते हैं; जो आपका ध्यान करते हैं, उनके रोग-शोक व भय मिट जाते हैं।
कार्तिकेय जी की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। विजय साहस बल पावे, संकट सब मिट जावे॥
जो भक्त श्रद्धा से कार्तिकेय जी की यह आरती गाता है, वह विजय, साहस व बल पाता है और उसके समस्त संकट मिट जाते हैं।
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अर्थ (हिन्दी)
- हे कार्तिकेय स्वामी, देव-सेनापति, आपकी जय हो! आप शिव-पार्वती के पुत्र हैं और भक्तों की विपत्ति हरते हैं।
- षण्मुख (छह मुख वाले) रूप में विराजमान, मयूर पर सवारी करते हुए; हाथ में शक्ति-वेल (भाला) धारण किए — आपकी शोभा अति अनुपम है।
- आपने तारकासुर का संहार कर देवताओं का भय दूर किया; आप वीरता व साहस के दाता तथा जगत की रक्षा करने वाले हैं।
- आप भक्तों के संकट हरते हैं और सदा विजय दिलाते हैं; जो आपका ध्यान करते हैं, उनके रोग-शोक व भय मिट जाते हैं।
- जो भक्त श्रद्धा से कार्तिकेय जी की यह आरती गाता है, वह विजय, साहस व बल पाता है और उसके समस्त संकट मिट जाते हैं।
लाभ
- विजय, साहस व आत्मबल में वृद्धि होती है।
- शत्रु-बाधा, भय व संकट का नाश होता है।
- रोग-शोक दूर होकर मन को शक्ति मिलती है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
भगवान कार्तिकेय के समक्ष पुष्प व दीप अर्पित करें, "ॐ शरवणभव" अथवा "ॐ स्कन्दाय नमः" का स्मरण करते हुए आरती गाएँ। स्कन्द षष्ठी पर इसका विशेष महत्व है।
