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लिपि:
॥ श्री ॥
श्री नवग्रह आरती
आरती
पाठ
1
आरती श्री नवग्रहों की कीजै। बाध, कष्ट, रोग, हर लीजै॥ सूर्य तेज़ व्यापे जीवन भर। जाकी कृपा कबहुत नहिं छीजै॥
2
रूप चंद्र शीतलता लायें। शांति स्नेह सरस रस भीजै॥ मंगल हरे अमंगल सारा। सौम्य सुधा रस अमृत पीजै॥
3
बुद्ध सदा वैभव यश लीये। सुख सम्पति लक्ष्मी पसीजै॥ विद्या बुद्धि ज्ञान गुरु से ले लो। प्रगति सदा मानव पै रीझे॥
4
शुक्र तर्क विज्ञान बढावै। देश धर्म सेवा यश लीजे॥ न्यायधीश शनि अति ज्यारे। जप तप श्रद्धा शनि को दीजै॥
5
राहु मन का भरम हरावे। साथ न कबहु कुकर्म न दीजै॥ स्वास्थ्य उत्तम केतु राखै। पराधीनता मनहित खीजै॥
अर्थ (हिन्दी)
- श्री नवग्रहों की आरती कीजिए, (और प्रार्थना कीजिए कि वे) बाधा, कष्ट और रोग हर लें। सूर्य का तेज जीवन भर व्याप्त रहे, जिसकी कृपा कभी क्षीण नहीं होती।
- चंद्रमा का रूप शीतलता लाए, (मन) शांति और स्नेह के सरस रस में भीगे; मंगल सारा अमंगल हर ले; (बुध के) सौम्य सुधा-रस का अमृत पीजिए।
- बुध सदा वैभव और यश लिए रहता है, (उससे) सुख, संपत्ति और लक्ष्मी पसीजती है; गुरु से विद्या, बुद्धि और ज्ञान लो — (जिससे) प्रगति सदा मनुष्य पर प्रसन्न रहे।
- शुक्र तर्क और विज्ञान बढ़ाए, (उससे) देश और धर्म की सेवा का यश लीजिए; शनि न्यायाधीश हैं — शनि को जप, तप और श्रद्धा अर्पित कीजिए।
- राहु मन का भ्रम हराए, और कभी कुकर्म का साथ न दे; केतु स्वास्थ्य उत्तम रखे, और पराधीनता से मन खीजे (दूर रहे)।
लाभ
- नवग्रह-शांति की प्रार्थना — "बाध, कष्ट, रोग, हर लीजै"।
- हर ग्रह से एक गुण की माँग — सूर्य से तेज, गुरु से विद्या, केतु से स्वास्थ्य।
कब करें पाठ
नवग्रह-शांति पूजा के बाद · शनिवार को · ग्रह-दोष के समय
स्रोत
रचयिता: अज्ञात (किसी प्रति में नाम नहीं). knowledgegallery.in — श्री नवग्रह आरती (आधार-पाठ) · nakshatravichar.com — श्री नवग्रह की आरती
