समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
8
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
कबीर जयंती (ज्येष्ठ पूर्णिमा); पूर्णिमा
उद्देश्य:आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual growth)शांति (Peace)मुक्ति (Liberation)
✓ संपूर्ण
"जय जय सत्य कबीर" कबीरपंथ में गाई जाने वाली संत कबीर की आरती है। इसमें टेक और सात पद हैं। आरती कबीर को "सत्यनाम", "त्रिभुवन पति स्वामी" और "काशीपुरवासी" कहती है, और छठे पद में उसकी छाप है — "धरमदास बलिहारी"। अंतिम पद फलश्रुति है: जो यह आरती गाता है, वह भक्ति पाता है और फिर भव में नहीं आता।
FAQ
श्री संत कबीर आरती — सामान्य प्रश्न
कबीरपंथ में "जय जय सत्य कबीर" गाई जाती है — टेक और सात पद, छठे पद में छाप "धरमदास बलिहारी"। संत साहित्य और कबीर एसोसिएशन ऑफ़ टोरंटो का आरती एवं वन्दना संग्रह — दोनों में यह शब्दशः एक है।
कबीरपंथ में जीव (आत्मा) को हंस कहा जाता है। पाँचवाँ पद कहता है — "हंस उबारन कारन, प्रगटे तनधारी": हंसों को उबारने के लिए कबीर देह धारण कर प्रकट हुए।
धरमदास कबीरपंथ में कबीर साहेब के प्रमुख शिष्य के रूप में प्रसिद्ध हैं। इस आरती के छठे पद में उनकी छाप है — "धरमदास बलिहारी, मुध मंगल कारी"।
दो प्रकाशित प्रतियों से — संत साहित्य (आधार) और कबीर एसोसिएशन ऑफ़ टोरंटो का आरती एवं वन्दना संग्रह। टेक और सातों पद दोनों में एक हैं।
पर्व
