FAQ
श्री विष्णु — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश। भगवान विष्णु त्रिदेवों में पालन के अधिष्ठाता हैं और क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर विराजमान रहते हैं। जब-जब धर्म की हानि होती है, वे अवतार लेकर सृष्टि की रक्षा करते हैं — राम, कृष्ण आदि उनके प्रमुख अवतार हैं।
परंपरा के अनुसार श्री विष्णु का वाहन गरुड़ है। उनकी शक्ति/संगिनी माँ लक्ष्मी मानी जाती हैं।
श्री विष्णु का बीज मंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" है। रोमन में इसे "Om Namo Bhagavate Vasudevaya" लिखा जाता है। मंत्र-जप श्रद्धा व नियमितता पर आधारित परंपरा है।
परंपरा में श्री विष्णु की आराधना के लिए गुरुवार विशेष माना जाता है। इस दिन व्रत, मंत्र-जप और संबंधित पाठ का विधान बताया जाता है।
श्री विष्णु को नारायण, जगदीश, हरि, गोविंद आदि नामों से भी जाना जाता है। हर नाम उनके किसी एक स्वरूप या गुण की ओर संकेत करता है।
चतुर्भुज, शंख-चक्र-गदा-पद्मधारी, पीतांबरधारी, शेषशायी; वाहन गरुड़, संग लक्ष्मी। परंपरा में उन्हें पालन, रक्षा, धर्म-संस्थापना का अधिष्ठाता माना जाता है।
इस पृष्ठ पर श्री विष्णु से जुड़े 24 भक्ति पाठ उपलब्ध हैं — आरती, चालीसा, मंत्र व स्तोत्र सहित। हर पाठ हिन्दी, IAST और रोमन तीनों लिपियों में पढ़ा जा सकता है।
