श्री रंगनाथ आरती

śrī raṃganātha āratī

Ranganath Aarti (Srirangam)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।

स्रोत: श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, श्रीरंगम (तमिलनाडु)

उद्भव / पृष्ठभूमि

भगवान रंगनाथ श्रीविष्णु का शयन-स्वरूप हैं, जो शेषनाग पर शयन-मुद्रा में श्रीरंगम (तमिलनाडु) के विशाल रंगनाथस्वामी मंदिर में विराजमान हैं। यह वैष्णवों के 108 दिव्यदेशों में सर्वप्रमुख है। वैकुण्ठ एकादशी पर यहाँ का "वैकुण्ठ द्वार" दर्शन विश्व-प्रसिद्ध है।

आरती (लिरिक्स)

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जय रंगनाथ स्वामी, शेष-शय्या धारी। श्रीरंगम विराजे, जय भव-भय-हारी॥

हे रंगनाथ स्वामी, शेष-शय्या पर शयन करने वाले, आपकी जय हो! श्रीरंगम में विराजमान हे भव-भय हरने वाले, आपकी जय हो।

श्याम-वरण तन सुन्दर, शयन-मुद्रा प्यारी। लक्ष्मी (रंगनायकी) संग शोभे, छवि अति न्यारी॥

श्याम वर्ण का सुन्दर तन, प्यारी शयन-मुद्रा में; लक्ष्मी (रंगनायकी) के संग सुशोभित आपकी छवि अति अनुपम है।

दिव्यदेश में प्रमुख, वैष्णव-धाम कहाया। वैकुण्ठ एकादशी पर, द्वार स्वर्ग का खुलवाया॥

दिव्यदेशों में प्रमुख, आप वैष्णव-धाम कहलाते हैं; वैकुण्ठ एकादशी पर यहाँ (वैकुण्ठ) स्वर्ग का द्वार खुलता है।

भक्तन के दुख हरते, मोक्ष-मार्ग दिखाते। जो जन तुमको सुमिरे, भव-पार लगाते॥

आप भक्तों के दुःख हरते हैं और मोक्ष-मार्ग दिखाते हैं; जो आपका स्मरण करते हैं, उन्हें भवसागर से पार लगाते हैं।

रंगनाथ की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। भक्ति-मुक्ति वह पावे, हरि-कृपा पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से रंगनाथ की यह आरती गाता है, वह भक्ति व मुक्ति तथा हरि (विष्णु) की कृपा प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे रंगनाथ स्वामी, शेष-शय्या पर शयन करने वाले, आपकी जय हो! श्रीरंगम में विराजमान हे भव-भय हरने वाले, आपकी जय हो।
  2. श्याम वर्ण का सुन्दर तन, प्यारी शयन-मुद्रा में; लक्ष्मी (रंगनायकी) के संग सुशोभित आपकी छवि अति अनुपम है।
  3. दिव्यदेशों में प्रमुख, आप वैष्णव-धाम कहलाते हैं; वैकुण्ठ एकादशी पर यहाँ (वैकुण्ठ) स्वर्ग का द्वार खुलता है।
  4. आप भक्तों के दुःख हरते हैं और मोक्ष-मार्ग दिखाते हैं; जो आपका स्मरण करते हैं, उन्हें भवसागर से पार लगाते हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से रंगनाथ की यह आरती गाता है, वह भक्ति व मुक्ति तथा हरि (विष्णु) की कृपा प्राप्त करता है।

लाभ

  • भक्ति, सुख-शांति व मन की प्रसन्नता बढ़ती है।
  • भय व संकट दूर होकर रक्षा मिलती है।
  • मोक्ष-मार्ग प्रशस्त होकर विष्णु-कृपा प्राप्त होती है।

कब करें पाठ

वैकुण्ठ एकादशी परएकादशी व नित्य संध्या मेंगुरुवार को

पाठ विधि

भगवान रंगनाथ के समक्ष तुलसी, पुष्प व भोग अर्पित करें, "जय श्रीरंगनाथ" का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक आरती गाएँ। वैकुण्ठ एकादशी पर दर्शन-आरती विशेष फलदायी मानी जाती है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री विष्णु

Lord Vishnu

भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।

देवता वर्गपालन · रक्षा · धर्म-संस्थापना
वाहनगरुड़
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मुख्य मंत्रॐ नमो भगवते वासुदेवाय
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श्री रंगनाथ आरती — सामान्य प्रश्न

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