Vrat Katha
व्रत व उपवास से जुड़ी पौराणिक कथाएँ व विधि — एकादशी, प्रदोष, सत्यनारायण आदि।
सभी 26 एकादशी (मास-अनुसार)
श्री विष्णु
पाठ 8–10 मिनट
सत्यनारायण व्रत भगवान विष्णु के "सत्यनारायण" स्वरूप को समर्पित है। यह व्रत किसी भी शुभ अवसर, मनोकामना पूर्ति या पूर्णिमा को किया जाता है।
श्री शिव
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है और प्रत्येक माह की दोनों त्रयोदशी तिथियों को आता है — अर्थात् मास में दो बार।
पाठ 5–6 मिनट
करवा चौथ सुहागिन स्त्रियों का प्रमुख व्रत है, जो कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को रखा जाता है।
माँ दुर्गा
संतोषी माता संतोष व सुख की देवी मानी जाती हैं। उनका व्रत प्रायः लगातार 16 शुक्रवार रखा जाता है और मनोकामना पूर्ण होने पर उद्यापन किया जाता है।
पाठ 7–9 मिनट
सोमवार का व्रत भगवान शिव को समर्पित है। "सोम" चंद्रमा का नाम है, जो शिव के मस्तक पर विराजमान हैं — इसीलिए सोमवार शिव का सर्वाधिक प्रिय वार माना जाता…
पाठ 10–12 मिनट
सोलह सोमवार व्रत भगवान शिव का विशेष संकल्प-व्रत है, जिसे लगातार सोलह सोमवार रखा जाता है और सत्रहवें सोमवार को विधिपूर्वक उद्यापन किया जाता है।
माँ लक्ष्मी
वैभव लक्ष्मी व्रत माँ महालक्ष्मी को समर्पित है और प्रायः शुक्रवार को रखा जाता है। यह व्रत धन, वैभव व सुख-समृद्धि की प्राप्ति हेतु किया जाता है।
अहोई अष्टमी व्रत माताएँ अपनी संतान की दीर्घायु, सुख व समृद्धि हेतु रखती हैं। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी (दीपावली से लगभग आठ दिन पूर्व) को…
पूर्णिमा व्रत प्रत्येक माह की पूर्ण चंद्र तिथि को रखा जाता है और यह भगवान विष्णु तथा चंद्रदेव को समर्पित है।
पाठ 9–11 मिनट
महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आती है (अमांत गणना में माघ कृष्ण चतुर्दशी) — प्रायः फरवरी-मार्च में।