वैभव लक्ष्मी व्रत कथा

Vaibhav Lakshmi Vrat Katha

वार व्रत (शुक्रवार)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

वैभव लक्ष्मी व्रत माँ महालक्ष्मी को समर्पित है और प्रायः शुक्रवार को रखा जाता है। यह व्रत धन, वैभव व सुख-समृद्धि की प्राप्ति हेतु किया जाता है। साधक 11 या 21 शुक्रवार व्रत रखकर मनोकामना पूर्ण होने पर उद्यापन करते हैं।

इस व्रत में स्वच्छता, श्रद्धा व माता लक्ष्मी के "श्री" स्वरूप का पूजन प्रमुख है।

व्रत नियम (Fasting Guide)

कौन रखेसमृद्धि की कामना रखने वाले स्त्री-पुरुष
कब रखेंशुक्रवार (संकल्पानुसार 11 या 21 शुक्रवार); संध्या पूजन
आहार नियम:
  • दिनभर फलाहार या एक समय सात्विक भोजन
  • संध्या पूजन के बाद प्रसाद
  • तामसिक भोजन वर्जित
अनुशंसित अभ्यास:
  • माँ लक्ष्मी का "श्री" रूप पूजन
  • लक्ष्मी आरती व चालीसा
  • खीर/सफेद मिठाई का भोग

पूजन सामग्री

लक्ष्मी चित्र/श्रीयंत्रजल से भरा कलशचाँदी का सिक्का/आभूषणसफेद मिठाई/खीरलाल पुष्पदीप व धूप

पूजन विधि (चरण-दर-चरण)

  1. शुक्रवार संध्या स्नान कर स्वच्छ स्थान पर माँ लक्ष्मी का चित्र स्थापित करें।
  2. जल का कलश रखकर उस पर चाँदी का सिक्का/आभूषण रखें।
  3. दीप-धूप जलाकर माता का "श्री" रूप में पूजन करें।
  4. वैभव लक्ष्मी व्रत कथा सुनें/पढ़ें व लक्ष्मी आरती करें।
  5. खीर/मिठाई का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करें; निर्धारित शुक्रवार पूर्ण होने पर उद्यापन करें।

व्रत कथा

श्रद्धालु स्त्री की कथा

एक नगर में एक सीधी-सच्ची स्त्री रहती थी जिसका परिवार आर्थिक कष्ट से जूझ रहा था। एक दिन एक देवी-समान वृद्धा ने उसे वैभव लक्ष्मी व्रत की विधि बताई।

उस स्त्री ने श्रद्धापूर्वक प्रत्येक शुक्रवार माँ लक्ष्मी का व्रत व पूजन किया। माता की कृपा से धीरे-धीरे उसके घर में सुख-समृद्धि व वैभव आने लगा और कष्ट दूर हो गए।

कथा का सार यह है कि श्रद्धा, स्वच्छता व नियम से किया गया वैभव लक्ष्मी व्रत माँ की कृपा से धन, वैभव व पारिवारिक सुख प्रदान करता है।

लाभ

  • धन, वैभव व समृद्धि की प्राप्ति।
  • आर्थिक संकट का नाश।
  • घर में सुख-शांति व सौभाग्य।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपरापारंपरिक लोक-परंपरा
स्रोतपारंपरिक लोक-परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है; विस्तृत विधि व उद्यापन हेतु बड़ों/पुरोहित से परामर्श लें।

व्रत जानकारी

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वैभव लक्ष्मी व्रत कथा — सामान्य प्रश्न

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