वैभव लक्ष्मी व्रत कथा
पाठ
व्रत नियम
कौन रखे: समृद्धि की कामना रखने वाले स्त्री-पुरुष
कब: शुक्रवार (संकल्पानुसार 11 या 21 शुक्रवार); संध्या पूजन
आहार नियम: दिनभर फलाहार या एक समय सात्विक भोजन; संध्या पूजन के बाद प्रसाद; तामसिक भोजन वर्जित
पूजन सामग्री
लक्ष्मी चित्र/श्रीयंत्र · जल से भरा कलश · चाँदी का सिक्का/आभूषण · सफेद मिठाई/खीर · लाल पुष्प · दीप व धूप
पूजन विधि
- शुक्रवार संध्या स्नान कर स्वच्छ स्थान पर माँ लक्ष्मी का चित्र स्थापित करें।
- जल का कलश रखकर उस पर चाँदी का सिक्का/आभूषण रखें।
- दीप-धूप जलाकर माता का "श्री" रूप में पूजन करें।
- वैभव लक्ष्मी व्रत कथा सुनें/पढ़ें व लक्ष्मी आरती करें।
- खीर/मिठाई का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करें; निर्धारित शुक्रवार पूर्ण होने पर उद्यापन करें।
व्रत कथा
श्रद्धालु स्त्री की कथा
एक नगर में एक सीधी-सच्ची स्त्री रहती थी जिसका परिवार आर्थिक कष्ट से जूझ रहा था। एक दिन एक देवी-समान वृद्धा ने उसे वैभव लक्ष्मी व्रत की विधि बताई।
उस स्त्री ने श्रद्धापूर्वक प्रत्येक शुक्रवार माँ लक्ष्मी का व्रत व पूजन किया। माता की कृपा से धीरे-धीरे उसके घर में सुख-समृद्धि व वैभव आने लगा और कष्ट दूर हो गए।
कथा का सार यह है कि श्रद्धा, स्वच्छता व नियम से किया गया वैभव लक्ष्मी व्रत माँ की कृपा से धन, वैभव व पारिवारिक सुख प्रदान करता है।
लाभ
- धन, वैभव व समृद्धि की प्राप्ति।
- आर्थिक संकट का नाश।
- घर में सुख-शांति व सौभाग्य।
स्रोत
रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक लोक-परंपरा
