ललिता सहस्रनाम

lalitā sahasranāma

Lalita Sahasranama

समय
40–50 मिनट (सम्पूर्ण)
श्लोक
1
कुल नाम
1000
कठिनाई
कठिन (Advanced)
शुभ दिन
शुक्रवार व नवरात्रि
उद्देश्य:रक्षा (Protection)समृद्धि (Prosperity)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
🚧 निर्माणाधीन

परिचय

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

स्रोत: ब्रह्माण्ड पुराण के ललितोपाख्यान का अंश (ध्यान व प्रमुख नाम; सम्पूर्ण नामावली क्रमशः जोड़ी जा रही है)

उद्भव / पृष्ठभूमि

ललिता सहस्रनाम देवी ललिता (त्रिपुर सुंदरी / आदि पराशक्ति) के एक हजार नामों का स्तोत्र है, जो ब्रह्माण्ड पुराण के ललितोपाख्यान में वर्णित है। इसे वाग्देवियों द्वारा रचित माना जाता है। यह श्रीविद्या उपासना का प्रमुख स्तोत्र है।

यह पृष्ठ ध्यान-श्लोक व प्रमुख आरंभिक नाम प्रस्तुत करता है; सम्पूर्ण नामावली क्रमशः जोड़ी जा रही है।

ध्यान व आरंभिक श्लोक

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॥ ध्यानम् ॥ अरुणां करुणातरङ्गिताक्षीं धृतपाशाङ्कुशपुष्पबाणचापाम्। अणिमादिभिरावृतां मयूखैरहमित्येव विभावये भवानीम्॥

अरुण वर्ण वाली, करुणा से तरंगित नेत्रों वाली, पाश-अंकुश व पुष्प-बाण-धनुष धारण करने वाली, अणिमादि सिद्धियों से घिरी हुई भवानी का मैं "अहम्" रूप में ध्यान करता हूँ।

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नाम सूची (Name List)

लिपि:

आरंभिक नाम (नाम 1–10)

  1. 1.
    श्रीमातासमस्त सृष्टि की पावन माता
  2. 2.
    श्रीमहाराज्ञीब्रह्मांड की महारानी
  3. 3.
    श्रीमत्सिंहासनेश्वरीदिव्य सिंहासन की स्वामिनी
  4. 4.
    चिदग्निकुण्डसम्भूताचित् रूपी अग्निकुंड से प्रकट
  5. 5.
    देवकार्यसमुद्यतादेवों के कार्य हेतु उद्यत
  6. 6.
    उद्यद्भानुसहस्राभासहस्र उदित सूर्यों-सी आभा वाली
  7. 7.
    चतुर्बाहुसमन्विताचार भुजाओं से युक्त
  8. 8.
    रागस्वरूपपाशाढ्याराग रूपी पाश धारण करने वाली
  9. 9.
    क्रोधाकाराङ्कुशोज्ज्वलाक्रोध रूपी अंकुश से उज्ज्वल
  10. 10.
    मनोरूपेक्षुकोदण्डामन रूपी इक्षु-धनुष धारण करने वाली

अर्थ (हिन्दी)

  1. अरुण वर्ण वाली, करुणा से तरंगित नेत्रों वाली, पाश-अंकुश व पुष्प-बाण-धनुष धारण करने वाली, अणिमादि सिद्धियों से घिरी हुई भवानी का मैं "अहम्" रूप में ध्यान करता हूँ।

लाभ

  • देवी की कृपा से समृद्धि, रक्षा व आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  • मन की एकाग्रता व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
  • श्रीविद्या उपासना में अत्यंत फलदायी।

कब करें पाठ

शुक्रवार कोनवरात्रि मेंपूर्णिमा को

पाठ विधि

देवी के समक्ष कुमकुम, लाल पुष्प व दीप अर्पित कर ध्यान-श्लोक से आरंभ करें, फिर शुद्ध उच्चारण से नामावली का पाठ करें। शुक्रवार व नवरात्रि में पाठ विशेष फलदायी है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति🚧 निर्माणाधीन
मूल ग्रंथब्रह्माण्ड पुराण — ललितोपाख्यान
स्रोत परंपराब्रह्माण्ड पुराण — ललितोपाख्यान
रचयितावाग्देवियाँ (हयग्रीव-अगस्त्य संवाद)
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह पृष्ठ परिचय व संरचना प्रस्तुत करता है; सम्पूर्ण पाठ क्रमशः जोड़ा जा रहा है।

देव परिचय

माँ दुर्गा

Goddess Durga

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

देवता वर्गशक्ति · रक्षा · विजय · साहस
वाहनसिंह
मुख्य मंत्रॐ दुं दुर्गायै नमः
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ललिता सहस्रनाम — सामान्य प्रश्न

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