श्री पार्वती माता आरती

śrī pārvatī mātā āratī

Parvati Mata Aarti (Jai Parvati Mata)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

स्रोत: पारंपरिक पार्वती माता आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

माँ पार्वती आदिशक्ति व भगवान शिव की अर्द्धांगिनी हैं, जिन्हें गौरी, उमा व जगज्जननी कहा जाता है। यह आरती सोमवार, मंगलवार, नवरात्रि व हरतालिका तीज पर गाई जाती है, जिससे सौभाग्य, दाम्पत्य-सुख व मनोकामना-पूर्ति होती है।

आरती (लिरिक्स)

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जय पार्वती माता, मैया जय पार्वती माता। ब्रह्मा सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥

हे पार्वती माता, आपकी जय हो! आप सनातन देवी तथा शुभ फल प्रदान करने वाली हैं।

अरिकुल-पद्म-विनाशिनि, जय सेवक त्राता। जग-जीवन-जग-जननी, हर-अर्द्धांगी माता॥

शत्रुओं के समूह का नाश करने वाली, सेवकों की रक्षिका; आप जगत की जीवनदायिनी जननी तथा शिव (हर) की अर्द्धांगिनी हैं।

गौरी उमा शिवानी, नाम अनेक धरे। हिमगिरि की तुम बेटी, शिव संग शोभा भरे॥

आप गौरी, उमा, शिवानी आदि अनेक नाम धारण करती हैं; आप हिमालय की पुत्री हैं और शिव के संग शोभा बढ़ाती हैं।

सुहाग-सौभाग्य देती, व्रत से तुम रीझो। भक्तन के दुख हरती, मनोरथ सब सीझो॥

आप सुहाग व सौभाग्य देती हैं तथा व्रत से प्रसन्न होती हैं; आप भक्तों के दुःख हरती हैं और उनके सब मनोरथ पूर्ण करती हैं।

पार्वती माँ की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। सुख-सौभाग्य बढ़ावे, मनवांछित फल पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से पार्वती माँ की यह आरती गाता है, उसका सुख-सौभाग्य बढ़ता है और वह मनोवांछित फल पाता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे पार्वती माता, आपकी जय हो! आप सनातन देवी तथा शुभ फल प्रदान करने वाली हैं।
  2. शत्रुओं के समूह का नाश करने वाली, सेवकों की रक्षिका; आप जगत की जीवनदायिनी जननी तथा शिव (हर) की अर्द्धांगिनी हैं।
  3. आप गौरी, उमा, शिवानी आदि अनेक नाम धारण करती हैं; आप हिमालय की पुत्री हैं और शिव के संग शोभा बढ़ाती हैं।
  4. आप सुहाग व सौभाग्य देती हैं तथा व्रत से प्रसन्न होती हैं; आप भक्तों के दुःख हरती हैं और उनके सब मनोरथ पूर्ण करती हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से पार्वती माँ की यह आरती गाता है, उसका सुख-सौभाग्य बढ़ता है और वह मनोवांछित फल पाता है।

लाभ

  • सौभाग्य, दाम्पत्य-सुख व सुहाग की रक्षा होती है।
  • मनोकामना पूर्ण होकर घर में सुख-शांति आती है।
  • भक्ति, धैर्य व आध्यात्मिक उन्नति बढ़ती है।

कब करें पाठ

सोमवार व मंगलवार कोनवरात्रि मेंहरतालिका तीज व गणगौर पर

पाठ विधि

माँ पार्वती (गौरी) के समक्ष लाल/पीले पुष्प, सिंदूर व सुहाग-सामग्री अर्पित करें, दीप जलाकर आरती गाएँ। हरतालिका तीज, गणगौर व नवरात्रि पर इसका विशेष महत्व है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

माँ दुर्गा

Goddess Durga

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

देवता वर्गशक्ति · रक्षा · विजय · साहस
वाहनसिंह
मुख्य मंत्रॐ दुं दुर्गायै नमः
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श्री पार्वती माता आरती — सामान्य प्रश्न

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