श्री पार्वती माता आरती

śrī pārvatī mātā āratī

Parvati Mata Aarti (Jai Parvati Mata)

समय
4 मिनट
श्लोक/चौपाई
8
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
हरतालिका तीज; गणगौर; सोमवार; नवरात्रि
उद्देश्य:सौभाग्य (Marital happiness)मन की शांति (Peace)भक्ति (Devotion)
✓ संपूर्ण

"जय पार्वती माता, जय पार्वती माता" माता पार्वती की परंपरागत आरती है। इसके आठ पद पार्वती के दोनों जन्म गाते हैं — सतयुग में सती, और फिर हिमालय (हेमांचल) के घर जन्मी पार्वती — और साथ में उनका शिव-संग और शुम्भ-निशुम्भ का वध। पहला ही पद उन्हें "ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता" कहता है।

परिचय

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

स्रोत: "जय पार्वती माता" — परंपरागत आरती

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री पार्वती माता आरती
IASTśrī pārvatī mātā āratī
देवतामाँ दुर्गा
मूल स्रोत"जय पार्वती माता" — परंपरागत आरती
शुभ दिनहरतालिका तीज; गणगौर; सोमवार; नवरात्रि
पाठ समय4 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

यह आरती पार्वती को एक साथ तीन रूपों में देखती है — सनातन शक्ति, शिव की अर्धांगिनी, और असुरों का संहार करने वाली देवी।

सनातन शक्ति (पद 1–2). "ब्रह्म सनातन देवी" — वे सनातन ब्रह्म-स्वरूपा हैं, शुभ फल देती हैं, शत्रुओं का नाश करती हैं और सेवकों की रक्षा करती हैं; हरि और हर (विष्णु और शिव) उनके गुण गाते हैं।

दो जन्म (पद 4). "सतयुग रूपशील अतिसुन्दर, नाम सती कहलाता; हेमांचल घर जन्मी, सखियन संग राता" — सतयुग में वे सती कहलाईं, और फिर हिमालय के घर जन्म लेकर सखियों के संग खेलीं। एक ही पद में सती और पार्वती — दोनों जन्म।

युद्ध (पद 5). शुम्भ-निशुम्भ को चीरने वाली, हज़ार भुजाओं वाला रूप धरकर हाथ में चक्र लेने वाली।

शिव-संग (पद 6). "सृष्टि रूप तुही है जननी, शिवसंग रंगराता" — सृष्टि-स्वरूपा माँ शिव के संग रंगी हुई हैं; नंदी और भृंगी वीणा लिए हैं और सारा जगत आनंद में मग्न है।

आरती (लिरिक्स)

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जय पार्वती माता, जय पार्वती माता। ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥

हे पार्वती माता, आपकी जय हो, जय हो! आप सनातन ब्रह्म-स्वरूपा देवी हैं और शुभ फल देने वाली हैं।

अरिकुल पद्म विनाशिनि, जय सेवक त्राता। जग जीवन जगदम्बा, हरिहर गुण गाता॥

आप शत्रुओं के कुल का नाश करने वाली और सेवकों की रक्षा करने वाली हैं, आपकी जय हो; आप जगत का जीवन हैं, जगदम्बा हैं — हरि और हर आपके गुण गाते हैं।

सिंह को वाहन साजे, कुण्डल हैं साथा। देव वधू जस गावत, नृत्य करत ताथा॥

सिंह आपके वाहन के रूप में सजा है, कानों में कुंडल हैं; देवताओं की पत्नियाँ आपका यश गाती हैं और ताल पर नृत्य करती हैं।

सतयुग रूपशील अतिसुन्दर, नाम सती कहलाता। हेमांचल घर जन्मी, सखियन संग राता॥

सतयुग में आप रूप और शील से अत्यंत सुंदर थीं, और आपका नाम सती कहलाया; (फिर) आपने हेमांचल (हिमालय) के घर जन्म लिया और सखियों के संग खेलीं।

शुम्भ निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्थाता। सहस्र भुजा तनु धरि के, चक्र लियो हाथा॥

आपने शुम्भ और निशुम्भ को चीर डाला, आप हिमालय पर निवास करती हैं; हज़ार भुजाओं वाला शरीर धारण करके आपने हाथ में चक्र लिया।

सृष्टि रूप तुही है जननी शिवसंग रंगराता। नन्दी भृंगी बीन लही सारा जग मदमाता॥

हे जननी, सृष्टि का रूप आप ही हैं, और आप शिव के संग (प्रेम के) रंग में रंगी हैं; नंदी और भृंगी ने वीणा ली है, और सारा जगत आनंद में मग्न है।

देवन अरज करत हम चित को लाता। गावत दे दे ताली, मन में रंगराता॥

देवता विनती करते हैं, और हम अपना चित्त (आपमें) लगाते हैं; ताली दे-देकर गाते हैं, और मन आपके रंग में रँग जाता है।

श्री प्रताप आरती मैया की, जो कोई गाता। सदासुखी नित रहता सुख सम्पत्ति पाता॥

मैया की यह प्रतापमयी आरती जो कोई गाता है, वह सदा सुखी रहता है और सुख-संपत्ति पाता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे पार्वती माता, आपकी जय हो, जय हो! आप सनातन ब्रह्म-स्वरूपा देवी हैं और शुभ फल देने वाली हैं।
  2. आप शत्रुओं के कुल का नाश करने वाली और सेवकों की रक्षा करने वाली हैं, आपकी जय हो; आप जगत का जीवन हैं, जगदम्बा हैं — हरि और हर आपके गुण गाते हैं।
  3. सिंह आपके वाहन के रूप में सजा है, कानों में कुंडल हैं; देवताओं की पत्नियाँ आपका यश गाती हैं और ताल पर नृत्य करती हैं।
  4. सतयुग में आप रूप और शील से अत्यंत सुंदर थीं, और आपका नाम सती कहलाया; (फिर) आपने हेमांचल (हिमालय) के घर जन्म लिया और सखियों के संग खेलीं।
  5. आपने शुम्भ और निशुम्भ को चीर डाला, आप हिमालय पर निवास करती हैं; हज़ार भुजाओं वाला शरीर धारण करके आपने हाथ में चक्र लिया।
  6. हे जननी, सृष्टि का रूप आप ही हैं, और आप शिव के संग (प्रेम के) रंग में रंगी हैं; नंदी और भृंगी ने वीणा ली है, और सारा जगत आनंद में मग्न है।
  7. देवता विनती करते हैं, और हम अपना चित्त (आपमें) लगाते हैं; ताली दे-देकर गाते हैं, और मन आपके रंग में रँग जाता है।
  8. मैया की यह प्रतापमयी आरती जो कोई गाता है, वह सदा सुखी रहता है और सुख-संपत्ति पाता है।

लाभ

  • सौभाग्य और गृहस्थ-सुख की कामना — पार्वती शिव की अर्धांगिनी के रूप में पूजी जाती हैं (पद 6)।
  • शत्रु और संकट से रक्षा — "अरिकुल पद्म विनाशिनि, जय सेवक त्राता"।
  • फलश्रुति: आरती गाने वाला सदा सुखी रहता है और सुख-संपत्ति पाता है।

कब करें पाठ

हरतालिका तीज और गणगौर परसोमवार को शिव-पार्वती पूजन मेंनवरात्रि में

पाठ विधि

शिव-पार्वती के चित्र के समक्ष घी का दीपक जलाएँ, सुहाग की सामग्री (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी) और लाल पुष्प अर्पित करें। टेक "जय पार्वती माता" हर पद के बाद दोहराएँ; पद 7 के अनुसार ताली देते हुए गाया जाता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराdrikpanchang.com — श्री पार्वती माता की आरती (आधार-पाठ) · bhaktitak.com — श्री पार्वती जी की आरती · aartisandhya.com — पार्वती माता की आरती
रचयिताअज्ञात (किसी प्रति में नाम नहीं)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

माँ दुर्गा

Goddess Durga

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

देवता वर्गशक्ति · रक्षा · विजय · साहस
वाहनसिंह
मुख्य मंत्रॐ दुं दुर्गायै नमः
सभी पाठ देखें

श्री पार्वती माता आरती — सामान्य प्रश्न

संबंधित पर्व व व्रत

माँ दुर्गा भक्ति संग्रह

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