श्री अन्नपूर्णा माता आरती

śrī annapūrṇā mātā āratī

Annapurna Mata Aarti (Barambar Pranam)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
6
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
अन्नपूर्णा जयंती; शुक्रवार; रसोई-पूजन
उद्देश्य:अन्न-धन की समृद्धि (Plenty)शांति (Peace)शरणागति (Surrender)
✓ संपूर्ण

अन्नपूर्णा माता की प्रचलित आरती की टेक है — "बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम"। टेक के बाद इसके पाँच पद हैं, और पहला ही पद इसका भाव कह देता है: "जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके, कहां उसे विश्राम" — जो माँ का ध्यान नहीं करता, उसे विश्राम कहाँ। अंतिम पद देवी के बीज-मंत्रों (श्रीं, ह्रीं, ऐं, क्लीं) को गूँथता है।

परिचय

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

स्रोत: "बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम" — परंपरागत आरती

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री अन्नपूर्णा माता आरती
IASTśrī annapūrṇā mātā āratī
देवतामाँ दुर्गा
मूल स्रोत"बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम" — परंपरागत आरती
शुभ दिनअन्नपूर्णा जयंती; शुक्रवार; रसोई-पूजन
पाठ समय3 मिनट
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

अन्नपूर्णा अन्न की देवी हैं — पार्वती का वह रूप, जिनके भंडार से संसार का पेट भरता है। पर यह आरती अन्न से अधिक उनकी सर्वव्यापकता गाती है।

नाम की महिमा (पद 1–2). अन्नपूर्णा का नाम लेते ही सब काम होते हैं, और प्रलय, युगांतर और जन्मांतर तक वही नाम रहता है; "सुर सुरों की रचना करती, कहाँ कृष्ण कहाँ राम" — देवताओं की रचना भी वही करती हैं; उनके आगे कृष्ण और राम भी (उन्हीं की रचना) हैं।

त्रिदेव की सेवा (पद 3). "चूमहि चरण चतुर चतुरानन, चारु चक्रधर श्याम; चन्द्रचूड़ चन्द्रानन चाकर" — चतुर्मुख ब्रह्मा उनके चरण चूमते हैं, चक्रधारी श्याम (विष्णु) और चंद्रचूड़ (शिव) उनके सेवक हैं। पूरा पद "च" की आवृत्ति पर बना है।

शरण (पद 4). देवी-देवता भी दयनीय दशा में उन्हीं को पुकारते हैं — "त्राहि-त्राहि" — क्योंकि वे शरणागत-वत्सल हैं।

बीज-मंत्र (पद 5). "श्रीं, ह्रीं, श्रद्धा, श्रीं ऐं विद्या, श्रीं क्लीं कमल काम" — आरती देवी के बीज-अक्षरों को श्रद्धा, विद्या, कमला (लक्ष्मी) और काम से जोड़ती है।

आरती (लिरिक्स)

PDF डाउनलोड

बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम॥

(टेक) हे मैया, आपको बार-बार प्रणाम, बार-बार प्रणाम।

जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके, कहां उसे विश्राम। अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारे, लेते होत सब काम॥

हे अम्बिके, जो आपका ध्यान नहीं करता, उसे विश्राम कहाँ? हे अन्नपूर्णा देवी, आपका नाम लेते ही सब काम हो जाते हैं।

प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर, कालान्तर तक नाम। सुर सुरों की रचना करती, कहाँ कृष्ण कहाँ राम॥

प्रलय, युगों के अंतर, जन्मों के अंतर और कालों के अंतर तक आपका नाम बना रहता है; आप देवताओं की भी रचना करती हैं — (आपके आगे) कहाँ कृष्ण, कहाँ राम!

चूमहि चरण चतुर चतुरानन, चारु चक्रधरश्याम। चन्द्र चूड़ चन्द्रानन चाकर, शोभा लखहि ललाम॥

चतुर चतुर्मुख (ब्रह्मा) आपके चरण चूमते हैं, सुंदर चक्रधारी श्याम (विष्णु) और चंद्रमा को मस्तक पर धारण करने वाले (शिव) आपके सेवक हैं — वे आपकी मनोहर शोभा निहारते हैं।

देवी देव दयनीय दशा में, दया दया तव नाम। त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल, शरण रूप तव धाम॥

दयनीय दशा में देवी-देवता भी "दया-दया" कहकर आपका नाम पुकारते हैं; हे शरणागतों पर स्नेह रखने वाली, हमारी रक्षा कीजिए, रक्षा कीजिए — आपका धाम ही शरण है।

श्रीं, ह्रीं, श्रद्धा, श्रीं ऐं विद्या, श्रीं क्लीं कमल काम। कान्तिभ्रांतिमयी कांति शांतिमयी वर देतु निष्काम॥

श्रीं-ह्रीं (बीज) में आप श्रद्धा हैं, श्रीं-ऐं में विद्या, श्रीं-क्लीं में कमला और काम; आप कांति और माया से भरी, कांति और शांति से भरी हैं, और निष्काम भाव से वर देती हैं।

लिपि बदलने के लिए ऊपर देवनागरी / IAST / Roman चुनें।

अर्थ (हिन्दी)

  1. (टेक) हे मैया, आपको बार-बार प्रणाम, बार-बार प्रणाम।
  2. हे अम्बिके, जो आपका ध्यान नहीं करता, उसे विश्राम कहाँ? हे अन्नपूर्णा देवी, आपका नाम लेते ही सब काम हो जाते हैं।
  3. प्रलय, युगों के अंतर, जन्मों के अंतर और कालों के अंतर तक आपका नाम बना रहता है; आप देवताओं की भी रचना करती हैं — (आपके आगे) कहाँ कृष्ण, कहाँ राम!
  4. चतुर चतुर्मुख (ब्रह्मा) आपके चरण चूमते हैं, सुंदर चक्रधारी श्याम (विष्णु) और चंद्रमा को मस्तक पर धारण करने वाले (शिव) आपके सेवक हैं — वे आपकी मनोहर शोभा निहारते हैं।
  5. दयनीय दशा में देवी-देवता भी "दया-दया" कहकर आपका नाम पुकारते हैं; हे शरणागतों पर स्नेह रखने वाली, हमारी रक्षा कीजिए, रक्षा कीजिए — आपका धाम ही शरण है।
  6. श्रीं-ह्रीं (बीज) में आप श्रद्धा हैं, श्रीं-ऐं में विद्या, श्रीं-क्लीं में कमला और काम; आप कांति और माया से भरी, कांति और शांति से भरी हैं, और निष्काम भाव से वर देती हैं।

लाभ

  • अन्न और घर की समृद्धि की कामना — अन्नपूर्णा अन्न की अधिष्ठात्री देवी हैं।
  • मन के विश्राम का भाव — "जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके, कहां उसे विश्राम"।
  • संकट में शरण — "त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल, शरण रूप तव धाम"।

कब करें पाठ

अन्नपूर्णा जयंती परशुक्रवार कोरसोई में नए अन्न के पूजन पर

पाठ विधि

अन्नपूर्णा माता के चित्र के समक्ष दीपक जलाएँ और अन्न (चावल) व खीर का भोग रखें। टेक "बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम" आरंभ में और हर पद के बाद गाएँ।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराdrikpanchang.com — श्री अन्नपूर्णा माता जी की आरती (आधार-पाठ) · hindunidhi.com — अन्नपूर्णा आरती · bhaktvatsal.com — आरती अन्नपूर्णा माता जी की
रचयिताअज्ञात (किसी प्रति में नाम नहीं)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

माँ दुर्गा

Goddess Durga

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

देवता वर्गशक्ति · रक्षा · विजय · साहस
वाहनसिंह
मुख्य मंत्रॐ दुं दुर्गायै नमः
सभी पाठ देखें

श्री अन्नपूर्णा माता आरती — सामान्य प्रश्न

माँ दुर्गा भक्ति संग्रह

आरती, चालीसा, मंत्र, स्तोत्र, अष्टकम, सहस्रनाम और अन्य भक्ति पाठ