श्री अन्नपूर्णा माता आरती
śrī annapūrṇā mātā āratī
Annapurna Mata Aarti
परिचय
माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।
स्रोत: पारंपरिक अन्नपूर्णा माता आरती
उद्भव / पृष्ठभूमि
माँ अन्नपूर्णा देवी पार्वती का अन्न-दात्री स्वरूप हैं, जो समस्त जगत को भोजन व पोषण प्रदान करती हैं। यह आरती अन्नपूर्णा पूजन व रसोई-पूजा में गाई जाती है, जिससे घर में अन्न, धन व समृद्धि की कमी नहीं रहती।
आरती (लिरिक्स)
जय अन्नपूर्णा माता, मैया जय अन्नपूर्णा माता। जगत-पालिनी जननी, तू सबकी सुखदाता॥
हे अन्नपूर्णा माता, आपकी जय हो! आप जगत का पालन करने वाली जननी तथा सबको सुख देने वाली हैं।
कर में कनक कमण्डलु, कर में अन्न-थाली। भूखे को अन्न देती, तू दीनन-प्रतिपाली॥
एक हाथ में स्वर्ण-कमण्डलु व दूसरे हाथ में अन्न की थाली धारण किए; भूखों को अन्न देती हैं और दीनों का पालन करती हैं।
काशी पुरी विराजत, शिव संग शोभा पाती। भिक्षा शिव को देती, जग की क्षुधा मिटाती॥
आप काशी पुरी में शिव के संग सुशोभित होती हैं; स्वयं शिव को भिक्षा देती हैं और समस्त जगत की भूख मिटाती हैं।
धन-धान्य भर देती, घर-घर खुशहाली। शरण पड़े की रक्षा, करती हो महतारी॥
आप घर-घर को धन-धान्य व खुशहाली से भर देती हैं; हे माता, आप शरण में आए हुए जनों की रक्षा करती हैं।
अन्नपूर्णा माँ की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। अन्न-धन सुख-सम्पति, घर में सदा रहावे॥
जो भक्त श्रद्धा से अन्नपूर्णा माँ की यह आरती गाता है, उसके घर में अन्न, धन व सुख-सम्पत्ति सदा बनी रहती है।
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अर्थ (हिन्दी)
- हे अन्नपूर्णा माता, आपकी जय हो! आप जगत का पालन करने वाली जननी तथा सबको सुख देने वाली हैं।
- एक हाथ में स्वर्ण-कमण्डलु व दूसरे हाथ में अन्न की थाली धारण किए; भूखों को अन्न देती हैं और दीनों का पालन करती हैं।
- आप काशी पुरी में शिव के संग सुशोभित होती हैं; स्वयं शिव को भिक्षा देती हैं और समस्त जगत की भूख मिटाती हैं।
- आप घर-घर को धन-धान्य व खुशहाली से भर देती हैं; हे माता, आप शरण में आए हुए जनों की रक्षा करती हैं।
- जो भक्त श्रद्धा से अन्नपूर्णा माँ की यह आरती गाता है, उसके घर में अन्न, धन व सुख-सम्पत्ति सदा बनी रहती है।
लाभ
- घर में अन्न, धन व समृद्धि की कमी नहीं रहती।
- रसोई व भोजन में बरकत बनी रहती है।
- परिवार में सुख-शांति व संतोष आता है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
माँ अन्नपूर्णा के समक्ष पका हुआ अन्न (भोग) अर्पित करें, दीप जलाकर आरती गाएँ। रसोई में स्वच्छता व श्रद्धा रखते हुए तथा अन्न का अनादर न करते हुए पूजन करें।
प्रामाणिकता व स्रोत
देव परिचय
माँ दुर्गा
Goddess Durga
माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।
