समय
5–6 मिनट
श्लोक/चौपाई
13
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
नवरात्रि; शुक्रवार; अष्टमी
उद्देश्य:रक्षा (Protection)विजय (Victory)मनोकामना (Wish fulfilment)
✓ संपूर्ण
"जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी" माँ दुर्गा की सबसे प्रसिद्ध आरतियों में से है। इसके बारह पद पहले देवी का शृंगार गाते हैं, फिर दुर्गा सप्तशती के युद्ध — शुम्भ-निशुम्भ, महिषासुर, धूम्रलोचन, चण्ड-मुण्ड, रक्तबीज और मधु-कैटभ — और अंत में फलश्रुति: "कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै"।
FAQ
श्री दुर्गा आरती — सामान्य प्रश्न
बारह पद और एक फलश्रुति ("श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै")। द्रिक पंचांग और भक्तिभारत दोनों में ये सब पद हैं।
पद 6 और 7 में — शुम्भ, निशुम्भ, महिषासुर, धूम्रलोचन, चण्ड, मुण्ड, रक्तबीज ("शोणित बीज") और मधु-कैटभ। ये सब दुर्गा सप्तशती के युद्ध हैं: मधु-कैटभ पहले अध्याय में, महिषासुर दूसरे-तीसरे में, धूम्रलोचन छठे में, चण्ड-मुण्ड सातवें में, रक्तबीज आठवें में, और निशुम्भ-शुम्भ नौवें-दसवें में।
फलश्रुति में छाप है — "कहत शिवानन्द स्वामी"। यही छाप "ॐ जय शिव ओंकारा" आरती की फलश्रुति में भी है। इसके अलावा रचयिता के बारे में किसी प्रकाशित प्रति में जानकारी नहीं।
नवरात्रि के नौ दिन प्रातः और संध्या, दुर्गा सप्तशती के पाठ के बाद, और शुक्रवार व अष्टमी को। माता की चौकी और जागरण में भी यही आरती गाई जाती है।
दो प्रकाशित प्रतियों से — द्रिक पंचांग (आधार) और भक्तिभारत। बारहों पद और फलश्रुति दोनों में हैं; आधार की दो टंकण-भूलें ("उज्जवल", "ब्रहमाणी") भक्तिभारत के शुद्ध रूप से सुधारी गईं।
पर्व
