नवरात्रि

Navratri · नवदुर्गा

माँ दुर्गा के नौ रूपों की नौ रातें — हर दिन की देवी, घटस्थापना और संधि पूजा का मुहूर्त।

परिचय

नवरात्रि का अर्थ है नौ रातें। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है। पहले दिन शैलपुत्री, और नौवें दिन सिद्धिदात्री। साल में चार नवरात्रि आती हैं, पर घर-घर में चैत्र और शारदीय मनाई जाती हैं। पहले दिन आप कलश स्थापित करते हैं, फिर हर दिन एक देवी की आराधना होती है।

संस्कृत में "नव" का अर्थ है नौ, और "रात्रि" का अर्थ है रात। तो नवरात्रि यानी नौ रातों का पर्व।

इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा क्रम से होती है। इन्हें मिलाकर नवदुर्गा कहा जाता है। हर दिन एक रूप का होता है, और उस दिन आप उसी देवी का ध्यान करते हैं।

शारदीय नवरात्रि का संबंध माँ दुर्गा और महिषासुर के युद्ध से जोड़ा जाता है। इसकी कथा देवी माहात्म्य में है, जिसे हम दुर्गा सप्तशती के नाम से जानते हैं। भाव एक ही है — अच्छाई की जीत।

चैत्र नवरात्रि 2027 — नौ दिन और मुहूर्त

7 अप्रैल 2027 से 15 अप्रैल 2027 तक · समय नई दिल्ली के अनुसार

घटस्थापना मुहूर्त

06:05 से 07:25 तक
7 अप्रैल 2027, बुधवार
अभिजित मुहूर्त: वर्जित (बुधवार)

संधि पूजा

15:00 से 15:48 तक
14 अप्रैल 2027
अष्टमी 15:24 पर पूरी होकर नवमी शुरू होती है।
पारण: 15 अप्रैल 2027 को 13:21 के बाद, जब नवमी पूरी हो जाए।
दिनदिनांकवारदेवी
17 अप्रैलबुधवारशैलपुत्री
28 अप्रैलबृहस्पतिवारब्रह्मचारिणी
39 अप्रैलशुक्रवारचंद्रघंटा
410 अप्रैलशनिवारकूष्मांडा
511 अप्रैलरविवारस्कंदमाता
612 अप्रैलसोमवारकात्यायनी
713 अप्रैलमंगलवारकालरात्रि
814 अप्रैलबुधवारमहागौरी · दुर्गा अष्टमी
915 अप्रैलबृहस्पतिवारसिद्धिदात्री · राम नवमी

नौ दिन, नौ रंग (आधुनिक प्रथा)

दिन 1: रॉयल ब्लू
7 अप्रैल, बुधवार
दिन 2: पीला
8 अप्रैल, बृहस्पतिवार
दिन 3: हरा
9 अप्रैल, शुक्रवार
दिन 4: स्लेटी
10 अप्रैल, शनिवार
दिन 5: नारंगी
11 अप्रैल, रविवार
दिन 6: सफ़ेद
12 अप्रैल, सोमवार
दिन 7: लाल
13 अप्रैल, मंगलवार
दिन 8: आसमानी
14 अप्रैल, बुधवार
दिन 9: गुलाबी
15 अप्रैल, बृहस्पतिवार

तिथियाँ और समय पंचांग से गणना किए गए हैं, नई दिल्ली के लिए। दूसरे शहरों में समय बदलता है, और अलग-अलग पंचांगों में एक-दो मिनट का अंतर मिल सकता है। रंग आधुनिक प्रथा हैं, शास्त्र नहीं — घटस्थापना से गिने नौ दिनों के: पहले सात दिनों के रंग वार से तय होते हैं, आठवें-नौवें दिन के रंग उस वार से, जिस दिन नवरात्रि शुरू हुई (द्रिक पंचांग का नियम)।

साल में चार नवरात्रि

आपने शायद दो ही नवरात्रि सुनी हों, पर साल में नवरात्रि चार बार आती है। चैत्र में (मार्च–अप्रैल), आषाढ़ में (जून–जुलाई), आश्विन में (सितंबर–अक्टूबर), और माघ में (जनवरी–फ़रवरी)।

इनमें आषाढ़ और माघ वाली गुप्त नवरात्रि कहलाती हैं। घर-घर में जो दो मनाई जाती हैं, वे हैं चैत्र की वासंतिक और आश्विन की शारदीय नवरात्रि।

इन चारों में शारदीय नवरात्रि सबसे अधिक मनाई जाती है। इसके अगले दिन विजयादशमी आती है। चैत्र नवरात्रि का नौवाँ दिन राम नवमी होता है।

नौ देवियाँ, पर दिन कभी आठ, कभी दस

हर देवी की पूजा तिथि से होती है, अंग्रेज़ी तारीख़ से नहीं। पहली तिथि प्रतिपदा को शैलपुत्री, दूसरी को ब्रह्मचारिणी — ऐसे ही नवमी तक।

तिथियों की लंबाई बराबर नहीं होती। कभी कोई तिथि इतनी छोटी पड़ती है कि दो देवियों की पूजा एक ही दिन आ जाती है। कभी कोई तिथि दो सूर्योदय तक रहती है, तो एक दिन बिना नई पूजा के निकल जाता है।

इसलिए अगर आपको नीचे की तालिका में दो देवियाँ एक ही तारीख़ पर दिखें, तो घबराइए मत। यह चूक नहीं, सही गणना है।

घटस्थापना — कलश कब स्थापित करें

नवरात्रि पहले दिन कलश स्थापना से शुरू होती है। इसे घटस्थापना कहते हैं — नौ दिनों के लिए देवी का आवाहन।

इसका सबसे अच्छा समय प्रतिपदा तिथि में दिन का पहला एक-तिहाई भाग माना गया है। हो सके तो आप इसे मध्याह्न से पहले कर लीजिए। वह समय न मिले, तो अभिजित मुहूर्त में भी किया जा सकता है।

अमावस्या में और रात में घटस्थापना नहीं की जाती। चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग को टालने की सलाह है, पर ये वर्जित नहीं हैं — इन्हें लेकर चिंता न कीजिए।

संधि पूजा — अष्टमी और नवमी का मिलन

जिस क्षण अष्टमी तिथि ख़त्म होती है और नवमी शुरू होती है, उसे संधि काल कहते हैं। अष्टमी के आख़िरी 24 मिनट और नवमी के पहले 24 मिनट — कुल लगभग 48 मिनट।

परंपरा में इसे पूरी दुर्गा पूजा का सबसे पवित्र समय माना गया है। मान्यता है कि इसी समय देवी चामुंडा प्रकट हुईं और चंड-मुंड का अंत किया।

यह समय हर साल अलग होता है, कभी सुबह, कभी दोपहर। इसलिए आप इसे पंचांग से ही देखिए — नीचे इस वर्ष का समय दिया है।

नौ रंग — एक आधुनिक प्रथा

आजकल नवरात्रि में हर दिन एक रंग पहनने का चलन है। यह प्रथा प्यारी है, पर शास्त्र से नहीं आई। माना जाता है कि यह 2003 में शुरू हुई। तब मुंबई के समाचार-पत्र महाराष्ट्र टाइम्स ने इसका अभियान चलाया था।

पहले सात दिनों का रंग वार से तय होता है — रविवार नारंगी, सोमवार सफ़ेद, मंगलवार लाल, बुधवार रॉयल ब्लू, गुरुवार पीला, शुक्रवार हरा और शनिवार स्लेटी।

आठवें और नौवें दिन के रंग उस वार से तय होते हैं जिस दिन नवरात्रि शुरू हुई — द्रिक पंचांग यही नियम बताता है, और पिछले वर्षों में अख़बारों की घोषित सूचियाँ इसी से मेल खाती हैं। जैसे रविवार से शुरू हो तो आठवें दिन बैंगनी और नौवें दिन मोरपंखी हरा। आप पहनिए ज़रूर, पर पूजा का भाव रंग से बड़ा है।

देश भर में नवरात्रि

बंगाल और पूर्वोत्तर में यही पर्व दुर्गा पूजा बनकर आता है, बड़े-बड़े पंडालों के साथ। गुजरात में आरती और गरबा की रातें होती हैं।

दक्षिण भारत में घरों में गोलू सजाया जाता है — सीढ़ियों पर देवी-देवताओं की मूर्तियाँ क्रम से रखी जाती हैं। आप कहीं भी हों, रूप अलग हैं पर आराधना एक ही शक्ति की है।

नवरात्रि में क्या करें, क्या ध्यान रखें

क्या करें

  • पहले दिन शुभ समय में कलश स्थापित कीजिए।
  • हर दिन उस दिन की देवी का ध्यान और अपनी श्रद्धा से मंत्र-जप कीजिए।
  • अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन कीजिए।
  • हो सके तो दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ कीजिए।

ध्यान रखें

  • घटस्थापना अमावस्या में या रात में नहीं की जाती।
  • आपसे पहले तिहाई का समय निकल जाए, तो अभिजित मुहूर्त देखिए — जल्दबाज़ी न कीजिए।
  • चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग टल सकें तो टालें; न टलें तो घबराइए मत।

विस्तार से जानें

नवरात्रि के पाठ

अन्य वर्ष

स्रोत

  • en.wikipedia.org/wiki/Navaratri — "नौ रातें" का अर्थ; चार नवरात्रि व उनके मास; शारदीय सबसे अधिक मनाई जाती; महिषासुर व देवी माहात्म्य; दुर्गा पूजा, गरबा, गोलू
  • drikpanchang.com/navratri/info/navratri.html — नौ दिनों में दुर्गा के नौ रूप; चार नवरात्रि (दो गुप्त); शारदीय सबसे महत्वपूर्ण
  • drikpanchang.com/navratri/info/ghatasthapana-puja-vidhi.html — घटस्थापना: प्रतिपदा में दिन का पहला तिहाई, मध्याह्न से पहले, अभिजित विकल्प, अमावस्या व रात्रि निषिद्ध, चित्रा व वैधृति टालें पर निषिद्ध नहीं
  • drikpanchang.com — संधि पूजा: अष्टमी के अंतिम व नवमी के प्रथम 24 मिनट, चामुंडा का प्राकट्य; प्रति-वर्ष घटस्थापना व संधि पूजा मुहूर्त (नई दिल्ली), जिनके विरुद्ध इस साइट का गणना-इंजन जाँचा गया है
  • देवी भागवत पुराण, स्कंध 3, अध्याय 26 (wisdomlib.org, अंग्रेज़ी अनुवाद) — कुमारी पूजन: दो से दस वर्ष, हर आयु का नाम
  • The Quint, Curly Tales — नौ रंगों की प्रथा का आरंभ, महाराष्ट्र टाइम्स (2003)

संक्षिप्त विवरण

नवरात्रिचैत्र नवरात्रि 2027
घटस्थापना7 अप्रैल 2027
दुर्गा अष्टमी14 अप्रैल 2027
राम नवमी15 अप्रैल 2027
पक्षशुक्ल पक्ष, प्रतिपदा से नवमी
आराध्यमाँ दुर्गा के नौ रूप

नवरात्रि — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न