माँ शैलपुत्री

Shailputri · नवरात्रि का पहला दिन

पर्वतराज हिमालय की पुत्री — नवदुर्गा का पहला रूप, नवरात्रि के पहले दिन की देवी।

संक्षेप में

माँ शैलपुत्री नवदुर्गा का पहला रूप हैं, और नवरात्रि के पहले दिन इन्हीं की पूजा होती है। "शैल" का अर्थ है पर्वत — ये पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। वृषभ इनका वाहन है, दाएँ हाथ में त्रिशूल और बाएँ में कमल है। पिछले जन्म में यही सती थीं।

इस बार माँ की पूजा कब है

  • चैत्र नवरात्रि 2027: 7 अप्रैल 2027, बुधवार — उस दिन का रंग रॉयल ब्लू (आधुनिक प्रथा)
  • शारदीय नवरात्रि 2027: 30 सितंबर 2027, बृहस्पतिवार — उस दिन का रंग पीला (आधुनिक प्रथा)

पूजा तिथि से होती है, इसलिए कभी दो देवियों की पूजा एक ही दिन पड़ती है। तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय से गणना की गई हैं। पूरी तालिका देखें

स्वरूप

वाहनवृषभ (बैल) — इसीलिए इन्हें वृषारूढ़ा भी कहते हैं
भुजाएँदो
हाथों मेंदाएँ हाथ में त्रिशूल, बाएँ हाथ में कमल
मस्तक परअर्धचंद्र
अन्य नामहेमवती, पार्वती
प्रिय फूलचमेली

माँ शैलपुत्री की कथा

इनकी कथा पिछले जन्म से शुरू होती है। तब देवी सती थीं — प्रजापति दक्ष की सबसे छोटी पुत्री।

सती ने कठोर तप करके भगवान शिव को पति रूप में पाया। पर दक्ष इस विवाह से प्रसन्न नहीं थे। उन्हें राजसी ठाठ प्रिय था, और शिव कैलास पर रहने वाले, बाघंबर पहनने वाले तपस्वी थे।

एक बार ब्रह्मा जी की सभा में सब देवता दक्ष के आने पर खड़े हुए, पर शिव बैठे रहे। दक्ष ने इसे अपना अपमान माना, और मन में बदले की ठान ली।

बिना न्योते का यज्ञ। दक्ष ने बहुत बड़ा यज्ञ रचा। सब देवताओं को बुलाया, पर शिव और सती को जान-बूझकर नहीं। सती ने जाने की इच्छा जताई, तो शिव ने समझाया — बिना बुलाए जाना ठीक नहीं। पर पिता का घर था, सती रुक नहीं सकीं।

यज्ञ में पहुँचकर सती ने देखा कि माँ के सिवा किसी ने उनका आदर नहीं किया। ऊपर से दक्ष ने भरी सभा में शिव का अपमान किया। पति का अपमान सती से सहा नहीं गया। उन्होंने योगाग्नि से अपनी देह वहीं भस्म कर दी।

शिव का क्रोध। यह समाचार सुनकर शिव ने अपनी एक जटा धरती पर पटकी, और उससे वीरभद्र व भद्रकाली प्रकट हुए। उन्होंने यज्ञ को तहस-नहस कर दिया। बाद में शिव ने दक्ष को क्षमा किया, और भागवत पुराण के अनुसार उन्हें बकरे का सिर लगाकर फिर जीवन दिया।

फिर शिव सती की देह उठाकर संसार में घूमते रहे। जहाँ-जहाँ देह के अंग गिरे, वहाँ शक्तिपीठ बने। उसके बाद शिव ध्यान में लीन हो गए।

हिमालय की पुत्री। अगले जन्म में सती पर्वतराज हिमवान के घर पुत्री बनकर आईं। "शैल" यानी पर्वत, इसलिए नाम पड़ा शैलपुत्री — इन्हें पार्वती और हैमवती भी कहते हैं। इस जन्म में भी उनका विवाह शिव से ही हुआ।

सोचिए, एक ही निष्ठा दो जन्मों तक चली। नवरात्रि की शुरुआत इसी अटल भक्ति की याद से होती है।

यह कथा कई पुराणों में है, और अंत के विवरण अलग-अलग मिलते हैं। कहीं दक्ष का सिर कटना, कहीं विष्णु का बीच में आना, कहीं ब्रह्मा द्वारा संधि। सती की देह के अंग कैसे गिरे — इस पर भी वैष्णव और शैव ग्रंथ अलग कहते हैं।

पहले दिन का महत्व

नवरात्रि का पहला दिन नींव का दिन है। इसी दिन कलश स्थापित होता है, और इसी दिन माँ शैलपुत्री की पूजा होती है।

पर्वत को स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। इस नाते पहले दिन का भाव कहा जा सकता है — मन को टिकाना, और नौ दिनों का संकल्प लेना। आप चाहें तो पहले दिन अपने लिए एक छोटा संकल्प तय कर लीजिए, जिसे नौ दिन निभा सकें।

माँ शैलपुत्री के मंत्र

प्रार्थना श्लोक

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् । वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ॥

vande vāñchitalābhāya candrārdhakṛtaśekharām | vṛṣārūḍhāṃ śūladharāṃ śailaputrīṃ yaśasvinīm ||

अर्थ: मनचाहे फल की प्राप्ति के लिए मैं यशस्विनी शैलपुत्री की वंदना करता हूँ। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र का मुकुट है, वे वृषभ पर सवार हैं और त्रिशूल धारण करती हैं।

नाम मंत्र

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

oṃ devī śailaputryai namaḥ||

यह छोटा मंत्र जप के लिए है — अर्थ है “देवी शैलपुत्री को नमस्कार”। आप इसे अपनी श्रद्धा से 11, 21 या 108 बार जप सकते हैं; संख्या से बड़ा मन का भाव है।

बीज मंत्र (प्रचलित)

ह्रीं शिवायै नमः॥

hrīṃ śivāyai namaḥ||

नवदुर्गा के बीज मंत्रों की यह सूची कई हिंदी स्रोतों में शब्दशः एक-सी मिलती है, पर इनमें से किसी ने किसी शास्त्र का हवाला नहीं दिया — इसलिए इसे “प्रचलित” कहा है। परंपरा में बीज मंत्र गुरु से लेकर जपने की बात कही जाती है; बिना दीक्षा के ऊपर दिया नाम मंत्र और प्रार्थना श्लोक सरल और पूर्ण हैं।

स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

yā devī sarvabhūteṣu mām̐ śailaputrī rūpeṇa saṃsthitā| namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ||

अर्थ: जो देवी सब प्राणियों में माँ शैलपुत्री के रूप में स्थित हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार है।

“या देवी सर्वभूतेषु” स्तुति मूल रूप से दुर्गा सप्तशती के पाँचवें अध्याय की है (“…शक्तिरूपेण संस्थिता” आदि)। नौ देवियों के नाम वाला यह रूप भक्ति-परंपरा में उसी से बना है।

माँ शैलपुत्री की पूजा विधि

नवरात्रि में पूजा का क्रम हर दिन एक ही रहता है। बदलते हैं देवी, उनका मंत्र, फूल और भोग।पहले दिन आप ऐसे पूजा कर सकते हैं:

  1. स्नान करके साफ़ कपड़े पहनिए, और कलश व पूजा-स्थान को प्रणाम कीजिए।
  2. माँ शैलपुत्री का ध्यान कीजिए और ऊपर दिया प्रार्थना श्लोक पढ़कर उनका आवाहन कीजिए।
  3. आसन के लिए फूल, फिर जल (पाद्य, अर्घ्य, आचमन) अर्पित कीजिए।
  4. स्नान के लिए जल, फिर वस्त्र के रूप में मौली, चंदन, कुमकुम और अक्षत चढ़ाइए।
  5. चमेली अर्पित कीजिए, और बिल्वपत्र भी।
  6. धूप और दीप दिखाइए।
  7. भोग में गाय का घी चढ़ाइए, साथ में फल।
  8. नाम मंत्र का जप कीजिए, फिर आरती और परिक्रमा।
  9. अंत में पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा माँग लीजिए।

यह षोडशोपचार पूजा का सरल क्रम है। समय कम हो, तो पंचोपचार भी पूरा माना गया है — दीप, धूप, फूल, गंध और नैवेद्य। घबराइए मत, भाव सच्चा हो तो छोटी पूजा भी पूरी है।

ग्रह और चक्र — मान्यता

ज्योतिषीय मान्यता में माँ शैलपुत्री का संबंध चंद्र ग्रह से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि इनकी पूजा से चंद्र से जुड़ी अशांति कम होती है।

इनके ध्यान मंत्र में इन्हें मूलाधार चक्र में स्थित बताया गया है — यानी साधना की पहली सीढ़ी, जहाँ से यात्रा शुरू होती है।

ये परंपरा और ज्योतिष की मान्यताएँ हैं, शास्त्र का नियम या भविष्यवाणी नहीं।

स्रोत

  • drikpanchang.com/hindu-goddesses/parvati/durga/navdurga-shailputri.html — सती के बाद हिमालय की पुत्री; "शैल" = पर्वत; हेमवती, पार्वती; वृषारूढ़ा; त्रिशूल व कमल; चंद्र; चमेली; ध्यान में मूलाधार
  • en.wikipedia.org/wiki/Shailaputri — दक्ष के यज्ञ में सती का आत्मदाह; हिमालय की पुत्री के रूप में पुनर्जन्म व शिव से विवाह; अर्धचंद्र, त्रिशूल, कमल, नंदी
  • en.wikipedia.org/wiki/Daksha_yajna — दक्ष का असंतोष, ब्रह्मा की सभा का प्रसंग, बिना न्योते का यज्ञ, शिव का मना करना, सती का देह-त्याग, वीरभद्र व भद्रकाली, दक्ष को बकरे का सिर (भागवत), शक्तिपीठ, हिमवान की पुत्री पार्वती; पुराणों के भेद
  • hi.wikipedia.org/wiki/शैलपुत्री — यज्ञ में माँ के सिवा सबका अनादर, योगाग्नि से देह भस्म, हिमालय की पुत्री, पार्वती व हैमवती, फिर शिव से विवाह
  • sanskritdocuments.org/doc_devii/navadurga.itx · shlokam.org/navadurga-stotram — नौ प्रार्थना श्लोकों का पाठ (दोनों से मिलान) और अंग्रेज़ी अर्थ
  • drikpanchang.com/navratri/durga-puja/puja-vidhi/durga-puja-vidhi.html · templepurohit.com (Durga Puja Vidhi) — षोडशोपचार पूजा का क्रम
  • templepurohit.com (Navadurga) — हर देवी से जुड़ा ग्रह; drikpanchang.com के देवी-पृष्ठों से मेल
  • अमर उजाला (चैत्र नवरात्रि भोग सूची) व हिंदी समाचार-स्रोत — नौ दिनों का भोग (दो सूचियों का मिलान)

माँ शैलपुत्री — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न