माँ ब्रह्मचारिणी

Brahmacharini · नवरात्रि का दूसरा दिन

तप और संयम की देवी — नवदुर्गा का दूसरा रूप, नवरात्रि के दूसरे दिन की देवी।

संक्षेप में

माँ ब्रह्मचारिणी नवदुर्गा का दूसरा रूप हैं, और नवरात्रि के दूसरे दिन इनकी पूजा होती है। यह देवी का तप करने वाला रूप है — भगवान शिव को पाने के लिए इन्होंने हज़ारों वर्ष कठोर तप किया। ये नंगे पाँव चलती हैं, दाएँ हाथ में जपमाला और बाएँ में कमंडल रखती हैं।

इस बार माँ की पूजा कब है

  • चैत्र नवरात्रि 2027: 8 अप्रैल 2027, बृहस्पतिवार — उस दिन का रंग पीला (आधुनिक प्रथा)
  • शारदीय नवरात्रि 2027: 1 अक्टूबर 2027, शुक्रवार — उस दिन का रंग हरा (आधुनिक प्रथा)

पूजा तिथि से होती है, इसलिए कभी दो देवियों की पूजा एक ही दिन पड़ती है। तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय से गणना की गई हैं। पूरी तालिका देखें

स्वरूप

वाहनकोई वाहन नहीं — नंगे पाँव चलती हैं
भुजाएँदो
हाथों मेंदाएँ हाथ में जपमाला, बाएँ हाथ में कमंडल
अन्य नामअपर्णा (तप की कथा से)
प्रिय फूलचमेली

माँ ब्रह्मचारिणी की तपस्या

सती का देह-त्याग हो चुका था, और शिव गहरे ध्यान में चले गए थे। हिमालय के घर पुत्री बनकर जन्मी देवी के मन में एक ही बात थी — शिव को फिर से पाना।

नारद का उपदेश। देवर्षि नारद ने उन्हें राह दिखाई — शिव तप से ही प्रसन्न होते हैं। नारद जी के उपदेश पर देवी ने घोर तपस्या शुरू की। "ब्रह्मचारिणी" का अर्थ ही है तप का आचरण करने वाली।

कामदेव का प्रयास। उधर देवराज इंद्र ने शिव का ध्यान तोड़ने के लिए कामदेव को भेजा। कामदेव ने बाण चलाया, तो शिव ने तीसरा नेत्र खोलकर उसे भस्म कर दिया। पर देवी ने हिम्मत नहीं छोड़ी।

तप के चरण। पहले एक हज़ार वर्ष देवी ने केवल फल-फूल खाए। फिर सौ वर्ष केवल शाक पर रहीं, और धरती पर सोईं। धूप, कड़ी ठंड और आँधी — सब खुले आकाश के नीचे सहा।

फिर हज़ारों वर्ष केवल टूटे हुए बिल्वपत्र खाकर शिव की आराधना की। अंत में पत्ते खाना भी छोड़ दिया, और बिना अन्न-जल के तप करती रहीं। पत्ते (पर्ण) भी छोड़ देने से उनका नाम पड़ा अपर्णा। इस कठोर तप से उनका शरीर अत्यंत क्षीण हो गया।

देवताओं की प्रशंसा। यह तप देखकर देवता, ऋषि, मुनि और सिद्ध — सबने देवी को प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि ऐसा कठोर तप आज तक किसी ने नहीं किया। उन्होंने आशीर्वाद दिया कि शिव अवश्य आपको पति रूप में मिलेंगे।

शिव की परीक्षा। शिव स्वयं वेश बदलकर देवी के पास आए, और उनका मन डिगाने के लिए शिव की ही कमियाँ गिनाने लगे। पर देवी अपने निश्चय से ज़रा नहीं हिलीं। तब शिव ने उन्हें स्वीकार किया, और दोनों का विवाह हुआ।

इतना लंबा तप पढ़कर घबराइए मत — कोई आपसे यह नहीं माँगता। कथा का संदेश इतना है कि सच्ची लगन में मन नहीं डगमगाना चाहिए।

तप के वर्षों की गिनती स्रोतों में अलग मिलती है। द्रिक पंचांग 1000 + 100 + 3000 वर्ष बताता है; देवी भागवत से जुड़ा रूप लगभग 5000 वर्ष। वेश बदलकर परीक्षा का प्रसंग कालिदास के कुमारसंभव में सबसे विस्तार से है।

दूसरे दिन का महत्व

दूसरा दिन संयम का दिन है। जपमाला और कमंडल — दोनों साधना के चिह्न हैं, सजावट के नहीं।

आप इस दिन अपनी किसी छोटी आदत पर संयम का प्रयोग कर सकते हैं — जैसे थोड़ी देर मौन, या कुछ समय मोबाइल से दूरी। तप का आज का रूप यही है: अपने मन को थोड़ा साध लेना।

माँ ब्रह्मचारिणी के मंत्र

प्रार्थना श्लोक

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू । देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ॥

dadhānā karapadmābhyāmakṣamālākamaṇḍalū | devī prasīdatu mayi brahmacāriṇyanuttamā ||

अर्थ: जो अपने दोनों कमल जैसे हाथों में जपमाला और कमंडल धारण करती हैं, वे सर्वश्रेष्ठ देवी ब्रह्मचारिणी मुझ पर प्रसन्न हों।

नाम मंत्र

ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

oṃ devī brahmacāriṇyai namaḥ||

यह छोटा मंत्र जप के लिए है — अर्थ है “देवी ब्रह्मचारिणी को नमस्कार”। आप इसे अपनी श्रद्धा से 11, 21 या 108 बार जप सकते हैं; संख्या से बड़ा मन का भाव है।

बीज मंत्र (प्रचलित)

ह्रीं श्री अम्बिकायै नमः॥

hrīṃ śrī ambikāyai namaḥ||

नवदुर्गा के बीज मंत्रों की यह सूची कई हिंदी स्रोतों में शब्दशः एक-सी मिलती है, पर इनमें से किसी ने किसी शास्त्र का हवाला नहीं दिया — इसलिए इसे “प्रचलित” कहा है। परंपरा में बीज मंत्र गुरु से लेकर जपने की बात कही जाती है; बिना दीक्षा के ऊपर दिया नाम मंत्र और प्रार्थना श्लोक सरल और पूर्ण हैं।

स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

yā devī sarvabhūteṣu mām̐ brahmacāriṇī rūpeṇa saṃsthitā| namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ||

अर्थ: जो देवी सब प्राणियों में माँ ब्रह्मचारिणी के रूप में स्थित हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार है।

“या देवी सर्वभूतेषु” स्तुति मूल रूप से दुर्गा सप्तशती के पाँचवें अध्याय की है (“…शक्तिरूपेण संस्थिता” आदि)। नौ देवियों के नाम वाला यह रूप भक्ति-परंपरा में उसी से बना है।

माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

नवरात्रि में पूजा का क्रम हर दिन एक ही रहता है। बदलते हैं देवी, उनका मंत्र, फूल और भोग।दूसरे दिन आप ऐसे पूजा कर सकते हैं:

  1. स्नान करके साफ़ कपड़े पहनिए, और कलश व पूजा-स्थान को प्रणाम कीजिए।
  2. माँ ब्रह्मचारिणी का ध्यान कीजिए और ऊपर दिया प्रार्थना श्लोक पढ़कर उनका आवाहन कीजिए।
  3. आसन के लिए फूल, फिर जल (पाद्य, अर्घ्य, आचमन) अर्पित कीजिए।
  4. स्नान के लिए जल, फिर वस्त्र के रूप में मौली, चंदन, कुमकुम और अक्षत चढ़ाइए।
  5. चमेली अर्पित कीजिए, और बिल्वपत्र भी।
  6. धूप और दीप दिखाइए।
  7. भोग में शक्कर (मिश्री) और पंचामृत चढ़ाइए, साथ में फल।
  8. नाम मंत्र का जप कीजिए, फिर आरती और परिक्रमा।
  9. अंत में पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा माँग लीजिए।

यह षोडशोपचार पूजा का सरल क्रम है। समय कम हो, तो पंचोपचार भी पूरा माना गया है — दीप, धूप, फूल, गंध और नैवेद्य। घबराइए मत, भाव सच्चा हो तो छोटी पूजा भी पूरी है।

ग्रह और चक्र — मान्यता

ज्योतिषीय मान्यता में माँ ब्रह्मचारिणी का संबंध मंगल ग्रह से जोड़ा जाता है।

इनके ध्यान मंत्र में इन्हें स्वाधिष्ठान चक्र में स्थित बताया गया है।

ये परंपरा और ज्योतिष की मान्यताएँ हैं, शास्त्र का नियम या भविष्यवाणी नहीं।

स्रोत

  • drikpanchang.com/hindu-goddesses/parvati/durga/navdurga-brahmacharini.html — तप का क्रम (1000 वर्ष फल-फूल, 100 वर्ष साग, 3000 वर्ष बिल्वपत्र, फिर निराहार); "अपर्णा"; नंगे पाँव, जपमाला व कमंडल; मंगल; चमेली; ध्यान में स्वाधिष्ठान
  • en.wikipedia.org/wiki/Brahmacharini — तप का दूसरा रूप: पार्वती का लगभग 5000 वर्ष का तप, बेल-पत्र व नदी-जल; देवी भागवत पुराण / देवी गीता का हवाला
  • aajtak.in (ब्रह्मचारिणी व्रत कथा) · hindi.webdunia.com (ब्रह्मचारिणी की कथा) — हिमालय की पुत्री, नारद का उपदेश, तप के चरण, बिल्वपत्र, अपर्णा, क्षीण शरीर, ऋषि-मुनि-सिद्धों की प्रशंसा व शिव के मिलने का आशीर्वाद
  • en.wikipedia.org/wiki/Parvati · en.wikipedia.org/wiki/Daksha_yajna — कामदेव का भस्म होना, शिव का वेश बदलकर परीक्षा, विवाह; हरिवंश में "अपर्णा"; कुमारसंभव
  • sanskritdocuments.org/doc_devii/navadurga.itx · shlokam.org/navadurga-stotram — नौ प्रार्थना श्लोकों का पाठ (दोनों से मिलान) और अंग्रेज़ी अर्थ
  • drikpanchang.com/navratri/durga-puja/puja-vidhi/durga-puja-vidhi.html · templepurohit.com (Durga Puja Vidhi) — षोडशोपचार पूजा का क्रम
  • templepurohit.com (Navadurga) — हर देवी से जुड़ा ग्रह; drikpanchang.com के देवी-पृष्ठों से मेल
  • अमर उजाला (चैत्र नवरात्रि भोग सूची) व हिंदी समाचार-स्रोत — नौ दिनों का भोग (दो सूचियों का मिलान)

माँ ब्रह्मचारिणी — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न