माँ कूष्मांडा

Kushmanda · नवरात्रि का चौथा दिन

अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड रचने वाली अष्टभुजा देवी — नवरात्रि के चौथे दिन की देवी।

संक्षेप में

माँ कूष्मांडा नवदुर्गा का चौथा रूप हैं, और नवरात्रि के चौथे दिन इनकी पूजा होती है। मान्यता है कि इन्होंने अपनी हल्की-सी मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की, और ये सूर्य के केंद्र में रहकर उसे ऊर्जा देती हैं। इनकी आठ भुजाएँ हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहते हैं।

इस बार माँ की पूजा कब है

  • चैत्र नवरात्रि 2027: 10 अप्रैल 2027, शनिवार — उस दिन का रंग स्लेटी (आधुनिक प्रथा)
  • शारदीय नवरात्रि 2027: 3 अक्टूबर 2027, रविवार — उस दिन का रंग नारंगी (आधुनिक प्रथा)

पूजा तिथि से होती है, इसलिए कभी दो देवियों की पूजा एक ही दिन पड़ती है। तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय से गणना की गई हैं। पूरी तालिका देखें

स्वरूप

वाहनसिंहनी
भुजाएँआठ — इसीलिए अष्टभुजा देवी
दाएँ हाथों मेंकमंडल, धनुष, बाण, कमल
बाएँ हाथों मेंअमृत-कलश, जपमाला, गदा, चक्र
निवाससूर्य का केंद्र (मान्यता)
प्रिय फूललाल रंग के फूल

माँ कूष्मांडा की कथा

यह कथा उस समय की है, जब कुछ भी नहीं था। न सूरज था, न चाँद, न यह धरती। चारों ओर गहरा अंधकार और सन्नाटा छाया था।

जब सृष्टि रचने का विचार हुआ, तो आदिशक्ति का आवाहन किया गया। देवी कूष्मांडा के रूप में प्रकट हुईं।

एक मुस्कान से सृष्टि। देवी ने हल्की-सी मुस्कान बिखेरी। उस मंद हँसी से ऊर्जा की लहरें उठीं, अंधकार मिट गया, और पूरे ब्रह्मांड की रचना हो गई। इसीलिए इन्हें सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति कहा जाता है।

सूर्यमंडल में वास। इस देवी का वास सूर्यमंडल के भीतर माना गया है। वहाँ रहने की क्षमता केवल इन्हीं में है। इनका तेज सूर्य जैसा है, और द्रिक पंचांग के अनुसार ये सूर्य को दिशा और ऊर्जा देती हैं।

नाम का अर्थ। नाम के दो अर्थ बताए जाते हैं। संस्कृत में कुम्हड़े (पेठे) को "कूष्मांड" कहते हैं, और यह इन्हें प्रिय है — इसलिए कूष्मांडा। दूसरा अर्थ है कु (थोड़ा), ऊष्मा (ऊर्जा) और अंड (ब्रह्मांड) — थोड़ी-सी ऊर्जा से ब्रह्मांड रचने वाली।

जपमाला की शक्ति। इनकी आठ भुजाएँ हैं। इनमें से एक हाथ की जपमाला में सब सिद्धियाँ और निधियाँ मानी गई हैं।

विकिपीडिया में दी गई शिव और सूर्य के झगड़े वाली कथा का कोई स्रोत नहीं है, इसलिए हमने उसे नहीं लिखा।

चौथे दिन का महत्व

द्रिक पंचांग के अनुसार सिद्धियाँ और निधियाँ देने की शक्ति इनकी जपमाला में मानी गई है। इसलिए इस दिन जप का विशेष भाव रहता है।

मुस्कान से सृष्टि — यह बात अपने-आप में सुंदर है। आप इस दिन घर में किसी रूठे को मना लीजिए, या किसी का दिन अपनी मुस्कान से बना दीजिए। पूजा का असली अर्थ यही है।

माँ कूष्मांडा के मंत्र

प्रार्थना श्लोक

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च । दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥

surāsampūrṇakalaśaṃ rudhirāplutameva ca | dadhānā hastapadmābhyāṃ kūṣmāṇḍā śubhadāstu me ||

अर्थ: माँ कूष्मांडा अपने कमल जैसे हाथों में दो कलश धारण करती हैं — एक दिव्य अमृत से भरा, और दूसरा असुरों के रक्त से सना। वे मेरे लिए शुभ करने वाली हों।

यहाँ "सुरा" का अर्थ दिव्य अमृत है — अनुवादक यही अर्थ देते हैं।

नाम मंत्र

ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥

oṃ devī kūṣmāṇḍāyai namaḥ||

यह छोटा मंत्र जप के लिए है — अर्थ है “देवी कूष्मांडा को नमस्कार”। आप इसे अपनी श्रद्धा से 11, 21 या 108 बार जप सकते हैं; संख्या से बड़ा मन का भाव है।

बीज मंत्र (प्रचलित)

ऐं ह्रीं देव्यै नमः॥

aiṃ hrīṃ devyai namaḥ||

नवदुर्गा के बीज मंत्रों की यह सूची कई हिंदी स्रोतों में शब्दशः एक-सी मिलती है, पर इनमें से किसी ने किसी शास्त्र का हवाला नहीं दिया — इसलिए इसे “प्रचलित” कहा है। परंपरा में बीज मंत्र गुरु से लेकर जपने की बात कही जाती है; बिना दीक्षा के ऊपर दिया नाम मंत्र और प्रार्थना श्लोक सरल और पूर्ण हैं। प्रचलित स्रोतों में "ह्री" (बिना अनुस्वार) छपा है; बीजाक्षर "ह्रीं" है — इसी सूची के दूसरे मंत्रों में भी यही रूप है — वही यहाँ दिया है।

स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

yā devī sarvabhūteṣu mām̐ kūṣmāṇḍā rūpeṇa saṃsthitā| namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ||

अर्थ: जो देवी सब प्राणियों में माँ कूष्मांडा के रूप में स्थित हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार है।

“या देवी सर्वभूतेषु” स्तुति मूल रूप से दुर्गा सप्तशती के पाँचवें अध्याय की है (“…शक्तिरूपेण संस्थिता” आदि)। नौ देवियों के नाम वाला यह रूप भक्ति-परंपरा में उसी से बना है।

माँ कूष्मांडा की पूजा विधि

नवरात्रि में पूजा का क्रम हर दिन एक ही रहता है। बदलते हैं देवी, उनका मंत्र, फूल और भोग।चौथे दिन आप ऐसे पूजा कर सकते हैं:

  1. स्नान करके साफ़ कपड़े पहनिए, और कलश व पूजा-स्थान को प्रणाम कीजिए।
  2. माँ कूष्मांडा का ध्यान कीजिए और ऊपर दिया प्रार्थना श्लोक पढ़कर उनका आवाहन कीजिए।
  3. आसन के लिए फूल, फिर जल (पाद्य, अर्घ्य, आचमन) अर्पित कीजिए।
  4. स्नान के लिए जल, फिर वस्त्र के रूप में मौली, चंदन, कुमकुम और अक्षत चढ़ाइए।
  5. लाल फूल अर्पित कीजिए, और बिल्वपत्र भी।
  6. धूप और दीप दिखाइए।
  7. भोग में मालपुआ चढ़ाइए, साथ में फल।
  8. नाम मंत्र का जप कीजिए, फिर आरती और परिक्रमा।
  9. अंत में पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा माँग लीजिए।

यह षोडशोपचार पूजा का सरल क्रम है। समय कम हो, तो पंचोपचार भी पूरा माना गया है — दीप, धूप, फूल, गंध और नैवेद्य। घबराइए मत, भाव सच्चा हो तो छोटी पूजा भी पूरी है।

ग्रह और चक्र — मान्यता

ज्योतिषीय मान्यता में माँ कूष्मांडा का संबंध सूर्य से जोड़ा जाता है — कथा में भी ये सूर्य को दिशा और ऊर्जा देती हैं।

इनके ध्यान मंत्र में इन्हें अनाहत चक्र में स्थित बताया गया है।

ये परंपरा और ज्योतिष की मान्यताएँ हैं, शास्त्र का नियम या भविष्यवाणी नहीं।

स्रोत

  • drikpanchang.com/hindu-goddesses/parvati/durga/navdurga-kushmanda.html — सूर्य के केंद्र में निवास; मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना; ब्रह्मांड व कूष्मांड (सफ़ेद कद्दू) से नाम; सिंहनी; अष्टभुजा व आयुध; जपमाला में सिद्धियाँ; सूर्य; लाल फूल; ध्यान में अनाहत
  • en.wikipedia.org/wiki/Kushmanda — ब्रह्मांड की रचयिता; सूर्य को ऊर्जा; शाब्दिक अर्थ "little hot egg"; आठ से दस भुजाएँ, अमृत-कलश
  • hindi.webdunia.com (कूष्मांडा की कथा) — सृष्टि से पहले अंधकार, ईषत् हास्य से ब्रह्मांड, सूर्यमंडल में वास, कुम्हड़ा से नाम, आठ भुजाएँ, जपमाला में सिद्धियाँ-निधियाँ
  • prabhatkhabar.com (माँ कूष्मांडा व्रत कथा) — "न सूरज, न चाँद, न धरती", आदिशक्ति का आवाहन, मंद हँसी से ऊर्जा की लहरें, सूर्य लोक, कु-ऊष्मा-अंड
  • sanskritdocuments.org/doc_devii/navadurga.itx · shlokam.org/navadurga-stotram — नौ प्रार्थना श्लोकों का पाठ (दोनों से मिलान) और अंग्रेज़ी अर्थ
  • drikpanchang.com/navratri/durga-puja/puja-vidhi/durga-puja-vidhi.html · templepurohit.com (Durga Puja Vidhi) — षोडशोपचार पूजा का क्रम
  • templepurohit.com (Navadurga) — हर देवी से जुड़ा ग्रह; drikpanchang.com के देवी-पृष्ठों से मेल
  • अमर उजाला (चैत्र नवरात्रि भोग सूची) व हिंदी समाचार-स्रोत — नौ दिनों का भोग (दो सूचियों का मिलान)

माँ कूष्मांडा — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न