माँ कात्यायनी

Katyayani · नवरात्रि का छठा दिन

महिषासुर का वध करने वाली योद्धा देवी — नवदुर्गा का छठा रूप, नवरात्रि के छठे दिन की देवी।

संक्षेप में

माँ कात्यायनी नवदुर्गा का छठा रूप हैं, और नवरात्रि के छठे दिन इनकी पूजा होती है। महिषासुर के वध के लिए देवी ने यह रूप लिया, इसलिए इन्हें महिषासुरमर्दिनी भी कहते हैं। ऋषि कात्यायन से जुड़ने के कारण नाम पड़ा कात्यायनी। ये सिंह पर सवार हैं और हाथ में खड्ग व कमल रखती हैं।

इस बार माँ की पूजा कब है

  • चैत्र नवरात्रि 2027: 12 अप्रैल 2027, सोमवार — उस दिन का रंग सफ़ेद (आधुनिक प्रथा)
  • शारदीय नवरात्रि 2027: 5 अक्टूबर 2027, मंगलवार — उस दिन का रंग लाल (आधुनिक प्रथा)

पूजा तिथि से होती है, इसलिए कभी दो देवियों की पूजा एक ही दिन पड़ती है। तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय से गणना की गई हैं। पूरी तालिका देखें

स्वरूप

वाहनसिंह (प्रार्थना श्लोक में "शार्दूल")
भुजाएँचार
हाथों मेंबाएँ हाथों में कमल और खड्ग; दाएँ हाथ अभय और वर मुद्रा में
अन्य नाममहिषासुरमर्दिनी
प्रिय फूललाल फूल, विशेषकर गुलाब

"शार्दूल" का अर्थ प्रायः बाघ होता है, पर यह सिंह के लिए भी आता है। द्रिक पंचांग और विकिपीडिया दोनों सिंह लिखते हैं।

माँ कात्यायनी की कथा

महर्षि कात्यायन का तप। महर्षि कात्यायन के कोई संतान नहीं थी। उनकी इच्छा थी कि स्वयं माँ भगवती उनके घर पुत्री बनकर आएँ। इसके लिए उन्होंने बहुत कठोर तपस्या की।

उनके तप से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें वचन दिया कि वे उनकी पुत्री के रूप में जन्म लेंगी।

महिषासुर का आतंक। उसी समय महिषासुर का अत्याचार तीनों लोकों में फैल गया था। परेशान देवता त्रिदेव के पास गए। त्रिदेव और देवताओं के तेज से देवी प्रकट हुईं, और अपने वचन के अनुसार महर्षि कात्यायन के घर जन्म लिया। इसीलिए वे कात्यायनी कहलाईं।

महर्षि कात्यायन ने ही सबसे पहले देवी की पूजा की। वामन पुराण के अनुसार ऋषि ने ही उस दिव्य तेज को आकार दिया था।

महिषासुर का अंत। फिर देवी सिंह पर सवार होकर युद्ध में उतरीं। उन्होंने अपने खड्ग से महिषासुर का अंत किया, और देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कराया। इसीलिए इन्हें महिषासुरमर्दिनी कहा जाता है।

ब्रज की गोपियाँ। माँ कात्यायनी की एक सुंदर कथा ब्रज से भी जुड़ी है। भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा की थी। यह पूजा कालिंदी (यमुना) के तट पर की गई थी।

नाम की उत्पत्ति पर ग्रंथ थोड़ा अलग कहते हैं। वामन पुराण में देवताओं का तेज कात्यायन के आश्रम में साकार होता है; कालिका पुराण में ऋषि कात्यायन सबसे पहले पूजा करते हैं। दोनों में नाम ऋषि कात्यायन से ही आया है।

छठे दिन का महत्व

यह माँ का साहस वाला रूप है। शारदीय नवरात्रि की मुख्य कथा — महिषासुर पर विजय — इसी रूप से जुड़ी है।

पर योद्धा होते हुए भी इनके दो हाथ अभय और वर मुद्रा में हैं। यानी शक्ति का काम डराना नहीं, बचाना है। आप इस दिन किसी ऐसे डर का नाम लीजिए जिससे आप लंबे समय से बच रहे हैं, और उसकी ओर एक छोटा क़दम उठाइए।

माँ कात्यायनी के मंत्र

प्रार्थना श्लोक

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना । कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ॥

candrahāsojjvalakarā śārdūlavaravāhanā | kātyāyanī śubhaṃ dadyāddevī dānavaghātinī ||

अर्थ: जिनके हाथ में चंद्रहास खड्ग चमक रहा है, जो श्रेष्ठ शार्दूल पर सवार हैं, असुरों का अंत करने वाली वे देवी कात्यायनी मुझे शुभ प्रदान करें।

नाम मंत्र

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

oṃ devī kātyāyanyai namaḥ||

यह छोटा मंत्र जप के लिए है — अर्थ है “देवी कात्यायनी को नमस्कार”। आप इसे अपनी श्रद्धा से 11, 21 या 108 बार जप सकते हैं; संख्या से बड़ा मन का भाव है।

बीज मंत्र (प्रचलित)

क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नमः॥

klīṃ śrī trinetrāyai namaḥ||

नवदुर्गा के बीज मंत्रों की यह सूची कई हिंदी स्रोतों में शब्दशः एक-सी मिलती है, पर इनमें से किसी ने किसी शास्त्र का हवाला नहीं दिया — इसलिए इसे “प्रचलित” कहा है। परंपरा में बीज मंत्र गुरु से लेकर जपने की बात कही जाती है; बिना दीक्षा के ऊपर दिया नाम मंत्र और प्रार्थना श्लोक सरल और पूर्ण हैं।

स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

yā devī sarvabhūteṣu mām̐ kātyāyanī rūpeṇa saṃsthitā| namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ||

अर्थ: जो देवी सब प्राणियों में माँ कात्यायनी के रूप में स्थित हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार है।

“या देवी सर्वभूतेषु” स्तुति मूल रूप से दुर्गा सप्तशती के पाँचवें अध्याय की है (“…शक्तिरूपेण संस्थिता” आदि)। नौ देवियों के नाम वाला यह रूप भक्ति-परंपरा में उसी से बना है।

माँ कात्यायनी की पूजा विधि

नवरात्रि में पूजा का क्रम हर दिन एक ही रहता है। बदलते हैं देवी, उनका मंत्र, फूल और भोग।छठे दिन आप ऐसे पूजा कर सकते हैं:

  1. स्नान करके साफ़ कपड़े पहनिए, और कलश व पूजा-स्थान को प्रणाम कीजिए।
  2. माँ कात्यायनी का ध्यान कीजिए और ऊपर दिया प्रार्थना श्लोक पढ़कर उनका आवाहन कीजिए।
  3. आसन के लिए फूल, फिर जल (पाद्य, अर्घ्य, आचमन) अर्पित कीजिए।
  4. स्नान के लिए जल, फिर वस्त्र के रूप में मौली, चंदन, कुमकुम और अक्षत चढ़ाइए।
  5. लाल फूल, विशेषकर गुलाब अर्पित कीजिए, और बिल्वपत्र भी।
  6. धूप और दीप दिखाइए।
  7. भोग में शहद चढ़ाइए, साथ में फल।
  8. नाम मंत्र का जप कीजिए, फिर आरती और परिक्रमा।
  9. अंत में पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा माँग लीजिए।

यह षोडशोपचार पूजा का सरल क्रम है। समय कम हो, तो पंचोपचार भी पूरा माना गया है — दीप, धूप, फूल, गंध और नैवेद्य। घबराइए मत, भाव सच्चा हो तो छोटी पूजा भी पूरी है।

ग्रह और चक्र — मान्यता

ज्योतिषीय मान्यता में माँ कात्यायनी का संबंध बृहस्पति ग्रह से जोड़ा जाता है।

इनके ध्यान मंत्र में इन्हें आज्ञा चक्र में स्थित बताया गया है।

ये परंपरा और ज्योतिष की मान्यताएँ हैं, शास्त्र का नियम या भविष्यवाणी नहीं।

स्रोत

  • drikpanchang.com/hindu-goddesses/parvati/durga/navdurga-katyayani.html — महिषासुर वध हेतु रूप; योद्धा देवी; ऋषि कात्य के घर जन्म; सिंह; चार भुजाएँ, कमल व खड्ग, अभय व वर; बृहस्पति; लाल फूल, गुलाब; ध्यान में आज्ञा
  • en.wikipedia.org/wiki/Katyayani — वामन पुराण: देवताओं का तेज कात्यायन के आश्रम में, सिंह पर युद्ध, खड्ग से महिषासुर का अंत, महिषासुरमर्दिनी; कालिका पुराण: कात्यायन ने पहले पूजा की
  • aajtak.in · prabhatkhabar.com (माँ कात्यायनी व्रत कथा) — निःसंतान कात्यायन का तप, देवी का वचन, महिषासुर, त्रिदेव के तेज से प्राकट्य, कात्यायन के घर जन्म, कात्यायन की पहली पूजा, महिषासुर-वध, ब्रज की गोपियों द्वारा यमुना तट पर पूजा
  • sanskritdocuments.org/doc_devii/navadurga.itx · shlokam.org/navadurga-stotram — नौ प्रार्थना श्लोकों का पाठ (दोनों से मिलान) और अंग्रेज़ी अर्थ
  • drikpanchang.com/navratri/durga-puja/puja-vidhi/durga-puja-vidhi.html · templepurohit.com (Durga Puja Vidhi) — षोडशोपचार पूजा का क्रम
  • templepurohit.com (Navadurga) — हर देवी से जुड़ा ग्रह; drikpanchang.com के देवी-पृष्ठों से मेल
  • अमर उजाला (चैत्र नवरात्रि भोग सूची) व हिंदी समाचार-स्रोत — नौ दिनों का भोग (दो सूचियों का मिलान)

माँ कात्यायनी — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न