माँ सिद्धिदात्री

Siddhidatri · नवरात्रि का नौवाँ दिन

सब सिद्धियाँ देने वाली — नवदुर्गा का नौवाँ रूप, नवरात्रि के नौवें दिन की देवी।

संक्षेप में

माँ सिद्धिदात्री नवदुर्गा का नौवाँ रूप हैं, और नवरात्रि के नौवें दिन इनकी पूजा होती है। नाम का अर्थ ही है सिद्धियाँ देने वाली। मान्यता है कि भगवान शिव ने भी इन्हीं की कृपा से सिद्धियाँ पाईं। ये कमल पर विराजती हैं, सिंह इनका वाहन है, और हाथों में शंख, चक्र, गदा व कमल हैं।

इस बार माँ की पूजा कब है

  • चैत्र नवरात्रि 2027: 15 अप्रैल 2027, बृहस्पतिवार — उस दिन का रंग गुलाबी (आधुनिक प्रथा)
  • शारदीय नवरात्रि 2027: 8 अक्टूबर 2027, शुक्रवार — उस दिन का रंग बैंगनी (आधुनिक प्रथा)

पूजा तिथि से होती है, इसलिए कभी दो देवियों की पूजा एक ही दिन पड़ती है। तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय से गणना की गई हैं। पूरी तालिका देखें

स्वरूप

वाहनसिंह; आसन कमल
भुजाएँचार
हाथों मेंदाएँ हाथों में गदा और चक्र; बाएँ हाथों में कमल और शंख
उपासकदेव, गंधर्व, असुर, यक्ष और सिद्ध — सब
प्रिय फूलरात की रानी

माँ सिद्धिदात्री की कथा

यह कथा सृष्टि के आरंभ की है। द्रिक पंचांग के अनुसार भगवान रुद्र ने सृष्टि के लिए आदि-पराशक्ति की उपासना की।

कुछ कथा-संग्रह इसे और आगे बताते हैं। जब आदिशक्ति ने त्रिदेव को सृष्टि, पालन और संहार का काम सौंपा, तो शिव ने पूर्णता के लिए प्रार्थना की। तब देवी सिद्धिदात्री के रूप में प्रकट हुईं।

आठ सिद्धियाँ। मार्कंडेय पुराण में आठ सिद्धियाँ बताई गई हैं। ये सब माँ सिद्धिदात्री की कृपा से मिलती मानी जाती हैं:

अणिमा — अत्यंत सूक्ष्म हो जाना। महिमा — बहुत विशाल हो जाना। गरिमा — बहुत भारी हो जाना। लघिमा — बहुत हल्का हो जाना।

प्राप्ति — कहीं भी पहुँच जाना। प्राकाम्य — मनचाही बात पूरी होना। ईशित्व — प्रकृति पर अधिकार। वशित्व — सबको अपने प्रभाव में लेना।

अर्धनारीश्वर। शिव ने इन्हीं की कृपा से ये सिद्धियाँ पाईं। और देवी की अनुकंपा से शिव का आधा शरीर देवी का हो गया — देवी उनके वाम भाग से प्रकट हुईं। इसी से शिव अर्धनारीश्वर कहलाए — आधे शिव, आधी शक्ति।

सोचिए — जिनसे पूरा जगत शक्ति माँगता है, उन्होंने भी यहाँ शीश झुकाया। इसीलिए देव, गंधर्व, असुर, यक्ष और सिद्ध — सब माँ सिद्धिदात्री की उपासना करते हैं।

त्रिदेव को काम सौंपने और शिव की पूर्णता की प्रार्थना वाला अंश हमें एक ही स्रोत (श्रीमंदिर, देवी पुराण का हवाला) में मिला, इसलिए उसे "कुछ कथा-संग्रह" कहकर दिया है। कुछ ग्रंथ सिद्धियों की संख्या अठारह भी बताते हैं।

नौवें दिन का महत्व

नवमी नवरात्रि का पूर्णता का दिन है। द्रिक पंचांग के अनुसार माँ सिद्धिदात्री भक्तों को हर प्रकार की सिद्धि देती हैं, और देव, गंधर्व, असुर, यक्ष और सिद्ध — सब इनकी उपासना करते हैं।

चैत्र नवरात्रि में यह दिन राम नवमी भी है। शारदीय नवरात्रि में इसके अगले दिन विजयादशमी आती है। कई घरों में कन्या पूजन भी इसी दिन होता है।

नौ दिनों में आपने जो संकल्प लिया था, आज उसे याद कीजिए। जितना निभा, उसके लिए धन्यवाद दीजिए, और जो छूट गया उसके लिए क्षमा माँग लीजिए। माँ इतने में ही प्रसन्न हैं।

माँ सिद्धिदात्री के मंत्र

प्रार्थना श्लोक

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि । सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी ॥

siddhagandharvayakṣādyairasurairamarairapi | sevyamānā sadā bhūyāt siddhidā siddhidāyinī ||

अर्थ: सिद्ध, गंधर्व, यक्ष आदि, असुर और देवता भी जिनकी सदा सेवा करते हैं, सिद्धियाँ देने वाली वे सिद्धिदात्री सदा कृपा करें।

नाम मंत्र

ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥

oṃ devī siddhidātryai namaḥ||

यह छोटा मंत्र जप के लिए है — अर्थ है “देवी सिद्धिदात्री को नमस्कार”। आप इसे अपनी श्रद्धा से 11, 21 या 108 बार जप सकते हैं; संख्या से बड़ा मन का भाव है।

बीज मंत्र (प्रचलित)

ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नमः॥

hrīṃ klīṃ aiṃ siddhaye namaḥ||

नवदुर्गा के बीज मंत्रों की यह सूची कई हिंदी स्रोतों में शब्दशः एक-सी मिलती है, पर इनमें से किसी ने किसी शास्त्र का हवाला नहीं दिया — इसलिए इसे “प्रचलित” कहा है। परंपरा में बीज मंत्र गुरु से लेकर जपने की बात कही जाती है; बिना दीक्षा के ऊपर दिया नाम मंत्र और प्रार्थना श्लोक सरल और पूर्ण हैं।

स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

yā devī sarvabhūteṣu mām̐ siddhidātrī rūpeṇa saṃsthitā| namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ||

अर्थ: जो देवी सब प्राणियों में माँ सिद्धिदात्री के रूप में स्थित हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार है।

“या देवी सर्वभूतेषु” स्तुति मूल रूप से दुर्गा सप्तशती के पाँचवें अध्याय की है (“…शक्तिरूपेण संस्थिता” आदि)। नौ देवियों के नाम वाला यह रूप भक्ति-परंपरा में उसी से बना है।

माँ सिद्धिदात्री की पूजा विधि

नवरात्रि में पूजा का क्रम हर दिन एक ही रहता है। बदलते हैं देवी, उनका मंत्र, फूल और भोग।नौवें दिन आप ऐसे पूजा कर सकते हैं:

  1. स्नान करके साफ़ कपड़े पहनिए, और कलश व पूजा-स्थान को प्रणाम कीजिए।
  2. माँ सिद्धिदात्री का ध्यान कीजिए और ऊपर दिया प्रार्थना श्लोक पढ़कर उनका आवाहन कीजिए।
  3. आसन के लिए फूल, फिर जल (पाद्य, अर्घ्य, आचमन) अर्पित कीजिए।
  4. स्नान के लिए जल, फिर वस्त्र के रूप में मौली, चंदन, कुमकुम और अक्षत चढ़ाइए।
  5. रात की रानी अर्पित कीजिए, और बिल्वपत्र भी।
  6. धूप और दीप दिखाइए।
  7. भोग में तिल, या हलवा-पूड़ी-चना चढ़ाइए, साथ में फल।
  8. नाम मंत्र का जप कीजिए, फिर आरती और परिक्रमा।
  9. अंत में पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा माँग लीजिए।

यह षोडशोपचार पूजा का सरल क्रम है। समय कम हो, तो पंचोपचार भी पूरा माना गया है — दीप, धूप, फूल, गंध और नैवेद्य। घबराइए मत, भाव सच्चा हो तो छोटी पूजा भी पूरी है।

ग्रह और चक्र — मान्यता

ज्योतिषीय मान्यता में माँ सिद्धिदात्री का संबंध केतु से जोड़ा जाता है। नौ देवियाँ मिलकर पूरे नवग्रह बनाती हैं, और केतु पर यह क्रम पूरा होता है।

इनके ध्यान मंत्र में इन्हें निर्वाण चक्र में स्थित बताया गया है — यह भी प्रचलित सात चक्रों से अलग नाम है।

ये परंपरा और ज्योतिष की मान्यताएँ हैं, शास्त्र का नियम या भविष्यवाणी नहीं।

स्रोत

  • drikpanchang.com/hindu-goddesses/parvati/durga/navdurga-siddhidatri.html — रुद्र द्वारा आदि-पराशक्ति की उपासना; शिव के वाम भाग से प्राकट्य; अर्धनारीश्वर; सब सिद्धियाँ देने वाली; शिव को सिद्धियाँ; गदा, चक्र, कमल, शंख; कमल व सिंह; देव-गंधर्व-असुर-यक्ष-सिद्ध द्वारा उपासना; केतु; रात की रानी; ध्यान में निर्वाण चक्र
  • en.wikipedia.org/wiki/Siddhidhatri — वाम भाग से प्राकट्य, शिव को अष्ट सिद्धि, अर्धनारीश्वर (यह लेख स्वयं द्रिक पंचांग का हवाला देता है; Dalal, Brooks द्वितीयक)
  • hindi.webdunia.com (सिद्धिदात्री की कथा) — मार्कंडेय पुराण की आठ सिद्धियाँ, शिव को सिद्धियाँ, आधा शरीर देवी का, अर्धनारीश्वर; ब्रह्मवैवर्त में अठारह
  • en.wikipedia.org/wiki/Siddhi — वही आठ सिद्धियाँ व उनके अर्थ
  • srimandir.com (माँ सिद्धिदात्री अवतार) — त्रिदेव की रचना, शिव की पूर्णता की प्रार्थना, अर्धनारीश्वर (देवी पुराण का हवाला)
  • sanskritdocuments.org/doc_devii/navadurga.itx · shlokam.org/navadurga-stotram — नौ प्रार्थना श्लोकों का पाठ (दोनों से मिलान) और अंग्रेज़ी अर्थ
  • drikpanchang.com/navratri/durga-puja/puja-vidhi/durga-puja-vidhi.html · templepurohit.com (Durga Puja Vidhi) — षोडशोपचार पूजा का क्रम
  • templepurohit.com (Navadurga) — हर देवी से जुड़ा ग्रह; drikpanchang.com के देवी-पृष्ठों से मेल
  • अमर उजाला (चैत्र नवरात्रि भोग सूची) व हिंदी समाचार-स्रोत — नौ दिनों का भोग (दो सूचियों का मिलान)

एक नज़र में

दिननवरात्रि का नौवाँ दिन
वाहनसिंह; कमलासन
प्रिय फूलरात की रानी
भोगतिल, या हलवा-पूड़ी-चना
ग्रह (मान्यता)केतु

माँ सिद्धिदात्री — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न