घटस्थापना क्या है
"घट" का अर्थ है कलश। नवरात्रि की पूजा इसी कलश की स्थापना से शुरू होती है, और नौ दिन यही कलश पूजा का केंद्र रहता है।
स्थापना के समय देवी से प्रार्थना की जाती है कि वे नौ दिनों तक इस कलश में निवास करें। इसलिए इसे पूरे पर्व की नींव माना जाता है।
घटस्थापना की सामग्री
सामग्री बहुत कठिन नहीं है। ज़्यादातर चीज़ें घर में या पास की दुकान पर मिल जाती हैं।
| सामग्री | किस काम की |
|---|---|
| चौड़ा मिट्टी का पात्र, साफ़ मिट्टी | जौ बोने के लिए |
| सप्तधान्य (सात अनाज) या जौ | पात्र में बोने के लिए |
| मिट्टी या पीतल का कलश | स्थापना का मुख्य पात्र |
| गंगाजल या शुद्ध जल | कलश भरने के लिए |
| मौली (कलावा) | कलश और नारियल पर बाँधने के लिए |
| सुपारी, सिक्के, सुगंध, दूर्वा, अक्षत | कलश के जल में डालने के लिए |
| आम या अशोक के 5 पत्ते | कलश के मुख पर |
| कलश का ढक्कन | पत्तों के ऊपर |
| जटा वाला नारियल, लाल कपड़ा | कलश के ऊपर स्थापना के लिए |
| फूल व माला (गेंदा अच्छा रहता है) | पूजन के लिए |
घटस्थापना की विधि — चरण दर चरण
- मिट्टी के चौड़े पात्र में मिट्टी फैलाइए और बीज डालिए। मिट्टी और बीज की तीन परतें बनाइए — दूसरी परत के बीज किनारों पर रखिए। ज़रूरत हो तो थोड़ा पानी डाल दीजिए।
- कलश के गले में मौली बाँधिए और उसे गले तक जल से भरिए। जल में सुपारी, सुगंध, दूर्वा, अक्षत और सिक्के डालिए।
- कलश के मुख पर आम या अशोक के पाँच पत्ते रखिए, और ऊपर ढक्कन रख दीजिए।
- जटा वाले नारियल को लाल कपड़े में लपेटिए, मौली से बाँधिए और कलश के ऊपर रखिए।
- अब इस कलश को जौ वाले पात्र के ऊपर स्थापित कर दीजिए।
- माँ दुर्गा का आवाहन कीजिए — प्रार्थना कीजिए कि वे नौ दिन इस कलश में निवास करें।
- पंचोपचार पूजा कीजिए: दीप, धूप, फूल, गंध और नैवेद्य (फल या मिठाई)।
आगे के नौ दिन इसी कलश के सामने पूजा होती है। जौ के अंकुर इन दिनों में धीरे-धीरे बढ़ते हैं।
मुहूर्त कैसे तय होता है
घटस्थापना का सबसे अच्छा समय है प्रतिपदा तिथि में दिन का पहला एक-तिहाई भाग। हर हाल में इसे हिंदू मध्याह्न से पहले, प्रतिपदा रहते कर लेना चाहिए।
इस पहले तिहाई में अगर कोई द्विस्वभाव लग्न — मिथुन, कन्या, धनु या मीन — कम से कम एक मुहूर्त (48 मिनट) तक रहे, तो वही समय चुना जाता है। द्रिक पंचांग के प्रकाशित मुहूर्त यही नियम दिखाते हैं।
ऐसा लग्न न मिले, तो पूरा पहला तिहाई लिया जाता है। उसमें से चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का समय, जहाँ हो सके, टाल दिया जाता है।
पहला तिहाई छूट जाए, तो अभिजित मुहूर्त में भी घटस्थापना की जा सकती है। बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता।
| बात | नियम |
|---|---|
| सबसे अच्छा समय | प्रतिपदा में दिन का पहला तिहाई |
| विकल्प | अभिजित मुहूर्त (बुधवार को नहीं) |
| निषिद्ध | अमावस्या और रात्रि |
| टालें, पर वर्जित नहीं | चित्रा नक्षत्र, वैधृति योग |
कभी-कभी प्रतिपदा सूर्योदय के बाद केवल कुछ मिनट रहती है। तब घटस्थापना एक दिन पहले, प्रतिपदा शुरू होने के बाद की जाती है — और शैलपुत्री पूजा अगले दिन। नीचे की तालिका यह अपने-आप दिखाती है।
चित्रा या वैधृति पड़ जाए तो?
कई बार पंचांग में लिखा दिखता है कि घटस्थापना के समय चित्रा नक्षत्र या वैधृति योग है। इससे घबराइए मत।
द्रिक पंचांग साफ़ कहता है कि इन्हें टालने की सलाह है, पर ये निषिद्ध नहीं हैं। जब ये पूरे समय रहें, तब भी वही मुहूर्त दिया जाता है। आप श्रद्धा से स्थापना कीजिए — बस इतना ही चाहिए।
