अष्टमी, नवमी व संधि पूजा

Durga Ashtami · Sandhi Puja · Maha Navami

नवरात्रि के सबसे बड़े दिन — दुर्गा अष्टमी, संधि पूजा का क्षण और महानवमी।

संक्षेप में

दुर्गा अष्टमी नवरात्रि का आठवाँ दिन है, जब माँ महागौरी की पूजा होती है, और महानवमी नौवाँ, माँ सिद्धिदात्री का दिन। जिस क्षण अष्टमी ख़त्म होकर नवमी शुरू होती है, उसके आगे-पीछे के 48 मिनट संधि पूजा का समय है। कई बार अष्टमी और महानवमी एक ही दिन पड़ जाती हैं।

दुर्गा अष्टमी

नवरात्रि का आठवाँ दिन दुर्गा अष्टमी कहलाता है। इस दिन माँ महागौरी की पूजा होती है — अत्यंत गौर वर्ण वाली, श्वेत वस्त्र धारण करने वाली देवी।

कई परिवारों में इसी दिन कन्या पूजन होता है, और कई लोग कन्या पूजन के बाद व्रत भी खोल लेते हैं। चैत्र नवरात्रि में इस दिन को अन्नपूर्णा अष्टमी भी कहते हैं।

संधि पूजा — सबसे पवित्र क्षण

अष्टमी तिथि के आख़िरी 24 मिनट और नवमी तिथि के पहले 24 मिनट — इन दो घटियों को संधि काल कहते हैं। कुल लगभग 48 मिनट।

परंपरा में इसे पूरी दुर्गा पूजा का सबसे पवित्र समय माना गया है। मान्यता है कि इसी क्षण देवी चामुंडा प्रकट हुईं और चंड-मुंड का अंत किया।

यह समय घड़ी से नहीं, तिथि से बनता है। इसलिए यह हर साल अलग होता है — कभी सुबह, कभी दोपहर, कभी रात। आप इसे पहले से देख लीजिए, ताकि तैयारी आराम से हो सके।

अष्टमी और महानवमी एक ही दिन क्यों?

यह सवाल बहुत लोग पूछते हैं, और इसका उत्तर सीधा है। शारदीय नवरात्रि में महानवमी वह पहला दिन है जब दिन के समय नवमी तिथि मौजूद हो — अष्टमी से जुड़ी नवमी।

तो अगर अष्टमी दिन में ही, सूर्यास्त से पहले ख़त्म हो जाए, तो उसी दिन नवमी भी आ जाती है। तब दुर्गा अष्टमी, संधि पूजा और महानवमी — तीनों एक ही तारीख़ पर पड़ते हैं। अष्टमी सूर्यास्त के बाद ख़त्म हो, तो महानवमी अगले दिन होती है।

चैत्र नवरात्रि में नौवाँ दिन राम नवमी होता है, जो मध्याह्न की नवमी से तय होती है। इसलिए वहाँ यह नियम थोड़ा अलग चलता है।

ये नियम द्रिक पंचांग के कई वर्षों के कैलेंडर से मिलाकर इस साइट के पंचांग-इंजन में लगाए गए हैं।

व्रत का पारण कब करें

द्रिक पंचांग निर्णय-सिंधु का नियम मानता है — व्रत पूरी नवमी तिथि तक रखा जाए, और नवमी पूरी होने पर, दशमी में खोला जाए। इस बार का पारण-समय नीचे की तालिका में है।

एक दूसरा मत नवमी के भीतर ही पारण की बात करता है। और उत्तर भारत में बहुत लोग, ख़ासकर परिवार वाली महिलाएँ, अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन के बाद व्रत खोल लेती हैं। तीनों परंपराएँ चलती हैं — अपने घर की रीति मानिए।

इस बार — चैत्र नवरात्रि 2027

7 अप्रैल 2027 से 15 अप्रैल 2027 तक · समय नई दिल्ली के अनुसार

घटस्थापना मुहूर्त

06:05 से 07:25 तक
7 अप्रैल 2027, बुधवार
अभिजित मुहूर्त: वर्जित (बुधवार)

संधि पूजा

15:00 से 15:48 तक
14 अप्रैल 2027
अष्टमी 15:24 पर पूरी होकर नवमी शुरू होती है।
पारण: 15 अप्रैल 2027 को 13:21 के बाद, जब नवमी पूरी हो जाए।
दिनदिनांकवारदेवी
17 अप्रैलबुधवारशैलपुत्री
28 अप्रैलबृहस्पतिवारब्रह्मचारिणी
39 अप्रैलशुक्रवारचंद्रघंटा
410 अप्रैलशनिवारकूष्मांडा
511 अप्रैलरविवारस्कंदमाता
612 अप्रैलसोमवारकात्यायनी
713 अप्रैलमंगलवारकालरात्रि
814 अप्रैलबुधवारमहागौरी · दुर्गा अष्टमी
915 अप्रैलबृहस्पतिवारसिद्धिदात्री · राम नवमी

नौ दिन, नौ रंग (आधुनिक प्रथा)

दिन 1: रॉयल ब्लू
7 अप्रैल, बुधवार
दिन 2: पीला
8 अप्रैल, बृहस्पतिवार
दिन 3: हरा
9 अप्रैल, शुक्रवार
दिन 4: स्लेटी
10 अप्रैल, शनिवार
दिन 5: नारंगी
11 अप्रैल, रविवार
दिन 6: सफ़ेद
12 अप्रैल, सोमवार
दिन 7: लाल
13 अप्रैल, मंगलवार
दिन 8: आसमानी
14 अप्रैल, बुधवार
दिन 9: गुलाबी
15 अप्रैल, बृहस्पतिवार

तिथियाँ और समय पंचांग से गणना किए गए हैं, नई दिल्ली के लिए। दूसरे शहरों में समय बदलता है, और अलग-अलग पंचांगों में एक-दो मिनट का अंतर मिल सकता है। रंग आधुनिक प्रथा हैं, शास्त्र नहीं — घटस्थापना से गिने नौ दिनों के: पहले सात दिनों के रंग वार से तय होते हैं, आठवें-नौवें दिन के रंग उस वार से, जिस दिन नवरात्रि शुरू हुई (द्रिक पंचांग का नियम)।

स्रोत

  • drikpanchang.com (शारदीय नवरात्रि संधि पूजा) — दो घटी (लगभग 48 मिनट), अष्टमी के अंत व नवमी के आरंभ पर; चामुंडा का प्राकट्य
  • drikpanchang.com — शारदीय व चैत्र नवरात्रि कैलेंडर (नई दिल्ली, कई वर्ष): महानवमी व राम नवमी के दिन, नवमी होम, विसर्जन, अन्नपूर्णा अष्टमी
  • drikpanchang.com (नवरात्रि पारण) — निर्णय-सिंधु: नवमी पूरी होने पर दशमी में पारण; दूसरा मत; अष्टमी/नवमी को कन्या पूजन के बाद व्रत खोलने की प्रथा
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अष्टमी, नवमी व संधि पूजा — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न