51 शक्ति पीठ

pañcāśat śakti pīṭha

माता सती के वे स्थान जहाँ परंपरा के अनुसार उनके अंग गिरे — हर पीठ की शक्ति, भैरव और कथा।

शक्ति पीठ क्या हैं

इक्यावन शक्ति पीठ किसी योजना से नहीं बने। वे एक शोक के बिखरने से बने — और यही इस परंपरा की सबसे असाधारण बात है।

दक्ष का यज्ञ

दक्ष प्रजापति ने एक विशाल यज्ञ रचा। देवता बुलाए गए, ऋषि बुलाए गए, तीनों लोकों से निमंत्रण गए — पर उनके अपने जामाता शिव को नहीं।

सती को यह सहन नहीं हुआ, फिर भी वे गईं। पिता के घर जाने के लिए निमंत्रण की क्या आवश्यकता, यही सोचकर। पर वहाँ जो हुआ वह उपेक्षा से आगे था — भरी सभा में उनके पति का उपहास किया गया।

सती ने उत्तर में कुछ कहा नहीं। जिस देह के कारण वह संबंध बना था जिसका अपमान हुआ, उसी देह को उन्होंने त्याग दिया।

शिव का तांडव

शिव को समाचार मिला तो जो हुआ, ग्रंथ भी उसका वर्णन सँभलकर करते हैं। वे सती की देह कंधे पर उठाकर चल पड़े — बिना दिशा के, बिना रुके, बिना यह जाने कि कहाँ जा रहे हैं।

उनके चरणों की गति से तीनों लोक काँपने लगे। यह शोक था, पर ऐसा शोक जो प्रलय बनता जा रहा था। जो मन किसी को खोकर टूटा हो, वह जानता है कि यह कल्पना नहीं है — दुख जब सीमा लाँघता है तो चारों ओर सब कुछ तोड़ता है।

सुदर्शन चक्र, और इक्यावन स्थान

संसार को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र चलाया और सती की देह खंड-खंड कर दी। जहाँ-जहाँ कोई अंग या आभूषण गिरा, वहाँ-वहाँ एक पीठ बन गया।

इस कथा में एक बात प्रायः छूट जाती है। विष्णु ने शिव को रोका नहीं, समझाया नहीं, उपदेश नहीं दिया। उन्होंने केवल वह भार हटा दिया जिसे शिव स्वयं छोड़ नहीं पा रहे थे। सहायता कभी-कभी ऐसी ही होती है — रोकने से नहीं, बोझ हल्का करने से।

और जो बिखरा, वह नष्ट नहीं हुआ। हर टुकड़ा एक तीर्थ बन गया, जहाँ आज भी लोग जाते हैं। यही इस परंपरा का मर्म है: जो टूटता है वह समाप्त नहीं होता, कभी-कभी वह फैल जाता है।

स्रोत: कालिका पुराण, देवी भागवत पुराण; पीठों की गणना पीठनिर्णय (महापीठनिरूपण) से

51 ही क्यों — और कहीं 52, कहीं 108 क्यों

शक्ति पीठों की संख्या पर परंपरा एकमत नहीं है। यह भ्रम नहीं है, यह पाठों का इतिहास है — और उसे जान लेना अपने आप में रोचक है।

अलग ग्रंथ, अलग संख्या

पीठनिर्णय (महापीठनिरूपण) इक्यावन पीठ गिनाता है और हर एक के साथ सती का अंग, वहाँ की शक्ति तथा भैरव का नाम भी देता है। यही सबसे विस्तृत सूची है, और इसी को यह संग्रह आधार बनाता है।

दूसरी ओर देवी भागवत पुराण एक सौ आठ की बात करता है, अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्र अठारह की, और कुछ तांत्रिक ग्रंथ चौंसठ की। ये आपस में टकराते नहीं — ये अलग-अलग परंपराएँ हैं, जिनमें से हर एक अपने ढंग से गिनती करती है।

संख्या इक्यावन कैसे बनी

सबसे दिलचस्प बात पाठ के भीतर से निकलती है। विद्वान डी. सी. सरकार ने पीठनिर्णय की छह पांडुलिपियाँ मिलाकर देखीं और पाया कि मूल पाठ में संभवतः बयालीस पीठ ही थे।

संख्या इक्यावन तब बनी जब कामरूप में दस महाविद्याओं को अलग-अलग पीठ के रूप में गिना गया। यानी यह जोड़ बाद का है, और पाठ स्वयं इसकी गवाही देता है।

बंगाल में बावन क्यों कहा जाता है

सरकार ने यह भी पाया कि सूची के अंतिम आठ नाम — नलहाटी, कालीघाट, वक्रेश्वर, यशोर, अट्टहास, नंदिपुर, लंका और विराट — कुछ पांडुलिपियों में हैं ही नहीं।

जिन प्रतियों में ये नाम अलग ढंग से जुड़े, वहाँ गिनती बावन तक पहुँच गई। बंगाल के एक बड़े भाग में आज भी बावन की मान्यता इसी कारण है। दोनों संख्याएँ अपनी-अपनी परंपरा में ठीक हैं।

यह सूची कितनी पुरानी है

एक बात जो प्रायः नहीं बताई जाती: पीठनिर्णय स्वयं कोई अत्यंत प्राचीन ग्रंथ नहीं है। सरकार इसे सत्रहवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों या अठारहवीं के आरंभ का मानते हैं — लगभग 1690 से 1720 के बीच।

उनका एक तर्क दिलचस्प है। इस सूची में कालीघाट का नाम आता है, और कालीघाट की प्रसिद्धि कलकत्ता की स्थापना (1690) के बाद की लगती है। सोलहवीं शताब्दी के चंडीमंगल में कालीघाट का पीठ के रूप में उल्लेख नहीं है, और उसी सदी के एक और लेखक वंशीदास भी उसे पीठ नहीं मानते।

इसका अर्थ यह नहीं कि पीठों की परंपरा नई है — वह बहुत पुरानी है, और उसके अंश कहीं अधिक प्राचीन ग्रंथों में मिलते हैं। अर्थ केवल इतना है कि **इक्यावन की यह विशेष सूची** अपेक्षाकृत बाद में संकलित हुई। जो सूची किसी काल में बनी हो, उसमें उस काल की छाप रहती ही है।

एक नाम जो भूल से बना

सूची में एक नाम ऐसा भी है जिसके बारे में सरकार स्पष्ट लिखते हैं कि वह किसी भ्रमित पाठ से बन गया — मणिबंध। इसी तरह मगध और कर्णाट नाम बाद के संशोधकों ने जोड़े, क्योंकि उन्हें अपने सामने के पाठ से इक्यावन नाम बन ही नहीं रहे थे।

यह बात परंपरा को छोटा नहीं करती। यह केवल दिखाती है कि ये सूचियाँ आकाश से नहीं उतरीं — इन्हें मनुष्यों ने लिखा, नक़ल किया, और नक़ल करते हुए कहीं-कहीं चूक भी हुई।

स्रोत: D. C. Sircar, The Śākta Pīṭhas (1948) — पीठनिर्णय का समीक्षित संस्करण

अष्टादश शक्ति पीठ स्तोत्र

परंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य को आरोपित

लङ्कायां शाङ्करी देवी, कामाक्षी काञ्चिकापुरे।

शाङ्करीलंका · कामाक्षीकांचीपुरम

प्रद्युम्ने शृङ्खला देवी, चामुण्डा क्रौञ्चपट्टणे।

शृङ्खलाप्रद्युम्न · चामुण्डाक्रौञ्चपट्टण (मैसूर)

आलम्पुरे जोगुलाम्बा, श्रीशैले भ्रमराम्बिका।

जोगुलाम्बाआलमपुर · भ्रमराम्बिकाश्रीशैल

कोल्हापुरे महालक्ष्मी, माहुर्ये एकवीरिका।

महालक्ष्मीकोल्हापुर · एकवीरिकामाहुर

उज्जयिन्यां महाकाली, पीठिकायां पुरुहूतिका।

महाकालीउज्जयिनी · पुरुहूतिकापीठापुरम

ओढ्यायने गिरिजा देवी, माणिक्या दक्षवाटिके।

गिरिजाओढ्यायन (कटक) · माणिक्याद्राक्षारामम्

हरिक्षेत्रे कामरूपी, प्रयागे माधवेश्वरी।

कामरूपीहरिक्षेत्र (कामरूप) · माधवेश्वरीप्रयाग

ज्वालायां वैष्णवी देवी, गया माङ्गल्यगौरिका।

वैष्णवीज्वाला · माङ्गल्यगौरीगया

वाराणस्यां विशालाक्षी, काश्मीरे तु सरस्वती।

विशालाक्षीवाराणसी · सरस्वतीकाश्मीर

अष्टादश शक्तिपीठानि, योगिनामपि दुर्लभम्।

सायंकाले पठेन्नित्यं, सर्वशत्रुविनाशनम्।

सर्वरोगहरं दिव्यं, सर्वसम्पत्करं शुभम्॥

अठारह और इक्यावन — दो परंपराएँ, एक नहीं

अष्टादश शक्ति पीठ स्तोत्र अठारह स्थान गिनाता है। यह मान लेना स्वाभाविक लगता है कि ये इक्यावन में से ही चुने हुए अठारह होंगे — पर ऐसा नहीं है।

दोनों सूचियाँ केवल ग्यारह स्थानों पर मिलती हैं। शेष सात — शृंखला, चामुण्डा, जोगुलाम्बा, एकवीरिका, पुरुहूतिका, माणिक्या और माङ्गल्यगौरी — पीठनिर्णय की इक्यावन की सूची में हैं ही नहीं।

इसलिए इस संग्रह में दोनों अलग रखी गई हैं। ऊपर स्तोत्र की जिन पंक्तियों में नाम पर लिंक है, वे वही ग्यारह स्थान हैं जहाँ दोनों परंपराएँ एक ही तीर्थ बताती हैं।

स्रोत: अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्र (hindupedia.com/en/Ashta_Dasa_Shakthi_Peetha_Stotram)

51 शक्ति पीठ — अंग, शक्ति, भैरव व स्थान

#पीठअंगशक्तिभैरवआज कहाँ
1हिंगुलाब्रह्मरन्ध्रकोट्टरीभीमलोचनहिंगलाज, अघोर (हिंगोल) नदी पर, बलूचिस्तान, पाकिस्तान
2करवीरत्रिनेत्रमहिषमर्दिनीक्रोधीशकोल्हापुर, महाराष्ट्र, भारत · विवादित
3सुगंधानासिकासुनंदात्र्यंबकशिकारपुर, सोंधा (सुगंधा) नदी पर, बरिसाल, बांग्लादेश
4काश्मीरकण्ठमहामायात्रिसंध्येश्वरशारदा गाँव, नीलम घाटी, आज़ाद जम्मू-कश्मीर (पाकिस्तान-प्रशासित), पाकिस्तान · विवादित
5ज्वालामुखीजिह्वासिद्धिदाउन्मत्तज्वालामुखी, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश, भारत
6जालंधरस्तनत्रिपुरमालिनीभीषणभारत · विवादित
7वैद्यनाथहृदयजयदुर्गावैद्यनाथदेवघर, झारखंड, भारत
8नेपालजानुमहामायाकपालीनेपाल · विवादित
9मानसदक्षिण-हस्तदाक्षायणीहरमानसरोवर, कैलास के निकट, तिब्बत, चीन
10विरजाक्षेत्रनाभिविमलाजगन्नाथजाजपुर, ओडिशा, भारत
11गंडकीगण्डगंडकीचक्रपाणि
12बहुलावाम-बाहुबहुलाभीरुककेतुग्राम, कटवा के निकट, पूर्व बर्दवान, पश्चिम बंगाल, भारत
13उज्जयिनीकूर्परमंगलचंडीकपिलांबरभारत · विवादित
14चट्टलदक्षिण-बाहुभवानीचंद्रशेखरचट्टग्राम (चटगाँव), चटगाँव, बांग्लादेश
15त्रिपुरादक्षिण-पादत्रिपुरात्रिपुरेशउदयपुर, त्रिपुरा, भारत
16त्रिस्रोतावाम-पादभ्रामरीईश्वरभारत · विवादित
17कामगिरिमहामुद्रा (योनि)कामाख्याउमानंदगुवाहाटी, असम, भारत
18युगाद्यादक्षिण-पादांगुष्ठयुगाद्याक्षीरकंठक्षीरग्राम (खीरग्राम), कटवा के निकट, पूर्व बर्दवान, पश्चिम बंगाल, भारत
19कालीपीठदक्षिण-पादांगुलिकालीनकुलेशकालीघाट, दक्षिण कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत
20प्रयागहस्तांगुलिललिताभवप्रयागराज, उत्तर प्रदेश, भारत · विवादित
21जयंतीवाम-जंघाजयंतीक्रमदीश्वर
22कीरीटकिरीटभुवनेशीसंवर्तवटनगर, लालबाग़ के निकट, मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल, भारत
23मणिकर्णिकाकुण्डलविशालाक्षीकालवाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत
24कन्याश्रमपृष्ठसर्वाणीनिमिष
25कुरुक्षेत्रदक्षिण-गुल्फसावित्रीस्थाणुथानेसर के निकट, हरियाणा, भारत
26मणिवेदमणिबंधगायत्रीसर्वानंद
27श्रीहट्टग्रीवामहालक्ष्मीसंवरानंदसिलहट, सिलहट, बांग्लादेश
28कांचीकंकालदेवगर्भारुरुकांचीपुरम, तमिलनाडु, भारत · विवादित
29कालमाधवनितम्बकालीअसितांग
30नर्मदानितम्बशोणाभद्रसेनभारत · विवादित
31रामगिरिस्तनचण्डानलभारत · विवादित
32वृंदावनकेशउमाभूतेशवृंदावन, उत्तर प्रदेश, भारत · विवादित
33शुचिऊर्ध्व-दन्तनारायणीसंहार
34पंचसागरअधो-दन्तवाराहीमहारुद्र
35करतोयातटवाम-कर्णअपर्णावामेशभवानीपुर, करतोया नदी के तट पर, बोगरा, बांग्लादेश
36श्रीपर्वतदक्षिण-कर्णसुंदरीसुंदरानंदश्रीशैलम्, नंद्याल, आंध्र प्रदेश, भारत · विवादित
37विभासवाम-गुल्फभीमरूपाकपालीताम्रलिप्त (तमलुक) के निकट, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल, भारत
38प्रभासउदरचंद्रभागावक्रतुण्डप्रभास क्षेत्र, सोमनाथ (वेरावल) के निकट, गुजरात, भारत
39भैरवपर्वतओष्ठअवंतीलंबकर्णपश्चिमी मालवा (संभावित), भारत · विवादित
40जनस्थानचिबुकभ्रामरीविकृतनासिक क्षेत्र, गोदावरी के तट पर, महाराष्ट्र, भारत
41गोदावरीतीरवाम-गण्डविश्वेशीविश्वेश
42रत्नावलीदक्षिण-स्कन्धकुमारीशिव
43मिथिलावाम-स्कन्धउमामहोदरजनकपुर, तराई, नेपाल
44नलहाटीनालकालीयोगीशनलहाटी, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत
45कालीघाटमुण्डजयदुर्गाक्रोधीशजुरनपुर, कटवा के निकट, बर्दवान, पश्चिम बंगाल, भारत
46वक्रेश्वरमनस्महिषमर्दिनीवक्रनाथदुबराजपुर के निकट, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत
47यशोरपाणियशोरेश्वरीचण्डईश्वरीपुर, खुलना, बांग्लादेश
48अट्टहासओष्ठफुल्लराविश्वेशलाभपुर के निकट, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत
49नंदिपुरहारनंदिनीनंदिकेश्वरसैंथिया के निकट, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत
50लंकानूपुरइंद्राक्षीराक्षसेश्वरश्रीलंका · विवादित
51विराटपादांगुलिअंबिकाअमृतभारत · विवादित

पीठ, अंग, शक्ति व भैरव पीठनिर्णय से; “आज कहाँ” की पहचान अलग दावा है और जहाँ अनिश्चित है वहाँ ऐसा लिखा गया है।