FAQ
कालीघाट शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नहीं। पीठनिर्णय की सूची का "कालीघाट" विद्वानों के अनुसार जुरनपुर है — कटवा के पास, बर्दवान ज़िले में। कोलकाता का प्रसिद्ध कालीघाट उसी सूची में "कालीपीठ" नाम से अलग आता है।
सबसे साफ़ प्रमाण सूची में ही है। यहाँ अंग मुण्ड है, देवी जयदुर्गा और भैरव क्रोधीश। जबकि कालीपीठ पर अंग दाहिने पैर की उँगलियाँ हैं, देवी काली और भैरव नकुलेश। तीनों बातें अलग हैं — यदि दोनों एक ही स्थान होते तो एक ही सूची में उनके अंग और देवता अलग-अलग क्यों लिखे जाते?
क्योंकि शिवचरित नामक दूसरा ग्रंथ "कालीघाट" नाम से कोलकाता वाले की ही बात करता है। एक नाम, दो ग्रंथ, दो अलग स्थान — और सदियों तक दोनों एक समझे जाते रहे।
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ मुण्ड गिरा। यहाँ की शक्ति जयदुर्गा और भैरव क्रोधीश कहलाते हैं।
हाँ। कालीघाट उन आठ नामों में है जो पीठनिर्णय की कुछ प्रतियों में नहीं मिलते, और जिनके कारण बंगाल में बावन पीठों की मान्यता बनी।
