FAQ
रत्नावली शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ दक्षिण-स्कन्ध — दाहिना कंधा — गिरा। यहाँ की शक्ति कुमारी और भैरव शिव कहलाते हैं। बायाँ कंधा इसी सूची में मिथिला पर आता है।
यह तय नहीं है। विद्वान डी. सी. सरकार एक ही वाक्य में तीन संभावनाएँ गिनाते हैं और किसी को नहीं चुनते — यह संभवतः काव्यमीमांसा में उल्लिखित रत्नावती नगरी है, या बंगाल का कोई स्थान, या फिर नेपाल में वाग्मती की एक पवित्र सहायक नदी।
क्योंकि इससे अधिक विश्वसनीय रूप से ज्ञात नहीं है। जहाँ प्रमाण नहीं थे, वहाँ विद्वान ने भी अनुमान लगाकर कुछ लिख देने के बजाय अपनी अनिश्चितता दर्ज की। इस संग्रह में भी वही रुख अपनाया गया है — जो पता नहीं, उसे भरना ईमानदारी नहीं होगी।
नहीं। देवी का नाम कुमारी है और भैरव का सीधे शिव — दोनों इतने सामान्य नाम हैं कि उनसे स्थान का कोई संकेत नहीं मिलता। इक्यावन में सब स्थान समान रूप से याद नहीं रखे गए; कुछ नाम केवल नाम रह गए।
जब स्थान ही अनिश्चित है, तब किसी मंदिर की जानकारी छापना संभव ही नहीं।
