कीरीट शक्ति पीठ

kirīṭa

वह पीठ जहाँ सती का मुकुट गिरा — और जिसका नाम ही मुकुट है।

अंग · शक्ति · भैरव

अंग
किरीट
शक्ति
भुवनेशी
भैरव
संवर्त

स्रोत: Sircar 1948, pp. 35–37 (पीठनिर्णय)

महत्व

कीरीट का अर्थ है मुकुट, और पीठनिर्णय यहाँ जो बताता है वह भी किरीट ही है। स्थान का नाम और वहाँ गिरी वस्तु एक ही शब्द हैं।

यह उन स्थानों में है जहाँ देह का अंग नहीं, आभूषण गिरा — नंदिपुर में हार, लंका में नूपुर, मणिकर्णिका में कुण्डल, और यहाँ मुकुट। सिर पर धारण की जाने वाली वस्तु।

देवी यहाँ भुवनेशी कहलाती हैं, यद्यपि कुछ प्रतियों में विमला नाम भी मिलता है। भैरव संवर्त हैं। और आज लोग इस स्थान को जिस नाम से जानते हैं वह है कीरीटेश्वरी — मुकुट की स्वामिनी।

मंदिर मुर्शिदाबाद ज़िले में है, लालबाग़ के पास वटनगर में। यह वही क्षेत्र है जो कभी बंगाल की राजधानी रहा, और उस काल की स्मृतियाँ आस-पास बिखरी हुई हैं।

मुकुट सिर पर पहना जाता है — वह अंग जो सबसे ऊपर है और जिसे सबसे पहले झुकाया जाता है। जिस देह के बिखरने से ये स्थान बने, उसमें सबसे ऊपर की वस्तु का यहाँ गिरना अपने आप में एक चित्र है।

  • स्थान का नाम और वहाँ गिरी वस्तु एक ही शब्द हैं — कीरीट यानी मुकुट।
  • यह उन चार पीठों में है जहाँ अंग नहीं, आभूषण गिरा माना जाता है।
  • देवी के नाम पर पाठभेद — भुवनेशी, और विमला भी; भैरव पर संवर्त तथा सिद्धिरूप।
  • आज प्रचलित नाम कीरीटेश्वरी है, जो प्राणतोषिणी तंत्र में मिलता है।

कथा

नाम और वस्तु यहाँ एक ही हैं — कीरीट, यानी मुकुट।

सती का मुकुट

दक्ष के यज्ञ में शिव का अपमान सहकर सती ने देह त्यागी। शिव उनकी देह लेकर निकल पड़े और तीनों लोक काँपने लगे। विष्णु ने सुदर्शन चक्र से वह देह खंडित की, और जहाँ जो अंग गिरा वहाँ पीठ बना।

पीठनिर्णय कहता है कि यहाँ किरीट गिरा — मुकुट। देवी भुवनेशी हुईं, भैरव संवर्त। स्थान का नाम भी उसी मुकुट से पड़ा।

सबसे ऊपर की वस्तु

मुकुट वह वस्तु है जो सिर पर, सबसे ऊपर धारण की जाती है। और सिर वही अंग है जिसे प्रणाम में सबसे पहले झुकाया जाता है।

जिस देह के बिखरने से ये इक्यावन स्थान बने, उसमें सबसे ऊपर की वस्तु का किसी एक जगह गिरना — यह चित्र अपने आप बन जाता है, बिना किसी के बनाए।

नामों के पाठभेद

इस पीठ पर नामों को लेकर कई पाठ चलते हैं, और उन्हें छिपाना ठीक नहीं होगा।

देवी को पीठनिर्णय भुवनेशी कहता है, पर कुछ प्रतियों में विमला भी मिलता है। भैरव संवर्त हैं, और सिद्धिरूप नाम भी दर्ज है। शिवचरित भैरव को कीरीटिन् कहता है।

और जिस नाम से आज लोग इस स्थान को जानते हैं — कीरीटेश्वरी — वह प्राणतोषिणी तंत्र में मिलता है। इस संग्रह में canonical वही रखा गया है जो पीठनिर्णय कहता है, और बाक़ी नाम साथ दर्ज हैं।

स्रोत: पीठनिर्णय (महापीठनिरूपण); पाठभेद D. C. Sircar (1948) से

आज यह स्थान कहाँ है

कीरीटेश्वरी मंदिर, वटनगर, लालबाग़ के निकट, मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल, भारत

स्रोत: Sircar 1948, Index of Pithas — "located at Vatanagara near Lalbag in the Murshidabad District, Bengal"

यात्रा सुझाव

प्रमुख पर्व: नवरात्रि · दुर्गा पूजा

कीरीट शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न