लंका शक्ति पीठ

laṅkā

वह पीठ जिसका नाम ही अनिश्चित है — क्योंकि "लंका" का अर्थ है द्वीप, और द्वीप बहुत हैं।

अंग · शक्ति · भैरव

अंग
नूपुर
शक्ति
इंद्राक्षी
भैरव
राक्षसेश्वर

स्रोत: Sircar 1948, pp. 35–37 (पीठनिर्णय)

महत्व

इक्यावन पीठों में लंका उन थोड़े स्थानों में है जो भारत के बाहर हैं — और शायद अकेला ऐसा जिसका नाम ही उसकी पहचान को अनिश्चित बना देता है।

पीठनिर्णय यहाँ नूपुर बताता है — पायल। देवी इंद्राक्षी कहलाईं, भैरव राक्षसेश्वर।

दोनों नाम असाधारण रूप से विशिष्ट हैं, और यही सबसे बड़ा सुराग़ भी है। नैनातिवु द्वीप के नागपूषणी अम्मन मंदिर में शिव का नाम आज भी राक्षसेश्वर है और देवी इंद्राक्षी भी कहलाती हैं। वहाँ की परंपरा कहती है कि गौरी के सिलम्बु — यानी नूपुर — यहीं गिरे। तीनों बातें मिल जाती हैं।

पर अष्टादश स्तोत्र कुछ और कहता है — "लङ्कायां शाङ्करी देवी" — और वह शांकरी त्रिंकोमाली के कोणेश्वरम् से जोड़ी जाती हैं, जो द्वीप के दूसरे छोर पर है।

और इन सबके ऊपर एक और बात है, जिसे विद्वान डी. सी. सरकार सीधे लिखते हैं: लंका शब्द का अर्थ ही द्वीप है। वह समुद्र या नदी के किसी भी द्वीप के लिए हो सकता है।

  • देवी इंद्राक्षी और भैरव राक्षसेश्वर — दोनों नाम नैनातिवु के मंदिर से अक्षरशः मिलते हैं।
  • अंग नूपुर, और नैनातिवु की परंपरा भी गौरी के सिलम्बु (पायल) गिरने की बात कहती है।
  • अष्टादश स्तोत्र यहाँ शाङ्करी कहता है, जो त्रिंकोमाली से जोड़ी जाती हैं।
  • सरकार की चेतावनी — "लंका" का अर्थ ही द्वीप है, वह कोई भी द्वीप हो सकता है।

कथा

यहाँ की कठिनाई कथा की नहीं, नाम की है — और वह कठिनाई इक्यावन में सबसे गहरी है।

सती का नूपुर

दक्ष के यज्ञ में शिव का अपमान सहकर सती ने देह त्यागी। शिव उनकी देह लेकर निकल पड़े, और संसार को बचाने के लिए विष्णु ने सुदर्शन चक्र से वह देह खंडित की।

पीठनिर्णय कहता है कि लंका में नूपुर गिरा — पायल। यह उन थोड़े पीठों में है जहाँ अंग शरीर का नहीं, आभूषण का है। देवी इंद्राक्षी हुईं, भैरव राक्षसेश्वर।

तीन नाम जो मिल जाते हैं

नैनातिवु द्वीप के नागपूषणी अम्मन मंदिर में तीनों बातें एक साथ मिलती हैं। वहाँ शिव का नाम राक्षसेश्वर है, देवी इंद्राक्षी भी कहलाती हैं, और स्थानीय परंपरा कहती है कि गौरी के सिलम्बु — नूपुर — यहीं गिरे।

तीन स्वतंत्र बिंदुओं का इस तरह मिलना संयोग नहीं लगता। इक्यावन में ऐसे मेल कम ही मिलते हैं।

पर दूसरा दावा भी है

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्र अपनी पहली ही पंक्ति में कहता है — "लङ्कायां शाङ्करी देवी"। और वह शांकरी त्रिंकोमाली के कोणेश्वरम् मंदिर से जोड़ी जाती हैं, जो द्वीप के दूसरे छोर पर है।

उस मंदिर का इतिहास दुखद है। "सहस्र स्तंभों का मंदिर" कहलाने वाला मूल ढाँचा 1622 में पुर्तगाली उपनिवेश-काल में ध्वस्त कर दिया गया और उसका पत्थर एक क़िले में लगा दिया गया।

और नाम स्वयं अनिश्चित है

इन दोनों दावों के ऊपर एक तीसरी बात है। सरकार सीधे लिखते हैं कि "लंका" शब्द का अर्थ ही द्वीप है, और वह समुद्र या नदी के किसी भी द्वीप के लिए प्रयुक्त हो सकता है।

वे यह भी जोड़ते हैं कि अष्टादश स्तोत्र लंका और सिंहलद्वीप का अलग-अलग उल्लेख करता है — यानी उस पाठ में लंका और श्रीलंका एक ही हैं, यह भी निश्चित नहीं।

इसलिए यहाँ कोई एक स्थान नहीं चुना गया। जब स्रोत स्वयं कहे कि नाम अनिश्चित है, तो उसे निश्चित बनाकर लिखना पाठक को गुमराह करना होगा।

स्रोत: पीठनिर्णय (महापीठनिरूपण), अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्र; चेतावनी D. C. Sircar (1948) से

आज यह स्थान कहाँ है

इस पीठ का आधुनिक स्थान विद्वानों में एकमत नहीं है। नीचे दिया गया दावा स्रोत सहित है, पर अंतिम नहीं — अन्य परंपराएँ दूसरा स्थान बताती हैं।

श्रीलंका

  • नागपूषणी अम्मन मंदिर, नैनातिवु द्वीप (जाफ़ना के निकट)यहाँ शिव का नाम राक्षसेश्वर (नयनार) है और देवी इंद्राक्षी भी कहलाती हैं — दोनों नाम पीठनिर्णय से अक्षरशः मेल खाते हैं। परंपरा कहती है कि यहाँ गौरी के सिलम्बु, यानी नूपुर गिरे — और पीठनिर्णय का अंग भी नूपुर ही है। (प्रचलित परंपरा; नाम व अंग का साम्य पीठनिर्णय से)
  • शांकरी देवी, कोणेश्वरम् मंदिर, त्रिंकोमालीअष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्र "लङ्कायां शाङ्करी देवी" कहता है, और वह शांकरी त्रिंकोमाली से जोड़ी जाती है। मूल मंदिर 1622 में पुर्तगालियों द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था। (अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्र; प्रचलित परंपरा)
  • कोई भी द्वीप — नाम स्वयं अनिश्चित हैसरकार चेताते हैं कि "लंका" शब्द का अर्थ ही द्वीप है और वह समुद्र या नदी के किसी भी द्वीप के लिए हो सकता है। साथ ही अष्टादश स्तोत्र लंका और सिंहलद्वीप का अलग-अलग उल्लेख करता है — जिससे यह भी निश्चित नहीं कि उस पाठ की लंका श्रीलंका ही है। (D. C. Sircar, The Śākta Pīṭhas (1948))

स्रोत: Sircar 1948, Index of Pithas — "modern Ceylon, but the Astadasa makes separate mention of Lanka and Simhaladvipa. The word lanka means 'an island' and may indicate any island in the sea or a river."

यात्रा सुझाव

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लंका शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न