FAQ
भैरवपर्वत शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ ओष्ठ — होंठ — गिरा। यहाँ की शक्ति अवंती और भैरव लंबकर्ण कहलाते हैं। कुछ प्रतियों में अंग ऊर्ध्वोष्ठ यानी ऊपर का होंठ, और भैरव नम्रकर्ण भी लिखे मिलते हैं।
यह निश्चित नहीं है। विद्वान डी. सी. सरकार इसे "संभवतः पश्चिमी मालवा में" रखते हैं — वे स्वयं "संभवतः" कहते हैं। देवी का नाम अवंती होना उज्जैन-क्षेत्र की ओर संकेत करता है, क्योंकि अवंती प्राचीन काल में उज्जयिनी और उसके आसपास के देश का नाम था।
हाँ, यह अलग record है — पीठनिर्णय में #39, जबकि उज्जयिनी #13 है। पर दोनों उज्जैन-क्षेत्र की ओर संकेत करते हैं, और दोनों में से किसी की पहचान पक्की नहीं। उज्जयिनी की अपनी पहचान भी विवादित है, क्योंकि सरकार वहाँ बंगाल के कोगराम का विकल्प भी देते हैं।
अवंती प्राचीन काल में एक पूरे देश का नाम था, जिसकी राजधानी उज्जयिनी थी। सरकार अपनी अनुक्रमणिका में लिखते हैं कि अवंती उज्जयिनी या उसके चारों ओर का क्षेत्र ही है।
जब स्थान ही अनिश्चित है, तब किसी एक मंदिर के दर्शन समय छाप देना पाठक को भ्रमित करना होगा।
