भैरवपर्वत शक्ति पीठ

bhairavaparvata

वह पीठ जिसकी देवी का नाम अवंती है — और जिससे उज्जैन-क्षेत्र पर दूसरा दावा खड़ा हो जाता है।

अंग · शक्ति · भैरव

अंग
ओष्ठ
शक्ति
अवंती
भैरव
लंबकर्ण

स्रोत: Sircar 1948, pp. 35–37 (पीठनिर्णय)

महत्व

भैरवपर्वत उन पीठों में है जहाँ पहचान का प्रश्न एक दिलचस्प मोड़ लेता है।

पीठनिर्णय यहाँ ओष्ठ बताता है — होंठ। देवी अवंती कहलाईं, भैरव लंबकर्ण। कुछ प्रतियों में अंग ऊर्ध्वोष्ठ यानी ऊपर का होंठ, और भैरव नम्रकर्ण भी मिलता है।

विद्वान डी. सी. सरकार इस पीठ को "संभवतः पश्चिमी मालवा में" रखते हैं। ध्यान दीजिए — वे "संभवतः" कहते हैं, निश्चित नहीं।

पर देवी का नाम एक और संकेत देता है। **अवंती** प्राचीन काल में उज्जयिनी और उसके आसपास के क्षेत्र का नाम था; सरकार स्वयं अपनी अनुक्रमणिका में लिखते हैं कि अवंती उज्जयिनी या उसके चारों ओर का देश ही है।

इससे एक असामान्य स्थिति बनती है। इसी सूची में #13 उज्जयिनी नाम का एक और पीठ है — और वह भी उज्जैन की ओर जाता है, यद्यपि उसकी अपनी पहचान विवादित है (उज्जैन बनाम कोगराम, बंगाल)।

यानी दो पीठ एक ही क्षेत्र की ओर इशारा करते हैं, और दोनों में से किसी की पहचान पक्की नहीं। इस सूची में नामों की उलझन बार-बार इसी तरह सामने आती है।

  • सरकार स्वयं "probably" कहते हैं — पहचान निश्चित नहीं।
  • देवी का नाम अवंती है, जो प्राचीन उज्जयिनी-क्षेत्र का नाम था।
  • इसी सूची में #13 उज्जयिनी भी उज्जैन की ओर जाता है — दो पीठ, एक क्षेत्र।
  • पाठभेद — अंग ऊर्ध्वोष्ठ, भैरव नम्रकर्ण, तथा पीठ का नाम भीरुपर्वत भी।

कथा

यहाँ की उलझन नाम की है — और वह नाम एक पूरे प्राचीन देश का है।

सती का ओष्ठ

दक्ष के यज्ञ में शिव का अपमान सहकर सती ने देह त्यागी। शिव उनकी देह लेकर निकल पड़े और तीनों लोक काँपने लगे। विष्णु ने सुदर्शन चक्र से वह देह खंडित की, और जहाँ जो अंग गिरा वहाँ पीठ बना।

पीठनिर्णय कहता है कि भैरवपर्वत में ओष्ठ गिरा — होंठ। देवी अवंती हुईं, भैरव लंबकर्ण। कुछ प्रतियों में अंग ऊर्ध्वोष्ठ और भैरव नम्रकर्ण भी लिखे मिलते हैं।

अवंती नाम का संकेत

देवी का नाम अवंती है — और यह नाम केवल एक देवी का नहीं।

अवंती प्राचीन काल में एक पूरे देश का नाम था, जिसकी राजधानी उज्जयिनी थी। सरकार स्वयं अपनी अनुक्रमणिका में लिखते हैं कि अवंती उज्जयिनी या उसके चारों ओर का क्षेत्र ही है।

तो देवी के नाम से यह पीठ उज्जैन की ओर संकेत करता है, यद्यपि सरकार स्थान के बारे में केवल "संभवतः पश्चिमी मालवा" कहते हैं।

दो पीठ, एक क्षेत्र

यहीं एक असामान्य स्थिति बनती है।

इसी सूची में #13 उज्जयिनी नाम का एक और पीठ है। वह भी उज्जैन की ओर जाता है — यद्यपि उसकी अपनी पहचान विवादित है, क्योंकि सरकार वहाँ "उजानी भी देखिए" जोड़ते हैं और उजानी बंगाल में कोगराम है।

यानी दो पीठ एक ही क्षेत्र की ओर इशारा करते हैं, और दोनों में से किसी की पहचान पक्की नहीं।

यह इस सूची की एक बार-बार दिखने वाली बात है। एक ही नाम दो जगह बैठ जाता है, या दो नाम एक ही जगह पर आ जाते हैं — और सदियों बाद पढ़ने वाला यह तय नहीं कर पाता कि किधर देखे। इस संग्रह में ऐसे प्रश्न सुलझाए नहीं जाते; उन्हें साफ़ दिखा दिया जाता है।

स्रोत: पीठनिर्णय (महापीठनिरूपण); पहचान पर D. C. Sircar (1948)

आज यह स्थान कहाँ है

इस पीठ का आधुनिक स्थान विद्वानों में एकमत नहीं है। नीचे दिया गया दावा स्रोत सहित है, पर अंतिम नहीं — अन्य परंपराएँ दूसरा स्थान बताती हैं।

पश्चिमी मालवा (संभावित), भारत

  • पश्चिमी मालवा, मध्य प्रदेशसरकार इसे "संभवतः पश्चिमी मालवा में" रखते हैं — पर वे स्वयं "probably" शब्द का प्रयोग करते हैं, यानी यह निश्चित नहीं। (Sircar 1948, Index of Pithas)
  • उज्जैन-क्षेत्र (अवंती)यहाँ देवी का नाम अवंती है, और सरकार की अलग प्रविष्टि कहती है कि अवंती उज्जयिनी या उसके आसपास का क्षेत्र ही है। इससे यह पीठ उज्जैन की ओर संकेत करता है। (Sircar 1948, Index of Pithas (Avanti))

स्रोत: Sircar 1948, Index of Pithas — "probably in West Malwa"

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भैरवपर्वत शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न