नर्मदा शक्ति पीठ

narmadā

वह पीठ जिसका नाम दो नदियों पर बैठता है — और दोनों का उद्गम एक ही पहाड़ से है।

अंग · शक्ति · भैरव

अंग
नितम्ब
शक्ति
शोणा
भैरव
भद्रसेन

स्रोत: Sircar 1948, pp. 35–37 (पीठनिर्णय)

महत्व

इक्यावन में यह चौथा पीठ है जिसका नाम किसी नदी पर है — करतोयातट, सुगंधा और गंडकी के बाद। पर इसकी उलझन सबसे दिलचस्प है, क्योंकि यहाँ **दो नदियाँ** आमने-सामने हैं।

पीठनिर्णय यहाँ नितम्ब बताता है। देवी शोणा कहलाईं, भैरव भद्रसेन। कुछ प्रतियों में देवी का नाम शिवानी भी मिलता है।

विद्वान डी. सी. सरकार इस प्रविष्टि को **शोण** के नाम से रखते हैं और उसे **सोन नदी** बताते हैं — वही जो पटना के पास गंगा से मिलती है। "नर्मदा" उनके यहाँ एक पाठभेद है।

दूसरी ओर प्रचलित सूचियाँ इसे **अमरकंटक** से जोड़ती हैं, जहाँ से नर्मदा निकलती है।

और यहीं एक बात खुलती है जो इस उलझन को समझा देती है: **सोन और नर्मदा — दोनों का उद्गम अमरकंटक के उसी क्षेत्र से माना जाता है।** सरकार स्वयं अपनी अमरकंटक प्रविष्टि में यही लिखते हैं।

दो नदियाँ, एक पहाड़ से निकलती हुईं, फिर विपरीत दिशाओं में बहती हुईं — एक पूरब को, एक पश्चिम को। जिस पीठ का नाम इनसे जुड़ा हो, उसका दो जगह बँट जाना स्वाभाविक ही लगता है।

  • सरकार इसे "शोण" नाम से रखते हैं और सोन नदी बताते हैं; "नर्मदा" वहाँ पाठभेद है।
  • प्रचलित सूचियाँ इसे अमरकंटक — नर्मदा का उद्गम — से जोड़ती हैं।
  • सोन और नर्मदा दोनों का उद्गम अमरकंटक के एक ही क्षेत्र से माना जाता है।
  • इक्यावन में चौथा पीठ जिसका नाम किसी नदी पर है।

कथा

यहाँ की उलझन दो नदियों की है — और उनका जन्म एक ही पहाड़ से हुआ है।

सती का नितम्ब

दक्ष के यज्ञ में शिव का अपमान सहकर सती ने देह त्यागी। शिव उनकी देह लेकर निकल पड़े और तीनों लोक काँपने लगे। विष्णु ने सुदर्शन चक्र से वह देह खंडित की, और जहाँ जो अंग गिरा वहाँ पीठ बना।

पीठनिर्णय कहता है कि यहाँ नितम्ब गिरा। देवी शोणा हुईं, भैरव भद्रसेन। कुछ प्रतियों में देवी का नाम शिवानी भी मिलता है।

ध्यान रहे कि नितम्ब कालमाधव पीठ पर भी आता है — यह उन थोड़े अंगों में है जो दो जगह दर्ज हैं।

शोण या नर्मदा

विद्वान डी. सी. सरकार इस प्रविष्टि को शोण के नाम से रखते हैं, और उसे सोन नदी बताते हैं — वही जो पटना के पास गंगा से मिलती है। उनके यहाँ "नर्मदा" एक पाठभेद है।

प्रचलित सूचियाँ इसके उलट अमरकंटक की ओर जाती हैं, जहाँ से नर्मदा निकलती है।

दो नदियाँ, दो दिशाएँ — एक पूरब बहती है, दूसरी पश्चिम।

एक ही पहाड़ से

और यहीं वह बात खुलती है जो इस पूरी उलझन को समझा देती है।

**सोन और नर्मदा — दोनों का उद्गम अमरकंटक के उसी क्षेत्र से माना जाता है।** सरकार स्वयं अपनी अमरकंटक प्रविष्टि में लिखते हैं कि सोन और नर्मदा दोनों का स्रोत वहीं है।

दो नदियाँ एक ही पहाड़ से निकलती हैं और फिर विपरीत दिशाओं में चली जाती हैं। जिस पीठ का नाम इनसे जुड़ा हो, उसका दो जगह बँट जाना स्वाभाविक ही लगता है।

यह इस सूची की सबसे साफ़ मिसाल है कि नामों की उलझन प्रायः भूगोल से ही निकलती है — किसी की भूल से नहीं।

स्रोत: पीठनिर्णय (महापीठनिरूपण); पहचान पर D. C. Sircar (1948)

आज यह स्थान कहाँ है

इस पीठ का आधुनिक स्थान विद्वानों में एकमत नहीं है। नीचे दिया गया दावा स्रोत सहित है, पर अंतिम नहीं — अन्य परंपराएँ दूसरा स्थान बताती हैं।

भारत

  • सोन नदी — पटना के पास गंगा से मिलने वालीसरकार इस प्रविष्टि को "शोण" नाम से रखते हैं और उसे सोन नदी बताते हैं। "नर्मदा" वहाँ एक पाठभेद के रूप में आता है। (Sircar 1948, Index of Pithas (Sona))
  • अमरकंटक, मध्य प्रदेश — नर्मदा का उद्गमप्रचलित सूचियाँ इसे नर्मदा के उद्गम अमरकंटक से जोड़ती हैं। ध्यान रहे कि सोन और नर्मदा दोनों का उद्गम इसी क्षेत्र से माना जाता है — संभवतः यही समीपता दोनों नामों की उलझन का कारण है। (प्रचलित परंपरा; Sircar की Amarakantaka प्रविष्टि भी दोनों नदियों का उद्गम वहीं बताती है)

स्रोत: Sircar 1948, Index of Pithas (Sona) — "celebrated tributary joining the Ganges near Patna in Bihar"

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यात्रा सुझाव

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नर्मदा शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न