हिंगुला शक्ति पीठ

hiṅgulā

सूची का पहला पीठ — बलूचिस्तान की पहाड़ियों में, जहाँ देवी को स्थानीय लोग "बीबी नानी" भी कहते हैं।

अंग · शक्ति · भैरव

अंग
ब्रह्मरन्ध्र
शक्ति
कोट्टरी
भैरव
भीमलोचन

स्रोत: Sircar 1948, pp. 35–37 (पीठनिर्णय)

महत्व

पीठनिर्णय की सूची हिंगुला से शुरू होती है। इक्यावन में यह पहला नाम है — और वह भारत में नहीं, बलूचिस्तान में है।

यह अपने आप में एक बात कहता है। जिस परंपरा को हम आज देश की सीमाओं के भीतर सोचते हैं, उसकी अपनी सूची पहले ही नाम पर सीमा पार कर जाती है।

पीठनिर्णय यहाँ ब्रह्मरन्ध्र बताता है — सिर के ऊपर का वह बिंदु जिसे योग-परंपरा में चेतना का द्वार माना जाता है। देवी कोट्टरी कहलाईं, भैरव भीमलोचन।

मंदिर अघोर नदी के किनारे है, जिसे हिंगोल भी कहते हैं। यह मरुभूमि और पहाड़ों का इलाक़ा है, और वहाँ तक पहुँचना सदा कठिन रहा है।

एक बात जो विद्वान डी. सी. सरकार स्वयं दर्ज करते हैं, और जो शायद इस पूरे संग्रह की सबसे मार्मिक पंक्ति है: वहाँ देवी को स्थानीय लोग **बीबी नानी** कहकर पुकारते हैं।

जिस भूमि पर सदियों से दूसरा धर्म बसा है, वहाँ वही स्थान एक दूसरे नाम से पूजा जाता रहा। तीर्थ मिट नहीं गया — उसने भाषा बदल ली।

  • पीठनिर्णय की सूची का पहला नाम — और वह भारत के बाहर है।
  • स्थानीय लोग देवी को "बीबी नानी" भी कहते हैं — यह विवरण स्वयं सरकार दर्ज करते हैं।
  • अंग ब्रह्मरन्ध्र — सिर के ऊपर का वह बिंदु जिसे चेतना का द्वार माना जाता है।
  • चंडीमंगल परंपरा में यहाँ अंग नाभि बताया गया है और देवी का नाम संदिग्ध।

कथा

सूची यहीं से शुरू होती है — और पहला ही पीठ बताता है कि यह परंपरा कितनी दूर तक फैली थी।

सती का ब्रह्मरन्ध्र

दक्ष के यज्ञ में शिव का अपमान सहकर सती ने देह त्यागी। शिव उनकी देह लेकर निकल पड़े और तीनों लोक काँपने लगे। विष्णु ने सुदर्शन चक्र से वह देह खंडित की, और जहाँ जो अंग गिरा वहाँ पीठ बना।

पीठनिर्णय कहता है कि हिंगुला में ब्रह्मरन्ध्र गिरा। देवी कोट्टरी हुईं, भैरव भीमलोचन।

ब्रह्मरन्ध्र सिर के ऊपर का वह बिंदु है जिसे योग-परंपरा में चेतना के निकलने का द्वार माना जाता है। सूची के पहले ही स्थान पर सबसे ऊपर का बिंदु — यह क्रम संयोग हो सकता है, पर पढ़ने में अर्थ भर देता है।

एक और नाम

विद्वान डी. सी. सरकार अपनी अनुक्रमणिका में एक बात लिखते हैं जो सहज ही छूट सकती थी: हिंगलाज में देवी को स्थानीय लोग **बीबी नानी** कहकर पुकारते हैं।

यह छोटी-सी पंक्ति बहुत कुछ कहती है। जिस भूमि पर सदियों से दूसरा धर्म बसा हुआ है, वहाँ यह स्थान मिटा नहीं। लोग वहाँ जाते रहे, पूजते रहे — बस नाम बदल गया।

तीर्थ कभी-कभी इसी तरह बचते हैं। वे भाषा बदल लेते हैं, ताकि बने रह सकें।

एक पाठभेद

सब स्रोत यहाँ एक बात नहीं कहते। चंडीमंगल की परंपरा में इस स्थान पर अंग नाभि बताया गया है, और सरकार टिप्पणी करते हैं कि वहाँ देवी का नाम संदिग्ध है।

पीठनिर्णय ब्रह्मरन्ध्र कहता है, और इस संग्रह में वही canonical है। पर दूसरा पाठ छिपाया नहीं गया।

स्रोत: पीठनिर्णय (महापीठनिरूपण); "बीबी नानी" व चंडीमंगल का पाठभेद D. C. Sircar (1948) से

आज यह स्थान कहाँ है

हिंगलाज माता मंदिर, हिंगलाज, अघोर (हिंगोल) नदी पर, बलूचिस्तान, पाकिस्तान

स्रोत: Sircar 1948, Index of Pithas — "same as Hinglaja (Hinglaj) in Baluchistan where the goddess is locally called Bibi Nani"

यात्रा सुझाव

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हिंगुला शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न