FAQ
हिंगुला शक्ति पीठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीठनिर्णय के अनुसार यहाँ ब्रह्मरन्ध्र गिरा — सिर के ऊपर का वह बिंदु जिसे योग-परंपरा में चेतना का द्वार माना जाता है। यहाँ की शक्ति कोट्टरी और भैरव भीमलोचन कहलाते हैं। चंडीमंगल की परंपरा में यहाँ अंग नाभि बताया गया है, पर वहाँ देवी का नाम भी संदिग्ध माना गया है।
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में, अघोर नदी के किनारे — जिसे हिंगोल भी कहा जाता है। यह मरुभूमि और पहाड़ों का इलाक़ा है और वहाँ तक पहुँचना सदा कठिन रहा है।
यह विवरण विद्वान डी. सी. सरकार स्वयं दर्ज करते हैं — हिंगलाज में देवी को स्थानीय लोग इसी नाम से पुकारते रहे हैं। जिस भूमि पर सदियों से दूसरा धर्म बसा है, वहाँ यह स्थान मिटा नहीं; लोग वहाँ जाते रहे, बस नाम बदल गया।
पीठनिर्णय की सूची में यह पहला नाम है। ध्यान देने योग्य है कि सूची का पहला पीठ ही भारत के बाहर है — यह बताता है कि यह परंपरा कितनी दूर तक फैली हुई थी।
यह पीठ भारत के बाहर है, दूरस्थ क्षेत्र में है, और इसका कोई आधिकारिक स्रोत नहीं मिला जिससे जानकारी सत्यापित की जा सके। बिना पुष्टि के ऐसी जानकारी छापना इस संग्रह के नियम के विरुद्ध है।
